Constitution of India: आखिर सरदार पटेल को क्यों बदलना पड़ा बाबासाहब के प्रति अपना फैसला?

Constitution of India, Sardar Vallabh bhai patel
Source: Google

Constitution of India : ये तो हम सभी जानते है कि बाबा साहब को संविधान सभा का सदस्य बनने के लिए कितने पापड़ बेलने पड़े थे, वो महाराष्ट्र छोड़ कर बंगाल विधानसभा से चुनाव लड़ने गए और जीतने के बाद बंगाल के प्रतिनीधि के तौर पर शामिल हुए थे, लेकिन बंटवारे के बाद बाबा साहब का सपना टूट गया था, उनका विधानसभा क्षेत्र पूर्वी पाकिस्तान का हिस्सा बन गया, तो वहीं फिर से महात्मा गांधी के कारण उन्हे महाराष्ट्र का प्रतिनीधि चुना गया और वो संविधान सभा में आये थे, लेकिन पंडित जवाहर लाल नेहूरू ने पूरी कोशिश की थी कि बाबा साहब संविधान सभा से दूर रहे, लेकिन क्या आप ये जानते है।

कि एक और महान शख्स थे, जो कभी नहीं चाहते थे कि बाबा साहब संविधान सभा का सदस्य बने.. इतना ही नहीं उन्होंने कई हथकंडे अपनाये, लेकिन फिर भी वो बाबा साहब को नहीं रोक सकें.. ये शख्स थे सरदार बल्लभ भाई पटेल… पटेल की लाख कोशिश के बाद भी बाबा साहब संविधान सभा में गए..अब सवाल ये है कि आखिर पटेल क्यों नहीं चाहते थे कि बाबा साहब संविधान सभा में शामिल हो..

क्यों किया था पटेल ने विरोध

एक वाक्य मिलता है कि पटेल को जब पता चला कि बाबा साहब संविधान सभा के सदस्य चुने जाने वाले है तो पटेल ने कहा था कि वो भी देखते है कि कैसे बाबा साहब संविधान सभा में आते है, उन्होंने खिड़की दरवाजे ही नहीं वेंटिलेशन तक बंद करके रखा हुआ है।  बाबा साहब और पटेल का सबसे पहला टकराव 1931से 1933 में राउंड टेवल में हुआ था.. जब बाबा साहब की दलीलो ने सबकी बोलती बंद कर दी थी, और ये बाबा साहब की जिद की देन थी कि 1935 में पहली बार सेकेंड इंडिया एक्ट बनाया गया था।

शेड्यूल कास्ट फेडरेशन पश्चिम बंगाल

1946 में जब संविधान सभा के सदस्य चुने जाने लगे तो पटेल हो या नेहरू, उन्होंने साफ कह दिया था कि वो बाबा साहब को किसी भी हाल में संविधान सभा में नहीं आने देंगे, ऐसे में उनके शेड्यूल कास्ट फेडरेशन पश्चिम बंगाल के सदस्य जोगेंद्रनाथ मंडल ने बाबा साहब को बंगाल आकर विधानसभा चुनाव लड़ने को कहा था। बंगाल में मुस्लिम लीग की सरकार थी इसलिए बाबा साहब जीते थे, लेकिन यहां कांग्रेस ने एक गंदी चाल चली.. दरअसल बाबा साहब खुलना विधानसभा से जीते थे, जहां करीब 60 प्रतिशत से भी ज्यादा हिंदू थे, लेकिन बंटवारे की क्राइटेरिया में कहा गया कि जहां 50 प्रतिशत से ज्यादा हिंदू है वो भारत का हिस्सा रहेगा, लेकिन कांग्रेस ने जानबूझ कर खुलना को पूर्वी पाकिस्तान को दे दिया..जिससे बाबा साहब का सदस्यता खत्म हो गई।

संविधान सलाहगार समिति

लेकिन बाबा साहब ने हार नहीं मानी और उन्होंने अंग्रेजी हुकुमत से इस बार मदद मांगी, जिसके बाद अंग्रेजी हुकूमत और गाँधी जी के दवाब में आकर कांग्रेस को बाबा साहब को चुनना पड़ा। संविधान सभा में तीन समिती बनी- पहली संविधान सभा समिति जिसके अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद थे, संविधान सलाहगार समिति जिसके अध्यक्ष पटेल थे, और मसूदा समिती बनी-जिसे ड्राफ्टिंग कमिटी कहा गया, उसके अध्यक्ष थे बाबा साहब अंबेडकर। जिसमें मात्र 7 सदस्य थे, लेकिन 6 सदस्य किसी कारण सभा का हिस्सा बन ही नहीं पाये, जिस कारण संविधान की ड्राफ्टिंग करने की अकेले जिम्मेदारी बाबा साहब के ऊपर थी..जिसे उन्होंने बखूबी निभाया, जिसे खुद राजेंद्र प्रसाद ने भी माना था, कि उन्होंने अकेले ये संविधान तैयार किया था।

वैचारिक मतभेद लेकिन फिर दिया साथ-

पटेल और बाबा साहब के बीच गांधी जी ही की तरह वैचारित मतभेद थे। एक तरफ बाबा साहब चाहते थे कि दलितों को अलग से निर्वाचिका मिले, साथ ही दलितों की स्थिति को बेहतर करने और उन्हें समाज में बराबरी का सम्मान देने के लिए आरक्षण आवश्यक था, लेकिन दूसरी तरफ पटेल मानते थे कि धर्म और जाति के आधार पर अलग निर्वाचिका से देश की एकता और अखंडता पर बुरा प्रभाव पड़ेगा। उनका मानना था कि संविधान में जात पात को खत्म करने से आरक्षण की जरूरत ही नहीं पड़ती.. बाबा साहब चाहते थे कि दलितों के अधिकारों की रक्षा के अलग से प्रावधान आवश्यक है, लेकिन पटेल आरक्षण को ही भेदभाव का बड़ा कारण मानते थे।

इंडिया एक्ट को लेकर मसौदा तैयार

हालांकि वैचारिक मतभेद होते हुए भी कभी बाबा साहब का विरोध करने वाले पटेल ने ही बाबा साहब के लिए संविधान सभा का रास्ता खोला था। 1935 में बनाये सेकेंड इंडिया एक्ट को लेकर मसौदा तैयार करने की बात हुई तो पटेल ये जानते थे कि केवल बाबा साहब ही है जो एक ऐसा संविधान तैयार कर पायेंगे, जो देश को तरक्की पर ले जायेगा..उनकी दूरदर्शिता सदैव अविस्मरणीय थी.. इसलिए गांधी जी के समर्थन में वो बाद में बाबा साहब को बुलाने के लिए राज हुए।

उन्होंने भी बाबा साहब को अकेले काम करते देखा था और पटेल ने मौलिक अधिकारों, अल्पसंख्यकों और प्रांतीय संविधान समितियों को तैयार करने में अहम रोल प्ले किया था। बाबा साहब ने जब संविधान का ड्राप्ट पेश किया था तब समिति के एक सदस्य टी. टी.कृष्णामाचारी ने कहा था कि अंबेडकर सही मायने में संविधान के शिल्पकार है। कांग्रेस और कांग्रेस के कई नेताओं के न चाहते हुए भी बाबा साहब सभे सदस्य बने..और उन्होंने दुनिया का सबसे बड़ा संविधान तैयार किया। जिसे सबने स्वीकार किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *