249 BNS in Hindi – भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 249 एक महत्वपूर्ण विषय पर केंद्रित है, जिसे अपराधी को आश्रय देना (Harbouring Offender) कहा जाता है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस में इसके के बारे में क्या कहा गया है।
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धारा 249 क्या कहती है? BNS Section 249 in Hindi
जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस की धारा 249 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 249 के तहत, बीएनएस में यह प्रावधान शामिल है कि यदि किसी व्यक्ति ने कोई अपराध किया हो और अन्य कोई ऐसा व्यक्ति, जो उसे जानता हो या जिसे उसके अपराधी होने का संदेह है, उसे कानून के दंड से बचाने के उद्देश्य से शरण या समर्थन देता है, तो वह भी उस दंड का भागी होगा।
आपको बता दें, यह धारा तब लागू नहीं होती जब पति या पत्नी एक-दूसरे को संश्रय देते हैं। उदाहरण के लिए, यदि एक पत्नी अपने अपराधी पति को शरण देती है, तो उस पत्नी पर BNS की धारा 249 लागू नहीं होगी। क्योंकि यहाँ पति और पत्नी के बीच के संबंध को अपवाद माना गया है, न कि किसी अन्य रिश्तेदार को।
BNS 249 Important Points
- यह धारा तब लागू नहीं होती जब पति या पत्नी एक-दूसरे को संश्रय देते हैं।
- इसमें वो अपराध भी शामिल है जो विदेश में किए गए ऐसे कार्य भी शामिल हैं जो भारत में अपराध माने जाते और दंडनीय होते।
- 1 साल तक की कैद वाले अपराध उस अपराध के लिए निर्धारित सजा की एक-चौथाई तक की कैद या जुर्माना या दोनों।
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बीएनएस धारा 249 की और सजा
इसके अतिरिक्त, बीएनएस (BNS) की धारा 249 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को दोषी ठहराया जाता है, तो उसके लिए सजा निर्धारित की गई है। यदि झूठा आरोप किसी ऐसे अपराध से संबंधित है, जिसके लिए मृत्यु दंड, आजीवन कारावास (life imprisonment), या 10 साल या उससे अधिक की सजा का प्रावधान नहीं है, तो दोषी को 10 वर्ष के कारावास (imprisonment) से दंडनीय है, तो उस व्यक्ति को शरण देने वाले व्यक्ति को अधिकतम तीन वर्ष तक की कैद हो सकती है। जुर्माना भी लगाया जाना चाहिए।



