Gujarat Dalit news: क्या अब अपना काम ईमानदारी से करना भी कोई जुर्म है? या दलित होने की मिली सजा! साबरकांठा में एक दलित डिप्टी सरपंच को सिर्फ इसलिए प्रताड़ित किया गया क्योंकि वह पंचायत के फैसले को लागू कर रहे थे। जब ईमानदारी पर जातिवाद भारी पड़ने लगे, तो सवाल प्रशासन और समाज दोनों पर उठते हैं। गुजरात के साबरकांठा जिला से एक मामला सामने आया है, जहां एक दलित डिप्टी सरपंच ने गांव के आठ लोगों पर जातिसूचक गालियां देने और धमकाने का आरोप लगाया है। घटना मेमदपुर गांव की बताई जा रही है और यह विवाद एक बर्ड फीडिंग टावर को लेकर शुरू हुआ, जिसे पंचायत ने जर्जर हालत के कारण हटाने का फैसला लिया था। लेकिन डिप्टी सरपंच के लिए यह सरकारी फैसला उस वक्त मुसीबत बन गया, जब कुछ लोगों ने इसे जातिवाद और व्यक्तिगत रंजिश का मुद्दा बना लिया।
जानें क्या है पूरा मामला?
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के मुताबिक बताया जा रहा है कि गांव की ग्राम पंचायत ने एक पुराने और जर्जर हो चुके बर्ड फीडिंग टावर को हटाने का फैसला किया था। पंचायत का कहना था कि टावर खराब हालत में है और कभी भी गिर सकता है, इसलिए उसे हटाना जरूरी है। डिप्टी सरपंच कांजीभाई अरखाभाई 25 फरवरी को कुछ ग्रामीणों के साथ मौके पर गए थे। उसी दौरान कुछ लोगों ने आपत्ति जताई और कहा कि यह टावर उनके पुरखों ने बनवाया था, इसलिए इसे गिराया नहीं जाना चाहिए।
इस पर तय हुआ कि रात में गांव की मीटिंग में इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी। लेकिन आरोप है कि इसी दौरान आरोपियों ने डिप्टी सरपंच को निशाना बनाते हुए जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया और उनके साथ गाली-गलौज की। डिप्टी सरपंच का कहना है कि उन्हें केवल इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि वे दलित समुदाय से आते हैं और सरकारी आदेश का पालन करवा रहे थे।
मीटिंग में बढ़ा विवाद
सरपंच की शिकायत के अनुसार 26 फरवरी की रात करीब 8:30 बजे गांव के लोगों के साथ बैठक हुई। इस दौरान आरोपियों में से एक व्यक्ति ने कहा कि टावर उनके पूर्वजों ने बनवाया था और अगर कुछ करना है तो वे खुद उसे तोड़कर नया बनवाएंगे। आरोप है कि इसी मीटिंग के दौरान आठ लोगों ने डिप्टी सरपंच को जातिसूचक गालियां दीं और उन्हें धमकाया भी। घटना के बाद डिप्टी सरपंच ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।
आठ लोगों पर केस
डिप्टी सरपंच कांजीभाई अरखाभाई ने अतुलसिंह परमार, रमेशजी चौहान, हिम्मतसिंह परमार, मनहरसिंह परमार, पिंटूसिंह परमार, उदेसिंह परमार, हाथीसिंह परमार और अनिरुद्धसिंह परमार के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। पुलिस ने सभी आठ आरोपियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। कांजीभाई पिछले छह महीनों से गांव के डिप्टी सरपंच के तौर पर जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसके अलवा आपको बता दें, पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। गांव में इस घटना के बाद माहौल को शांत बनाए रखने के लिए भी प्रशासन सतर्क है।



