Dalit Cobbler Ramchet Mochi: सुल्तानपुर (Sultanpur) के दलित मोची (Dalit Clobber) रामचेत का हाल ही में कैंसर और टीबी के कारण निधन हो गया। पिछले सवा साल से वह सुर्खियों में रहे, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनसे मुलाकात की थी और उनकी दुकान पर जूते की सिलाई भी की थी। रामचेत के निधन की खबर सुनते ही राहुल गांधी ने उनके बेटे राघवराम से फोन पर बात की और उन्हें अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
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रामचेत मोची का हुआ निधन
हाल ही में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के सुल्तानपुर जिले (Sultanpur district) के कूरेभार (Kurebhar) क्षेत्र से एक दुखद समाचार आया है। दरअसल, ढेसरूआ गाँव (Dhesrua village) के निवासी रामचेत मोची का मंगलवार सुबह निधन हो गया। वे काफी समय से कैंसर (Cancer) और टीबी (TB) जैसी गंभीर बीमारियों से लड़ रहे थे। वही पिछले साल जुलाई में कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) से उनकी हुई मुलाकात ने उन्हें काफी प्रसिद्धि दिलाई थी।
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राहुल गांधी ने की आर्थिक मदद
इतना ही नहीं राहुल गांधी ने उनकी आर्थिक सहायता की, जिसके कारण उनका कारोबार भी बेहतर हुआ। हालाँकि, लंबे समय तक गंभीर बीमारी के कारण रामचेत काफी कमज़ोर हो गए थे। इलाज के बावजूद उनका निधन हो गया। वही जब रामचेत मोची की देहांत के बारे में राहुल गाँधी को पता चला तो उन्होंने तुरंत रामचेत के बेटे राघवराम को फ़ोन किया। जहाँ उनके बेटे ने बताया कि मंगलवार सुबह करीब 4 बजे उनके पिता का निधन हो गया।
वही राहुल गांधी ने राघव राम और उनके परिवार को हर प्रकार की सहायता का आश्वासन दिया और कहा हम आपके साथ हर पल खड़े हैं। उनके निर्देश पर, अमेठी और सुल्तानपुर के जिला अध्यक्षों सहित कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने रामचेत के घर जाकर उनके परिवार को वित्तीय मदद प्रदान की। इसके अलवा रामचेत का इलाज भी राहुल गांधी द्वारा संचालित किया जा रहा था।
कैसे हुयी थी मोची रामचेत से मुलाकात
पिछले साल जुलाई में, जब राहुल गांधी सुल्तानपुर के दिवानी न्यायालय में मानहानि के एक मामले में पेशी के बाद लखनऊ लौट रहे थे, तब उन्होंने विधायक नगर स्थित रामचेत की गुमठी पर रुककर उनसे बातचीत की। इस बातचीत के दौरान, राहुल गांधी ने रामचेत से उनकी आजीविका के बारे में पूछा। रामचेत ने बताया कि उनकी रोजाना की कमाई केवल 100 या 150 रुपये है। कुछ दिनों बाद, इस मुलाकात के प्रभाव में, राहुल गांधी ने रामचेत के लिए एक सिलाई मशीन भेजी। इसके परिणामस्वरूप, रामचेत को अपने काम में आर्थिक सहायता मिली और उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ।



