MP सिविल जज परीक्षा में एक भी आदिवासी का चयन नहीं, सियासी पारा हाई

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MP Civil Judge Controversy: हाल ही में मध्य प्रदेश (MP) से एक विवादित मामला सामने आया हैं। जहाँ सिविल जज रिजल्ट में आरक्षण नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया हैं। दरअसल सिविल जज रिजल्ट आने पर सिर्फ 47 लोग ही पास हुए हैं।

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आदिवासी कोटे की अनदेखी क्यों?

मध्य प्रदेश से खबर सामने आई  है, जहां अब तक दलितों के आरक्षण के नाम पर उन्हें प्रताड़ित किया जाता था, लेकिन अब तो उनसे वो अधिकार छिनने की गहरी साजिश रची जा रही है। जी हां, दरअसल मध्य प्रदेश में सिविल जज के लिए निकाली गई भर्तियों में दलितों और पिछड़ो के साथ बहुत बड़ा स्कैम किया गया है, जिससे दलितों का अधिकारों जेनेरल कैटेगरी वालों को दिया जा सकें।

हाई कोर्ट की मेरिट लिस्ट पर बवाल

2022 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh highcourt) ने 191 पदों के लिए सिविल जज भर्ती (Civil Judge Recruitment) निकाली थी, जिसमें ST के लिए 121 पद,  SC  के लिए 18 पद और OBC के लिए 9 पद आरक्षित किए गए थे और बाकि के जेनेरल कैटेगरी (General Category) वालों के लिए थे। लेकिन जब परिणाम सामने आया तो केवल 47 लोग पास हुए है जिसमें ST से 0, एससी (SC) से 1 और ओबीसी (OBC) के केवल 5 लोगो का चयन हुआ है। जबकि बाकि के जेनेरल कैटेगरी (General Category) है। यानि की केवल पिछड़े और दलितों की 142 सीटो को खाली छोड़ दिया गया और आगे फिर से उन्हें जेनेरल कैटेगरी या फिर जो रिश्वत देगा, उन्हें दे दी जायेगी।

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दलितों के आधिकारो के हनन और आरक्षण

ये घटना समाज के दलितों के अधिकारों को मैरिट के नाम पर छीनने और उन्हें पूरी तरह से खत्म करने की गहरी साजिश रचने की तरफ इशारा कर रही है। जजों के चयन में हुआ घोटाला दलितों के आधिकारो के हनन और आरक्षण को खत्म करने की गहरी साजिश है। जिसके लिए दलित संगठन (Dalit organizations) ने सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई है, वो इन परिक्षा को रद्द करा कर MPMAC के तहत कराने की मांग कर रहे है, साथ ही जो बेकार के कड़े नियमों परिक्षा में लगाये गए है उन्हें खत्म किया जाये..तभी देश का दलित न्याय व्यवस्था में शामिल हो पायेगा.. नहीं तो दलितो के लिए न्याय और अन्याय सवर्ण समाज ही तय करेगी..और उनकी उत्पीड़न जारी रहेगा।

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