2018 की नौकरी बहाली के बाद भी भेदभाव! दलित रोसईया के ट्रांसफर पर तमिलनाडु कोर्ट का बड़ा फैसला

Coimbatore news, Coimbatore latest news
Source: Google

Coimbatore news: तमिलनाडु के कोयंबटूर से एक खबर सामने आई है। एक सरकारी स्कूल की मिड-डे मील स्कीम में एक दलित महिला कुक को अपॉइंट किया गया था। इसके बाद, वह स्कूल में ऊंची जाति के लोगों से बेइज्ज़ती और भेदभाव का शिकार हो गई। इसके अलावा, दलित महिला कुक का ट्रांसफर कर दिया गया। लेकिन इस ट्रांसफर को सब-कलेक्टर (Sub-Collector) ने खारिज कर दिया था।

Also read: BNS section 265: कानूनी गिरफ्तारी में बाधा डालने या हिरासत से भागने पर क्या है सजा?

दलित रसोइया के साथ जातिगत भेदभाव

तमिलनाडु के कोयंबटूर से खबर सामने आई है, जहां एक दलित रसोइया के साथ जातिगत भेदभाव करते उसे काम से निकालने के मामले में बड़ा फैसला आया है। ये घटना जुलाई 2018 की है, जब दलित समाज से आने वाली 44 साल के पी पप्पल ने थिरुमलाई कोंडाम पलायम (Thirumalai Kondam Palayam) के गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल (Government Higher Secondary School) में एक रसोईया के तौर पर काम शुरु किया था, लेकिन गांव के ही कुछ उंची जाति वालों को ये नागावार गुजरा कि उनके बच्चे दलित के हाथों का खाना कैसे खा सकते है।

रोसईया के ट्रांसफर को कोर्ट ने पलटा

नतीजा अविनाशी ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (Block Development Officer) वी मीनाक्षी ने पप्पल का दूसरे स्कूल में ट्रांसफर कर दिया था लेकिन इस ट्रांसफर को सब-कलेक्टर (Sub-Collector) ने खारिज कर दिया था, और सेव्वुर पुलिस ने BDO समेत 36 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करके मामले की जांच शुरु की थी। इस दौरान बीडीओ को बरी कर दिया था, लेकिन बाकियों पर सुनवाई अब भी जारी थी, जिसका आखिरकार 8 सालों के बाद ही सही फैसला आ ही गया।

Also read: MP news: दलित सरपंच ने की पंचायत सचिव की शिकायत, विकास कार्य रोकने और जातिसूचक गालियां देने का आरोप

पीड़िता ने जताई निराशा

स्पेशल कोर्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट एम. सुरेश ने 6 लोगो को दोषी करार देते हुए 2-2 साल की सजा सुनाई लाख ही 5500 रूपये का हर एक पर जुर्माना भी लगाया गया है। इस फैसले के सामने आने के बाद भी एक तरफ तमिलनाडु अस्पृश्यता उन्मूलन फ्रंट इसका पटाखे फोड़ कर स्वागत किया तो वहीं पीड़िता ने निराशा जताई कि सहीं न्याय नहीं हुआ है। उन्हें इस भेदभाव के कारण 8 सालों तक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। पीड़िता ने हाइ कोर्ट में इस मामले को ले जाने की बात की है।

यह मामला दिखाता है कि नौकरियां वापस मिलने के बाद भी समाज में जाति के आधार पर भेदभाव कैसे बना रहता है। कोर्ट के फैसले ने ऐसे भेदभाव को खारिज करते हुए एक कड़ा संदेश दिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *