बाबरी मस्जिद का मामला शांत हो गया…सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अयोध्या में आज के समय में एक भव्य मंदिर बन कर खड़ा है…जहां देश दुनिया से लोग पहुंचते हैं…लेकिन बाबरी मस्जिद मामले में हुए फैसले पर आज भी लोग सवाल खड़े करते हैं…कुछ कहते हैं कि फैसला सुनाने में नाइंसाफी हुई तो कुछ कहते हैं कि बहुसंख्यकों का मान रखने के लिए ऐसा फैसला सुनाया गया. लेकिन इन सबके बीच उस तथ्य पर पर्दा डाल दिया जाता है कि यह स्थान हिंदुओं और मुस्लिमों से पहले से बौद्धों का रहा. जी हां, बाबरी मस्जिद के अवशेषों से बौद्ध धर्म के साक्ष्य प्राप्त हुए थे लेकिन मनुवादियों ने एजेंडा चलाकर इन साक्ष्यों पर पर्दा डाल दिया.
खुदाई के दौरान मिला गोलाकार स्तूप मिला
दरअसल, साल 2003 में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या में विवादित स्थान पर खुदान करने के आदेश दिए थे. उसी दौरान अयोध्या के रहने वाले विनित कुमार मौर्य ने सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका दायर करके इसके बौद्ध मंदिर होने का दावा किया था. उन्होंने अपनी याचिका में खुदाई में मिले अवशेषों का हवाला देते हुए कहा था कि – खुदाई के दौरान एक गोलाकार स्तूप मिला, कुछ खंभे मिले, एक दीवार मिली जो बिल्कुल बौद्ध धर्म के कलाओं और नक्काशी को प्रदर्शित कर रहे थे. इतना ही नहीं, अयोध्या में हुई खुदाई के दौरान भगवान बुद्ध की मूर्ति भी मिली थी.
वहीं, बाबरी मस्जिद के नाम को लेकर भी बौद्ध इतिहासकारों का अपना मत है.
बाबरी नाम के एक बौद्ध भिक्षु
उनका मानना है कि नांदेड़ में बाबरी नाम के एक बौद्ध भिक्षु रहा करते थे. वो बाद के समय में अयोध्या गए और वहां बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार किया. इस बौद्ध भिक्षु के सम्मान में कौशल नरेश प्रसेनजीत ने यहां बौद्ध स्तूप का निर्माण करवाया. लेकिन सत्ता में आते ही शुंग वंश ने इस स्तूप को मटियामेट कर दिया. उसी संरचना के ऊपर बाद में बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया गया. इतना ही नहीं, चीनी यात्री ह्वेनसांग की पुस्तक में भी इसका जिक्र मिलता है. ह्वेनसांग के मुताबिक उस स्थान पर पहले एक बौद्ध विहार हुआ करता था, जहां 20 बौद्ध मठ थे और करीब 3000 बौद्ध भिक्षु रहा करते थे.
विदेशी यात्री फाह्यान
बौद्ध धर्म की पवित्र पुस्तक अंगुतर निकाय के मुताबिक भगवान बुद्ध ने 2 बार अयोध्या की यात्रा की थी. अयोध्या वाले बौद्ध धर्म का काफी सम्मान करते थे. विदेशी यात्री फाह्यान ने अपनी यात्रा वृतांत में जिक्र किया था कि अयोध्या में भगवान बुद्ध के होने के कई अवशेष हैं. उन्होंने उस स्थान को देखा था, जहां स्तूप बना हुआ था और भगवान बुद्ध उस स्थान पर टहला करते थे. ध्यान देने वाली बात है कि भगवान बुद्ध ने अयोध्या में करीब 6 साल बिताये. इससे यह प्रदर्शित होता है कि अयोध्या में बौद्ध विहार मौजूद था और काफी प्रचलित एवं बड़ा विहार था. एक रिपोर्ट बताती है कि यहां कई अवशेष ऐसे हैं, जो कि सारनाथ में मौजूद बौद्ध अवशेषों से मिलते जुलते हैं.
इन सारे तथ्यों को देखें तो यह स्पष्ट होता है कि अयोध्या में असल में हिंदू मंदिर होने से ज्यादा बौद्ध अवशेष होने के सबूत मिले हैं. सोचने वाली बात यह भी है कि बाबरी मस्जिद के ढहाने के बाद बौद्ध अवशेषों पर कभी चर्चा ही नहीं हुई. क्योंकि अगर इस मसले पर चर्चा होती और सच्चाई की खोज होती तो यह साबित हो जाता कि अयोध्या कभी मुख्य बौद्ध विहार हुआ करता था.



