BNS Section 276: दवाओं में मिलावट करने वालों के लिए एक साल की कैद का प्रावधान

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276 BNS in Hindi – भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 276 जो मुख्य रूप से “ज़हर या किसी अन्य खतरनाक पदार्थ से चोट पहुँचाने” से संबंधित है। यह धारा पुराने कानून (IPC) की धारा 328 के समान है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।

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धारा 276 क्या कहती है? BNS Section 276 in Hindi

जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 276 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 276…BNS की धारा 276 तब लागू होती है जब कोई व्यक्ति, किसी दूसरे व्यक्ति को नुकसान पहुँचाने के इरादे से, इनमें से कोई भी काम करता है: ज़हर देता है; या कोई ऐसी दवा या पदार्थ देता है जिससे नशा या बेहोशी हो; या कोई ऐसा पदार्थ देता है जिससे शरीर को चोट या तकलीफ़ हो।

BNS 276 Important Points

  • इस सेक्शन का मुख्य मकसद यह पक्का करना है कि लोगों को सुरक्षित और असरदार दवाएं मिलें और जो लोग उनमें मिलावट करते हैं, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाए।
  • यह धारा सभी तरह की दवाओं (टैबलेट, सिरप, इंजेक्शन वगैरह) और मेडिकल तैयारियों पर लागू होता है।
  • वही यह धारा मुख्य रूप से उसको दण्डित करती है जिसने असली दवाई के साथ फेर बदल करके उसमे नशीली चीज मिलायी हो या फिर ऐसा को केमिकल जिसेसे व्यक्ति के शारीर को नुकसान पहुचे।

बीएनएस धारा 276 का उदहारण 

  • for example: अक्सर सफर के दौरान यात्रियों को नशीला बिस्किट या चाय पिलाकर उनका सामान लूट लिया जाता है। ऐसी वारदातों को कानून की भाषा में ‘जहरखुरानी’ कहते हैं। वही धारा 276 पुलिस को ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त चार्जशीट दाखिल करने की शक्ति देती है।

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बीएनएस धारा 276 की और सजा

इसके अतिरिक्त, बीएनएस (BNS) की धारा 276 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को दोषी (Guilty) ठहराया जाता है, तो उसके लिए सजा निर्धारित की गई है। यह तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति लापरवाही से ऐसा कुछ करता है जिससे बीमारी फैलने की संभावना हो। इस सेक्शन के तहत, अपराधी को 1 महीने तक की जेल, पाँच हजार रुपये जुर्माना या दोनों हो सकते हैं। इसके अलवा आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है।

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