Andhra Pradesh news: मंदिरों में गूंज रहे दलित पुजारियों के मंत्र, NTR जिले ने दिखाया सामाजिक समरसता का नया चेहरा

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Andhra Pradesh news: हाल ही में आंध्र प्रदेश के एनटीआर जिले (NTR District) से जातिगत समानता (caste equality) को लेकर एक खबर सामने आई है. जहाँ मंदिरों में गूंज रहे दलित पुजारियों के मंत्र वही इन सभी मंदिरों में राम नवमी को होने वाली पूजा की रैयारी जोरो के साथ चल रही है ।

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जातिगत सौहार्द के प्रतीक के रूप में मंदिर में दलित पुजारी

दलितों के साथ अन्याय शारीरिक हमला और भेदभाव मारपीट बहुत लंबे समय से चला आ रहा है। हालाँकि, समय के साथ-साथ कई बदलाव आए; सरकार ने दलितों के लिए अनेक कानून बनाए, जिनके माध्यम से उन्हें समाज में समानता प्राप्त हुई। वही कुछ जगह आज भी ऐसी है जहाँ दलितों को मंदिर में जाना तो दूर उनको बहार भी खड़े नहीं देने दिया जाता है।  लेकिन आंध्र प्रदेश एक मंदिर में सालो से दलित पुजारी सेवा दे रहे है। जी हाँ, आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के विजयवाड़ा (Vijayawada)  जहां जातिगत सौहार्द के प्रतीक के रूप में मंदिर में एक दलित पुजारी (Dalit Priest) की न केवल सेवा स्वीकार की गई बल्कि राम नवमी (Ram Navami) के पूजा की तैयारियों में जमकर हिस्सेदारी भी दी गई।

दरअसल विजयवाड़ा के पश्चिम NTR ज़िले में मैलावराम और तिरुवुरु विधानसभा क्षेत्रों (Tiruvuru Assembly Constituencies)  जिनमें इब्राहिमपटनम मंडल में कावुलुरु, अटकुरु, एच मुथ्यालमपाडु, कोटिकलापुडी, विजयवाड़ा ग्रामीण में रायनपाडु, रेड्डीगुडेम मंडल में बुरुगुगुडेम और विसन्नापेटा मंडल में मित्तागुडेम शामिल हैं, जहाँ राम नवमी के उत्सव की तैयारी जोर -शोर से हो रही हैं। इतना ही नहीं यहाँ के कई गांवो में बने मंदिरों में दलित पुजारी है।

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मंदिरों में दलित पुजारी सेवा दे रहे

गांवों में दलित पुजारियों का सम्मान और उनकी सेवा को स्वीकार करना सामाजिक सद्भाव और समानता को दर्शाता है… ये बताता है कि कैसे दलितों के प्रति लोगो की सोच इन गांवो में बदल रही है, यहां आने वाले भक्त और बाहरी लोग भी गांव वालों की इस भावना को सलाम करते है, उनकी तारीफ करते है। इसके अतिरिक्त, रामनवमी के अवसर पर इस गाँव में विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है, और विजेताओं को बाद में पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं। वही ये बेहद ही राहत देने वाली बात है कि जहां आज भी दलितों को मंदिरों में प्रवेश नहीं दिया जाता है वहीं आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh) के इन मंदिरों में सालों से दलित पुजारी सेवा दे रहे है।

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