Digital Tribal Museum: जनवरी तक तैयार होगा देश का पहला पूर्ण डिजिटल आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय

Digital Tribal Museum, First Digital Tribal Museum
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Digital Tribal Museum: पर्यटकों के लिए एक नया डिजिटल ‘आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय’ (Tribal Freedom Fighters Museum) अतिशीघ्र खुलने जा रहा है। यह अनूठा संग्रहालय आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम जिले (Visakhapatnam District) के लममासिंगी (Lammasangi) के निकट ताज़ंगी में स्थापित किया जा रहा है, जो एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रोजेक्ट को जनवरी 2026 में संक्रांति त्योहार तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। तो चलिए जानते है इस डिजिटल ‘आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय’ में क्या क्या देखने को मिलेगा।

आधुनिक तकनीक का संगम (Digital Edge)

भारत में कई ऐसे बड़े म्यूजियम है जहाँ आदिवासी और दलित कल्चरल को पूर्ण रूप से दिखाया गया हैं। वही जब पूरा भारत डिजिटल India हो चला है तो ऐसे में देश को एक नया डिजिटल म्यूज़ियम मिलने जा रहा हैं। यह देश का पहला पूरी तरह से डिजिटल म्यूज़ियम है। यह इतिहास को जीवंत बनाने के लिए कई एडवांस्ड टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करता है। आदिवासी विद्रोहों और लड़ाइयों के दृश्यों को VFX (Visual Effects) का इस्तेमाल करके दिखाया जाएगा।

विज़िटर इंटरैक्टिव स्क्रीन (Visitor interactive screen) को छूकर स्वतंत्रता सेनानियों की जीवनी और संघर्षों के बारे में जान सकेंगे। एक अनोखी खासियत QR कोड-आधारित स्टोरीटेलिंग है, जिससे विज़िटर अपने फ़ोन से QR कोड स्कैन करके ऑडियो या वीडियो फ़ॉर्मेट में कहानियों को एक्सेस कर सकते हैं।

किन वीरों की गाथा दिखेगी?

यह संग्रहालय मुख्य रूप से उन आदिवासी नायकों को समर्पित है जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ लोहा लिया था.. इसमें 1839 से 1848 के रम्पा विद्रोह (Rampa Rebellion) सहित सदियों के प्रतिरोध को प्रदर्शित किया जाएगा। यह म्यूजियम 1920 के दशक में ब्रिटिश सेना के खिलाफ अल्लूरी सीताराम राजू की लड़ाई से प्रेरित है। हालांकि यह म्यूजियम चार साल पहले बनाना शुरू हुआ था, लेकिन कानूनी दिक्कतों और फंड अप्रूवल में देरी के कारण इसे पूरा होने में समय लगा।

संग्रहालय का अनूठा डिजाइन

ध्यान देने वाली बात इस पूरे म्यूज़ियम को चार जोन में पूरे इतिहास को चार हिस्सों में बांटा गया है। जिसमे ब्रिटिश काल (British era) से पहले का आदिवासी जीवन (Tribal life) , ब्रिटिश हस्तक्षेप, स्वतंत्रता संघर्ष और आजादी के बाद की स्थितिको दर्शया गया है। वही आदिवासी कला को भी खूबसूरती के साथ उकेरा गया हैं। संग्रहालय की बाहरी दीवारें (facade) पारंपरिक आदिवासी कला और रीति-रिवाजों को दर्शाती हैं। जो देखने में अभी अद्भुत हो सकता हैं।

ध्यान देने वाली बात यह संग्रहालय 21 एकड़ का विशाल परिसर में बना हुआ हैं। यहाँ सिर्फ संग्रहालय ही नहीं, बल्कि एक आदिवासी हाट (मार्केट), थीम आधारित उद्यान, एम्फीथिएटर, रिसॉर्ट और एक थीम रेस्टोरेंट भी होगा। जो पूरे म्यूजियम में चार चाँद लगने का काम करेगा।

एक और डिजिटल संग्रहालय (छत्तीसगढ़)

इसके अलवा आपको बता दें , इसी तरह का एक और डिजिटल संग्रहालय नवा रायपुर (छत्तीसगढ़) में ‘शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक’ के नाम से भी नवंबर 2025 में चर्चा में रहा था, जो छत्तीसगढ़ के आदिवासी नायकों पर केंद्रित है। लेकिन विशाखापत्तनम का यह नया प्रोजेक्ट अपनी विशालता (21 एकड़) और अपनी तरह के पहले पूर्ण डिजिटल अनुभव के लिए सुर्खियों में है।

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