CM Yogi statement: पिछले कुछ दिनों से एक मामला काफी गरमाया हुआ है। जहां बांग्लादेश (Bangladesh) में हुई एक दलित युवक दीपू चंद्र दास की निर्मम हत्या को लेकर बवाल मचा हुआ हैं। वही उत्तर प्रदेश के cm योगी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा दलित युवक की निर्मम हत्या पर क्यों कुछ नहीं कहते है।
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बांग्लादेश में दलित युवक की निर्मम हत्या
बांग्लादेशी छात्र नेता उस्मान हादी की मौत के बाद भारत विरोध प्रदर्शनों और फिर दीपू की मॉब लिंचिंग को लेकर दोनों देशों के रिश्ते काफी बिगड़ गए हैं…पहले आपको बताते हैं कि इन सबकी शुरुआत कैसे हुई…14 दिसंबर को बांग्लादेश ने भारत के उच्चायुक्त प्रणयप्रणव वर्मा को तलब किया., शेख हसीना के बयानों पर नाराजगी जताई, जिसके बाद 17 दिसंबर को भारत ने बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हमीदुल्लाह को तलब किया, और भारतीय मिशनों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी।
बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार
बाद बांग्लादेश में छात्र नेता उस्मान हादी की मौत हो गई और कट्टरपंथियों ने उग्र प्रदर्शन किया, पत्रकारों पर हमले की कोशिश की, आगजनी की और भारत विरोधी नारे लगाए, जिसके बाद 20 दिसंबर को भारत के विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को लेकर गहरी चिंता जताई.. भारत में दिल्ली, बंगाल, मुंबई, जम्मू, उत्तराखंड यहां तक की नेपाल भी जमकर प्रदर्शन हुए और मोदी-मोदी के नारे लगाए गए, यूनुस खान के पुतले जलाए गए..बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार को लेकर इस समय लोगों में गुस्सा है।
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सीएम योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष पर साधा निशाना
दूसरी तरफ बांग्लादेश में भी हिंदू सड़कों पर उतरे हैं तो वही यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने विधानसभा सत्र (Assembly session) में विपक्ष को बुरी तरह से घेरा है। सीएम योगी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि हर वक्त दलित अत्याचार का राग अलापने वाले विपक्ष आखिर बांग्लादेश में हुई दलित युवक की निर्मम हत्या पर क्यों कुछ नहीं कहते है।
उत्तर प्रदेश (UP) विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन सीएम योगी (CM Yogi) ने विपक्ष को एक के बाद एक खरी खोटी सुनाते हुए कहा कि विपक्ष गाजा पर हुए हमले को लेकर बात बात पर आंसू बहाते रहती है लेकिन बांग्लादेश में जो हुआ..उस पर क्यों किसी ने कोई टिप्पणी नहीं की..क्या अब विपक्ष की जुबान सिल चुकी है, यहां तक कि सोशल मीडिया (Social media) पर भी कोई टीका टिप्पणी करने की हिम्मत नहीं दिखाई किसी ने..सच तो ये है कि विपक्ष केवर राजनैतिक रोटिया सेंकने के लिए दलितों का मुद्दा उठाता है।



