Meerut news: हाल ही में, उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक चौंकाने वाली और परेशान करने वाली घटना सामने आई है, जहाँ कुछ उपद्रवियों के एक समूह और मनुवादी मानसिकता के लोगो ने बाबासाहेब की प्रतिमा को तोड़ दिया। इस कृत्य से दलित समुदाय में व्यापक आक्रोश फैल गया है, और वे जल्द से जल्द एक नई प्रतिमा स्थापित करने की मांग कर रहे हैं।
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बाबासाहेब की स्थापित प्रतिमा के साथ तोड़-फोड़
बाबासाहेब—जिन्हें दलितों का मसीहा माना जाता है। उन्हें लेकर अक्सर कई तरह की खबरें सामने आती रहती हैं। कभी कोई बड़ा नेता उनका अपमान करता नज़र आता है, तो कभी कुछ शरारती तत्व उनकी प्रतिमा को नुकसान पहुँचाते हैं..कभी हाथ तोड़ देते हैं, तो कभी उंगली या चश्मा। लेकिन इस बार तो उन्होंने सारी हदें ही पार कर दी हैं: बाबासाहेब की स्थापित प्रतिमा को उनके धड़ से पूरी तरह अलग कर दिया गया है। जी हाँ, जा मामला मेरठ के सरधना क्षेत्र (Sardhana Region) के भगवानपुर गांव (Bhagwanpur Village) का है, जहां बाबा साहब के सम्मान में उनकी प्रतीमा स्थापित की गई थी।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ विडियो
जिसका अभी अनावरण भी नहीं होना था, लेकिन जातिवादियों को बाबा साहब (Babasaheb) को सम्मान देना काफी चुभ गया और उन्हें अपमानित करने और दलित समाज को ठेस पहुंचाने के लिए इरादे असमाजिक तत्वो ने मूर्ती को खंडित कर दिया है। जिसका एक विडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है।
मेरठ :सरधना क्षेत्र के भगवानपुर गांव में देर रात मनुवादी जातिवादी लोगो ने भारतीय संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर जी की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया,
मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के सरकार में बाबा साहेब के प्रतिमा सुरक्षित नहीं है जातिवादी गुंडे का बोल बोला… pic.twitter.com/SSMnAJrHTM
— BHEEM BAUDH (@BHEEM_BAUDH) March 24, 2026
जल्द से जल्द नई प्रतिमा लागने की मांग
वहीं दलित समाज ने मेरठ प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द दूसरी नई प्रतिमा स्थापित की जायें साथ ही इस मामले में जो भी दोषी है उन्हें सलाखो के पीछे पहुंचाया जाये। वैसे बाबा साहब का अपमान, उनकी मूर्तियों को तोड़ना कोई नई बात नहीं है। लेकिन देखना तो ये होगी का भारत रत्न बाबा साहब को लेकर सरकार का क्य़ा फैसला होगा। इसके अलवा आपको बता दें, ये कोई पहली बार नहीं है जब दलितों और पिछड़ों के प्रति लोगो की जातिगत मानसिकता इतनी ज्यादा विक्रत हुई है कि जीते जागते इंसानो को तो छोड़िये, ये लोग दलितों के मसीहा कहलाने वाले बाबा साहब की प्रतीमा को भी नहीं छोड़ रहे है ।



