Top 5 Dalit news: चाहे कितने भी सख्त कानून बना लीजिए, लेकिन जब तक कानून का डर लोगों में भी होगा तब तक न तो गरीब और मजबूर दलितों को न्याय मिलेगा, और न ही इसे विकृत मानसिकता वाले जातिवादी आतंकियों को आसानी से सजा होगी।
कर्नाटक में लव जिहाद के लिए महिला की हत्या
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला कर्नाटक में उत्तर कन्नड़ जिले से है जहां एक दलित महिला को चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई क्योंकि उसने अपना धर्म बदलने से इनकार कर दिया था। ये घटना उत्तर कन्नड़ जिले के येल्लापुर कस्बे की है। पुलिस के मुताबिक मृतका रंजीता भानसोड नाम की महिला की दोस्ती रफीक इमामसाब से थी। महिला तलाक़शुदा थी और अपने दस साल के बेटे के साथ कन्नड़ जिले में रह रही थी। आरोपी रफीक मृतका से शादी करना चाहता था और इसलिए वो लगातार उसपर धर्म परिवर्तन का दवाब बना रहा था लेकिन महिला ने ऐसा करने से इनकार कर दिया, जिससे गुस्से रफीक ने महिला पर चाकुओं से गोदकर हमला कर दिया।
हैरानी की बात है कि जब पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की तो उसका शव भी कस्बे के पास मौजूद जंगलों में पेड़ से लटका मिला। वहीं दूसरी तरफ अब उस मामले में जमकर राजनीति शुरू हो चुकी है। हिंदू संगठनों ने अपना रोष जताते हुए राज्य में लव जिहाद जैसे संगीन मामलों पर कड़ा एक्शन लेने के लिए कहा है। वहीं बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने पीड़ित परिवार से मुलाकात करके उन्हें न्याय का आश्वासन दिया है। हिंदू संगठनों ने भी अपनी आवाज बुलंद करते हुए कहा कि जानबूझ के हिंदू विधवा और तलाकशुदा महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा है जिसपर रोक लगना जरूरी है।
मध्य प्रदेश में सरकार को दलितों के खिलाफ नीति आई सामने
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश से है जहां दलितों के खिलाफ सरकार की नीतियों को असलियत सामने आ रही है। हिंदूवादी विवादित वकील अनिल मिश्रा के खिलाफ कार्यवाही क्या हुई, अब तो दलितों को भी जानबूझ के यहां की पुलिस निशाना बना रही है। जी हां, ताजा मामला दलित नेता मकरंद बौद्ध को लेकर है, जिन्होंने बाबा साहब का पोस्टर जलाने के मामले में अनिल मिश्रा के खिलाफ गिरफ्तारी की फरियाद की थी लेकिन उल्टा ही गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया। जबकि फरियादी मकरंद बौद्ध को विश्वविद्यालय थाना के बाहर से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस का कहना है कि उसे 8 साल पुराने मामले को लेकर गिरफ्तार किया गया है । मकरंद बौद्ध साल 2016-17 में आईपीसी की धारा 188, 146 में आरोपी था। और लगातार कोर्ट में पेश नहीं हो रहा था जिससे कोर्ट ने गिरफ्तारी के वारंट जारी किए थे। हैरानी की बात है कि ये गिरफ्तारी ऐसे वक्त पर हुई है जब पूरा दलित समाज और सवर्ण समाज आमने सामने खड़ा है। एक तरफ अनिल मिश्रा के खिलाफ कार्यवाही तो वही दलित नेता के खिलाफ लिया गया एक्शन बताता है कि सरकार भले ही कितना भी दलितों के हितों का ढोल पीट ले, लेकिन उनकी नज़ारे सवर्णों पर ही रहती है।
छत्तीसगढ़ में आंगनवाड़ी में दलित बच्चों के साथ भेदभाव
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला छत्तीसगढ़ से है जहां सरकारी आंगनवाड़ी में दलित की स्थिति इतनी दयनीय है कि गर्भवती महिलाओं और बच्चों को मिले खाने को जातिगत भेदभाव के कारण उन्हें दिया ही नहीं जाता है। जी हां ये ताजा मामला सरगुजा जिले के उदयपुर क्षेत्र अंतर्गत डांडगांव आंगनबाड़ी केंद्र का है, जहां छोटे छोटे बच्चों के साथ जातिगत भेदभाव करने और उन्हें अलग बिठाने का मामला सामने आए है। दलित बच्चों को बाकी बच्चों से अलग थाली में खाना दिया जाता है और बच्चों से ही उनकी जूठी थाली दिलवाई जाती है इतना ही नहीं दलित गर्भवती महिलाओं को मिलने वाले पोषक आहार भी उन्हें नहीं दिए जाते है।
ये सिलसिला कई सालों से चल रहा था लेकिन इसका खुलासा तब हुआ जब महिला एवं बाल विकास विभाग की सभापति राधा रवि निरीक्षण करने वहां पहुंची, जहां बच्चों और महिलाओं से बात करने पर उन्हें आंगनवाड़ी के कर्मचारियों की हरकतों का पता चला। इस मामले में जब जांच अधिकारी आंगनवाड़ी पहुंचे तो आंगनवाड़ी बंद मिला, जिसने दलितों समाज के लगाए गए आरोपों को काफी हद तक सही साबित कर दिया है। फिलहाल जांच जारी है।
रोहिणी घावरी का फिर से बहुजन समाज के खिलाफ बयान
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद की कथित ex गर्लफ्रेंड रोहिणी घावरी को लेकर है जिन्होंने वैसे तो खुद को वाल्मीकि समाज की बेटी होने का दंभ कई बार भरा है लेकिन जब वाकई में बहुजन समाज के खड़े होने का वक्त आता है तो वो अपना पास ही पलट देती है। अभी हाल ही में रोहिणी घावरी ने एक पोस्ट किया है जिसमें उन्होंने मांग की कि जिस तरह से बाबा साहब का पोस्टर जलाने वाले को खिलाफ कार्यवाही हुई है वैसे ही मनुस्मृति जलाने वालों के खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए तभी बराबरी होगी।
हैरानी की बात है कि जब मनुवादियों के खिलाफ कार्यवाही हुई तभी ये वल्किमी बेटी का जमीर जागा, और इतने दिनों ने दलित समाज लगातार बाबा साहब के सम्मान के लिए लड़ रहा है लेकिन उनके मुंह से एक बोल नहीं फूटे।।इतना ही नहीं रोहिणी घावरी ने सीधे तौर पर कहा कि दलित समाज उनका हमेशा अपमान करता है लेकिन सवर्ण समझ नहीं करता। मतलब रोहिणी घावरी ने खुद को ही कन्फ्यूज कर रखा है कि आखिर वो लड़ किसके लिए रही है, दलितों के लिए या सवर्णों के लिए।
बाबा साहब के पोस्टर जलाने के विवाद पर आजाद का बड़ा बयान
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला आजाद समाज पार्टी के मुखिया और भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है जिन्होंने बाबा साहब आंबेडकर के पोस्टर जलाने को लेकर हैरान करने वाला बयान दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि जो लोग गली कूचे में बाबा साहब की तस्वीरें जला कर उनका अपमान करने को कोशिश कर रहे है, सही मायने में आजाद को इन सबसे कोई फर्क भी पड़ता। आजाद ने खुले तौर पर चुनौती देते हुए कहा कि जो अपमान कर रहे है, जो अब्बा साहब के कार्यों को नकार रहे है, अगर हिम्मत है तो संसद में आकर बहस करें।
या फिर उनके पीछे जो भी पावरफुल नेता हो, चाहे वो पक्ष का हो या विपक्ष का, संसद में आए तो बाबा साहब के कार्यों को नकार कर दिखाए। सच तो ये है कि इस देश की संसद ने बाबा साहब को ये सम्मान दिया है, और भीम आर्मी हो या खुद आजाद, वो संविधान का सम्मान करते है, और हर काम को संवैधानिक तरीके से करना चाहते है। इसलिए बाबा साहब के संविधान निर्माता कहे जाने को लेकर जिसे भी परेशानी है वो सामने आकर संसद में अपना पक्ष रखें। इस तरह की हरकतें करके केवल अपना दर्जा और ज्यादा नीचे गिरा रहे है।



