286 BNS in Hindi: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 286 ज़हरीले पदार्थों से जुड़े लापरवाही भरे व्यवहार से संबंधित है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।
धारा 286 क्या कहती है? BNS Section 286 in Hindi
जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 286 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 286…के अनुसार, यह धारा तब मान्य होती है जब कोई व्यक्ति किसी विषैले पदार्थ के साथ निम्नलिखित में से किसी एक गलती करता है…जैसे कि लापरवाही से कार्य करना कि जब कोई व्यक्ति विषैले पदार्थ के साथ ऐसा कुछ करता है जो अत्यधिक उतावलेपन या लापरवाही से किया गया हो, जिससे मानव जीवन को खतरे में डालने या दूसरे व्यक्ति को चोट पहुँचाने का जोखिम होता है। इसके अलवा यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब किसी जहरीले पदार्थ को सुरक्षित रखने के लिए उचित प्रबंध नहीं किए जाते, जिससे संभावित खतरों से बचाव नहीं हो पाता।
BNS 286 Important Points
- BNS की धारा 286 यह पक्का करती है कि लोग ज़हरीले पदार्थों को संभालते समय पूरी सावधानी बरतें और अपनी लापरवाही से दूसरों को नुकसान न पहुँचाएँ; नहीं तो उन्हें सज़ा मिल सकती है।
- इसके अलवा आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है।
बीएनएस धारा 286 का उदहारण
For Example: जैसे कि कोई व्यक्ति यदि किसी ऐसे कीटनाशक का लापरवाही से इस्तेमाल करता है जिससे आस-पास के लोगों को नुकसान हो सकता है, या किसी फैक्ट्री में ज़हरीले केमिकल पर ठीक से लेबल न लगाना, जिससे किसी कर्मचारी को चोट लग जाए, या उसके कारण उसकी जान को खतरा हो जाए तो ये सभी कृत्य इस सेक्शन 286 के तहत आ सकते हैं। साथ ही आरोपी को कड़ी सजा हो सकती है।
बीएनएस धारा 286 की और सजा
इसके अतिरिक्त, बीएनएस (BNS) की धारा 286 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को दोषी (Guilty) ठहराया जाता है, तो उसके लिए सजा निर्धारित की गई है। यह तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति लापरवाही से ऐसा कुछ करता है जिससे बीमारी फैलने, या चोट लगाने की संभावना हो। इस सेक्शन के तहत, 6 महीने तक का साधारण कारावास (Simple imprisonment) और अपराधी को 5000 हजार रुपये जुर्माना लगाया जाता हैं।


