Top 5 Dalit news: कहते है कि शिक्षा के दम पर जातिगत भेदभाव को मिटाया जा सकता है लेकिन मौजूदा समय में तो ऐसा लगता है कि सबसे ज्यादा जातिगत भेदभाव शैक्षणिक संस्थानों में ही होता है.. जहां पढ़ने वाले बच्चों की मानसिकता ऐसी विकृत है, वो भला कैसे एक समानता वाले समाज की नींव रखेंगे। तो चलिए इस लेख में जानते है…पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में जानेंगे, जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
भीम आर्मी चीफ का बड़ा ऐलान
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, जिन्होंने मेरठ में दलित युवक रोनू कश्यप के साथ हुई बर्बरता को लेकर किसी भी संगठन के आवाज न उठाने को लेकर हिंदूवादी संगठनों पर तंज कसा है। आजाद ने अपना रोष जताते हुए कहा कि बांग्लादेश में जो होता है, उसपर विलाप करने वालों की कमी नहीं है, जबकि उसका हमारे देश के मुद्दों से कोई लेना देना नहीं है, लेकिन बंग्लादेश का मुद्दा मुसलमानों से जुड़ा है इसलिए रोने से हाइटलाइट होंगे, लेकिन हमारे देश में, हमारे प्रदेश में एक युवक की जिंदा जला कर निर्मम हत्या कर दी गई, लेकिन कोई विलाप करना तो दूर उसके लिए न्याय मांगने तक नहीं आया है।
क्योंकि यहां आरोपी मुसलमान या दलित नहीं है। वहीं आजाद ने दलितों के हक और उनके न्याय के लिए बहुजन समाज को 25 जनवरी 2026 को आगरा के रामलीला मैदान में जमा होने का आहावान किया है। आजाद ने कहा कि आगरा का रामलीला मैदान वो स्थान है जहां 18 मार्च 1956 को बाबासाहेब अम्बेडकर का ऐतिहासिक भाषण हुआ था, और वो दलितो की आवाज बुलंद करने के लिए विशाल महासभा करेंगे। आपको बता दें कि आजाद को पिछले कई दलित मुद्दों में पीड़ित परिवार से मिलने के लिए रोका गया है, जिसने राज्य में दलित नेताओं की स्थिति को भी जगजाहिर कर दिया है। ऐसे में देखना ये होगा कि आजाद की ये महासभा कौन सा बदलाव लेकर आयेगी।
कर्नाटक में दलितों के साथ भेदभाव
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला कर्नाटक के चिक्कबल्लापुर जिले से है, जहां दलितों के साथ भेदभाव इतना ज्यादा बढ़ गया है कि वहां पूजा के दौरान देवी की पालकी उठाने की अनुमति नहीं दी गई। दलित समाज के साथ होने वाले भेदभाव को लेकर दलित युवकों मे रोष फैल गया और उन लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरु कर दिया। ये घटना चिक्कबल्लापुर जिले में तब घटित हुआ जब पूरे गांव वालों ने अपनी गांव की देवी की मूर्ती का जुलुस निकालना शुरु किया था। देवी का जुलुस निकालने के लिए दलित समाज ने भी चंदा दिया था, और पहले उन्हें पालकी उठाने की इजाजत दी गई थी।
लेकिन जब यात्रा शुरु हुई तो उंची जाति के लोगो ने दलितों के पालकी उठाने को लेकर विरोध शुरु कर दिया, जिससे दोनों समाज के लोगो के बीच झड़प हो गई और वो लोग पालकी को आधे रास्ते में ही छोड़ गए, इस घटना की जानकारी जब चिक्कबल्लापुरा ग्रामीण पुलिस को लगी तो वो झड़प को हिंसक होने से पहले वहां पहुंच गई और मामले को शांत कराया गया। फिलहाल जूलूस पर रोक लगा दी गई, और पुलिस उपाधीक्षक खुद इस मामले पर नजर बनाये हुए है। हालांकि झड़प में किसी भी हताहत की खबर नहीं है लेकिन जातिगत भेदभाव की विकृत मानसिकता जरूर उजागर हो गई।
मध्य प्रदेश में बन रहा है दूसरा डेरा सच्चा सौदा
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के भोपाल से है, जहां आनंदपुर धाम में दलित और आदिवासी महिलाओं के खिलाफ होने वाले संगीन आरोप को लेकर कांग्रेस ने बड़ा खुलासा किया है। जी हां, ये सनसनीखेज खुलासा करने वाले है कांग्रेस अनुसूचित जाति सेल के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार, जिन्होंने खुलें तौर पर आनंदपुर धाम में आदिवासियों और दलितों के साथ होने वाले बुरे बर्ताव और उनकी जमीनों को हथियाने का खुलासा किया है। अहिरवार ने कहा कि आनंदपुर धाम के कई अधिकारियों के खिलाफ बार बार शिकायत की गई, इतना ही नहीं एक महिला के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न के सारे सबूत भी मिटा दिए गए, और जिन पीड़ितो ने आवाज उठाने की कोशिश की उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी गई, उन्हें दुष्कर्म की धमकी दी गई और जान से मारने की धमकी दी गई है।
लेकिन तमाम शिकायतो के बाद भी पुलिस मूक बनी रही.. कांग्रेस नेता ने ये भी आरोप लगाया कि आनंदपुर धाम असल में मध्य प्रदेश का डेरा सच्चा सौदा पार्ट-2 बन गया है..और हो सकता है कि अशोकनगर या गुना की स्थानीय पुलिस पर दबाव हो सकता है, इसलिए पुलिस ने कोई कदम नहीं उठाया.. उन्होंने मांग की है कि इस मामले में सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने ये भी शक जाहिर किया है कि केवल दलित और पिछड़ी जाति की महिलाओं को ही शिकार नहीं बनाया जा रहा है बल्कि यहां 3 ऐसे अधिकारी है जो दलितों की जमीनों को हथियाने का काम कर रहे है और हवाला के जरिए धाम का कालाधन सफेद करने में लगे है। कांग्रेस नेता के इस संगीन आरोपो के बाद प्रशासन का क्या रिएक्शन होगा, ये देखने वाली बात होगी।
शैक्षणिक संस्थानों में जातिगत भेदभाव
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला दलित और पिछड़ी जाति के छात्रों को लेकर है, जो सबको झकझोर कर रख देगी। दरअसल अभी हाल ही में University Grants Commission की एक रिपोर्ट आई है, जिसमें उन्होंने संसदीय पैनल के सामने एक रिपोर्ट पेश की है, जिसके अनुसार भारत के विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव में 118% का भारी उछाल आया है, इस रिपोर्ट ने शिक्षा में बराबरी के सारे दावों की भी मिट्टी पलीत करके रख दी है, UGC की रिपोर्ट से ये सच भी सामने आ गया है कि भारत की यूनिवर्सिटीज जातिवाद का अड्डा बन चुके हैं। बता दे कि यूनिवर्सिटीज में धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म स्थान, दिव्यांगता व कमजोर आर्थिक स्थिति को लेकर होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए कुछ कड़े कदम उठाये है, जिसके तहत प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026 लागू कर दिया है।
नए नियमों के अनुसार जातिगत भेदभाव की शिकायत ऑनलाइन, लिखित, ईमेल या 24×7 इक्विटी हेल्पलाइन से दर्ज की जा सकती है और भेदभाव की शिकायत मिलने पर इक्विटी कमेटी खुद इसकी जांच करेगी, और संस्थान प्रमुख को जांच रिपोर्ट देगी.. जिसके बाद जो भी आरोपी छात्र या छात्रा इसमें शामिल होंगे उन पर कार्रवाई होगी जिसके तहत उनके लिए चेतावनी, जुर्माना, निलंबन या निष्कासन जैसे फैसले सुनाये जायेंगे। UGC के बनाये नियमों का जमकर विरोध भी हो रहा है लेकिन UGC की रिपोर्ट के बाद अब सबके मुंह बंद हो सकते है… हालांकि देखना हो होगा कि क्या इन नए नियमों से शैक्षणिक संस्थानो में जातिगत भेदभाव रूक जायेंगे।
मधुपुर में दलितों को मंदिर बनाने से रोका
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला झारखंड के मधुपुर से है, जहां मंदिर निर्माण का काम करने वाले एक दलित युवके साथ जातिवादी दबंगो ने बुरी तरह से मारपीट की है, ये मामला मधुपुर से लालगढ़ की है। पीड़ित परिवार ने बताया कि लालगढ़ में दलित समाज मंदिर का निर्माण करवा रहा है, लेकिन इससे उंची जाति के लोगो को दिक्कत हो रही थी, नतीजा ये हुआ कि उंची जाति के लोगो ने मंदिर का कार्य बीच में रूकवा दिया और दलित युवक को पीटा भी, लेकिन हैरानी की बात है कि पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करने के बजाये दलितों पर ही मामला दर्ज कर लिया…लेकिन इस घटना के सामने आने के बाद बीजेपी काफी हमलावर दिखी।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू 24 जनवरी को लालगढ़ में पीड़ित परिवार से मिलने जायेंगे, वहीं सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने भी चेतानवी जारी की है कि 31 जनवरी को वह मंदिर में रूके कार्य को फिर से शुरू करेंगे। इस मामले में बीजेपी के आने से पुलिस ने 11 लोगो के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है लेकिन हैरानी की बात है कि अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। फिलहाल पुलिस की भूमिका पर भी सवालियां निशान खड़े हो गए है कि दलितों और पिछड़ो के प्रति उनका रवैया आखिर ऐसा क्यों है। क्या वो बांग्लादेश या पाकिस्तान में रह रहे है, जहां दलितों का आवाज उठाना भी गुनाह बन जाता है। अब देखना ये होगा कि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के वहां जाने पर इस मामले में क्या नया मोड़ आता है।



