Top 5 Dalit news: जब हम दलितों को स्थिति को सुधारने की बात करते है तो ये केवल कागजों में ही नहीं होता बल्कि जमीनी स्तर पर भी दलितों को मदद की जरूरत होती है। भाई चारे का राग अलापा जाता है लेकिन जब सरकार उनके लिए वाकई में कोई कदम उठाती है तो उसका विरोध शुरू हो जाता है, क्यों कि ये सवर्णों को भी पता है कि अगर मौका मिला तो वो उन्हें पीछे छोड़ देंगे। तो चलिए आपको इस लेख में बताते है पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में जानेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
यूजीसी पर सवर्ण समाज के विरोध पर नाराज़ हुए भीम आर्मी चीफ
1, दलितों से जुड़ी पहली खबर उस विरोध को लेकर है जो इस वक्त पूरे उत्तर भारत में किया जा रहा है, क्योंकि यूजीसी ने दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों के साथ होने वाली जातिगत भेदभाव को रोकने के लिए नए नियम बनाए है। लेकिन चंद लोगों को ये बदलाव इतना नागवार गुजर रहा है कि वो इस कानून को वापिस लेने के लिए सरकार पर दवाब बना रही है। इस मुद्दे पर भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद के एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें आजाद उन लोगों के चेहरे से मुखौटा उतरते नजर आ रहे है जो वैसे तो सभी हिंदुओं को भाई भाई कह कर भाईचारे का राग अलापने है लेकिन जब जाति बीच में आती है तो दो दिनों में ही सारा भाईचारा निकल जाता है।
उन्होंने कहा कि मंडल कमीशन पर यहीं सवर्ण समाज ने बहुत राग अलापा कि जात-पात की करो विदाई हिंदू-हिंदू भाई-भाई।। लेकिन जब जातीय उत्पीड़न से दलित-पिछड़ों को बचाने के लिए सरकार ने कोई कदम उठाया तो कहां गया आपका भाईचारे? बता दें कि यूजीसी की नई गाइडलाइन, शैक्षणिक संस्थानों में भेदभाव को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए है। अब देखना ये होगा कि एक तरफ सवर्ण इसका विरोध कर रहे है तो वहीं दलित समुदाय किसी भी हाल में इस नए नियम को वापिस होने नहीं देना चाहता है। ऐसे में सरकार का क्या फैसला होगा। सबको इसका इंतजार है।
गाजीपुर में दलितों की जमीन को हड़पने की साजिश
2, दलितों से जुड़ी अगली खबर उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से है, जहां दलितों को जमीन देने के नाम पर बड़ी धोखाधड़ी की जा रही है। गाजीपुर जिले के पतार गांव में 38 दलित परिवारों के आशियाने पर सरकारी अधिकारियों ने धाबा बोल दिया है। जबकि ये जमीन साल 2023 में आवासीय पट्टे पर जमीन दी गई थी, और उस वक्त ये जमीन बंजर थी, अब जब दलितों ने घर बना दिए तो सरकारी कागजों में इस जमीन को प्ले ग्राउंड की जमीन बता कर जमीन खाली करने को कह रहे है। ये गांव जहुराबाद विधानसभा में पड़ता है जहां ओम प्रकाश राजभर विधायक है।
दलित परिवारों ने अपनी तकलीफ को प्रशासन के सामने रखने की कोशिश की, उन्होंने अपील की कि जो जमीन तीन साल पहले बंजर थी वो अब प्ले ग्राउंड कैसे हो गई। ये केवल दलितों को विस्थापित करने के लिए सोची समझी साजिश है। दलित परिवारों ने भीम आर्मी कार्यालय में जाकर भी इस मुद्दे पर बात की है, वहीं ओम प्रकाश राजभर से इस बारे में बात की गई तो उन्होंने ये कह कर पल झाड़ लिया कई बार दस्तावेजों में गलती हो जाती है। जिन दलित परिवारों को घर खाली करने के लिए कहा गया है उन्हें अलग जगह दी जाएगी। हैरानी की बात है कि पहले जमीन दी फिर छीन ली, सरकार वाकई में दलितों को बसाना चाहती है या फिर उजड़ना।। आप खुद समझ सकते हैं।
बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में दलित छात्र के साथ भेदभाव
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला यूपी के मशहूर यूनिवर्सिटी बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में एक दलित छात्र के साथ शिक्षकों द्वारा किया जा रहा भेदभाव सामने आया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है जिसमें विशाल यादव नाम के एक शख़्स ने रो रो कर बताया कि उन्हें JRF क्वालीफाई किया हैं और PHD में प्रवेश के लिए JNU में 21 दिसंबर 2025 को सुबह 10-12 के बीच में 20 मिनट का इंटरव्यू दिया था। 7 जनवरी 2026 को PHD एडमिशन का रिजल्ट आता है।
जिसमें 20 मिनट इंटरव्यू देने के बावजूद विशाल यादव को Absent दिखाकर बाहर कर दिया गया। लेकिन उनकी जाति के कारण उन्हें प्रवेश न देने के लिए इंटरव्यू बोर्ड का नेतृत्व करने वाले प्रोफेसर विकास बाजपेई ने जानबूझ कर विशाल यादव को अब्सेंट बता कर उन्हें प्रवेश नहीं दिया है। विशाल ने एक वीडियो जारी कर अपने साथ हुए भेदभाव के बारे में बताया और साथ ही ये भी पूछा कि जो लोग यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ खड़े है , वो तो केवल छात्रों के लिए कानून बनाए है लेकिन भेदभाव करने वाले शिक्षकों के खिलाफ क्या कहेंगे। जब टीचर ही ऐसी मानसिकता रखते है तो फिर मनुवादी मानसिकता के छात्र क्यों नहीं इसका विरोध करेंगे।
फतेहपुर में दलित महिला को मिला 8 सालों बाद न्याय
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के फतेहपुर से है, जहां एक दलित महिला के साथ लूटपाट करने और उसके साथ दुष्कर्म करने के मामले में आखिरकार 8 सालों के बाद महिला का न्याय मिला.. ये घटना फतेहपुर के असोथर थाना की है, जब 15 जून 2018 को दलित समाज से आने वाले एक शख्स ने पुलिस को तहरीर दी कि मलवा थाने के चखेड़ी गांव के रहने वाले बुचुन सोनी नाम के शख्स ने पहले उसकी पत्नी की नौकरी लगवाने के नाम पर झांसा दिया और कागजात बनवाने के लिए फोटो खिंचवाने के लिए अवंती बाई चौराहा पर गए थे।
लेकिन जब तक पीड़ित फोटो खिंचवाने के लिए दुकान में गया था तब तक आरोपी उसकी पत्नी को बहला फुसला कर ले गया.. दूसरे दिन उसकी पत्नी मिली, जिसने बताया कि बुचुन सोनी ने इसके गहने छीने और उसके साथ दुष्कर्म किया था। जिसके बाद इस मामले में सुनवाई जारी थी, लेकिन करीब 8 सालों के बाद एससी एसटी जज डॉ मोहम्मद इलियास की अदालत ने गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई साथ ही 16 हजार रूपय का जुर्माना भी लगाया है।
मोदीनगर में दलित समाज का विरोध प्रदर्शन
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला यूपी के मोदीनगर से है, जहां जातिवादी मानसिकता को बढ़ावा देने के लिए एक शख्स पूरे दलित सामज को गंदी गंदी गालिंया दे रहा है। इस शख्स का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ दलित समाज ने इस तरह के अपमान के खिलाफ आवाज उठाते हुए आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर सुनवाई करने की मांग की है। वहीं बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के नेता मोहित जाटव भी मोदीनगर थाने पहुंचे और टिप्पणी करने वाले युवक के खिलाफ लिखित शिकायत दी।
दलित समाज ने आरोपी के खिलाफ पुलिस थाने के सामने प्रदर्शन करते हुए चेतावनी दी कि अगर आरोपी के खिलाफ जल्द से जल्द कार्यवाई नहीं होती तो वो पंचायत समाज को बुला कर आंदेलन करेंगे। वहीं पुलिस ने मामले की संगीनता को देखते हुए वीडियो की जांच शुरु कर दी है, और आश्वासन दिया है कि जांच के बाद अगर आरोपी पर लगे आरोप सहीं साबित हुए तो उसके खिलाफ कार्यवाई की जायेगी।



