Top 5 Dalit news: एक कहावत आपने सुनी होगी, मेहनत इतनी खामोशी से करो की सफलता शोर मचा दें, मौजूदा समय में दलितो के हितों की आवाज को भी शांतिपूर्ण तरीके से ही उठाना होगा.. क्योंकि जब जब दलित किसी बात के लिए आवाद उटायेगा..उन्हें दबाने की साजिश होगी ही.. इससे बेहतर की नियम इस तरह लागू हो… जिससे उनको अधिकार भी बचे और वो भी। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंट में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में जानेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
लखनऊ यूनिवर्सिटी का दलित छात्रों के लिए बड़ा फैसला
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश के लखनऊ यूनिवर्सिटी से है, जहां एक तरफ दलित और बहुजन समाज यूजीसी के नए नियमों को लागू करवाने के लिए लडाई लड़ रहा है तो वहीं लखनऊ यूनिवर्सिटी ने दलित और पिछड़े छात्रों के हितो की रक्षा और उनके साथ होने वाले उत्पीड़न को रोकने के लिए चुपचाप एक बेहतर उपाय निकाल लिया है। जी हां, अभी हाल ही में खबर आई है कि लखनऊ यूनिवर्सिटी ने अपनी ऑफिशियल वेबसाइट में एक और कॉलम एड कर दिया है जिसमें SC ST OBC छात्रों को शिकायत दर्ज करने के लिए पोर्टल उपलब्ध करा दिया गया है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि यूनिवर्सिटी में इस पोर्टल को केवल उनके लिए बनाया है जो आधिकारिक रूप से संस्थान के अनुसूचित जाति जनजाति कैटेगरी में आते है। इस साइट को लेकर एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, वहीं सवर्ण समाज राज्य सरकार पर आरोप लगा रही है कि ये सरकार के इशारे पर किया गया है, जबकि ये पूरी तरह के सवर्ण छात्रों के साथ अन्याय है।
वहीं यूजीसी के नियमों को लागू करने के लिए लड़ रहे छात्रों के लिए कहीं न कहीं ये एक छोटी सी जीत है… वहीं ये पोर्टल इशारा है कि सरकार दलित उत्पीड़न के मामले में शैक्षणिक संस्थानों में सख्ती करने की पूरी तैयारी कर चुकी है। अब देखना ये होगा कि क्या अन्य संस्थान भी दलित छात्रो के लिए कोई ठोस कदम उठायेंगे.. और इससे अब सवर्ण समाज क्या प्रतिक्रिया देता है।
तमिलनाडु में डीएमके कार्यकर्ताओं की दादागिरी
2, दलितो से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली से है, जहां DMK सदस्यों से गिफ्ट मांगना एक दलित महिला को काफी मंहगा पड़ा.. उसे न केवल भारी अपमान सहना पड़ा बल्कि पीड़िता ने आसपास के तानो और बेज्जती से तंग आकर फांसी कर लगा कर आत्महत्या कर ली। ये घटना 13 अप्रैल को तिरुचिरापल्ली ज़िले के वलैकाट्टई गांव में एक दलित महिला सिंधुजा के साथ हुई थी।
पीड़िता परिवार ने बताया कि 13 तारीख को DMK कार्यकर्ता अपने उम्मीदवार एस. काथीरावन के लिए चुनाव प्रचार कर रहे थे और गांव में तोहफे के तौर पर बर्तन बांट रहे थे, लेकिन वो लोग इसमें भी भेदभाव कर रहे थे जिसे लेकर दलित महिला ने सवाल उठाया था। वो केवल अपनी जानपहचान के लोगो को ही तोहफा दे रहे थे.. लेकिन सवाल उठाने के कारण कार्यकर्ता नाराज हो गए.. उन लोगो ने उसे अश्लील गालियां देते हुए बाल पकड़ कर खींचा, उस पर झाड़ू से हमला किया.. वहीं पीड़िता इस घटना से काफी आहत हुई।
कि उसने अपने घर में खुदकुशी करने की कोशिश की,, किसी तरह से दरवाजा तोड़ कर उसे निकाला गया लेकिन अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया। इस मामले में 9 लोगो के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी गई है..जिसमें 6 लोगो को हिरासत में ले लिया गया और बाकियो की तलाश जारी है, इस मुद्दे पर जमकर राजनीति शुरु हो चुकी है PMK नेता डॉ. अंबुमणि रामदास ने डीएमके के 8000 कैम्पेन को तुरंत बैन करने की मांग की है। अब देखना ये होगा कि इस कैंपेन के जरिये कौन सा भ्रष्टाचार सामने आने वाला है।
पीलीभीत में दलित महिला को बेज्जत करके स्कूल से निकाला
3, दलितो से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से है.. जहां एक दलित महिला ने अपने बच्चे के इग्जाम के रिजल्ट में फेल होने का कारण क्या पूछा.. स्कूल के शिक्षक ये इतना नागावार गुजरा कि उसने महिला को सरेआम जातिसूचक गालिया दी, उससे अभद्रता की। ये घटना पीलीभीत के पूरनपुर/माधोटांडा तहसील क्षेत्र के दुर्जनपुर गांव की है, जहां पीड़िता सत्यवती ने अपनी आपबीती लिख कर सीएम से शिकायत की है… उसने बताया कि उसका बेटा नितेश जो कि माधोटांडा के एक हॉस्टल स्कूल में पढ़ रहा था वो 6ठी में फेल हो गया.. जब सत्यवती इसकी जांच के लिए स्कूल में गई औऱ उत्तर पुस्तिका की डिमांड की तो स्कूल के शिक्षका ने उसे जातिसूतक गालियां देते हुए उसके बेटे का स्कूल ड्रेंस खुलवा दिया और जबरन स्कूल से बाहर भगा दिया।
पीड़िता ने कहा कि उसे शक है कि उसके बेटे की जाति के कारण उसे फेल किया गया है और वो केवल सहीं जांच चाहती है, जबकि स्कूल वालों ने धमकी दी है कि वो नितेश को भविष्य में कभी नहीं पढ़ा सकेंगी। जिसके लिए सत्यवती ने सीएम योगी आदित्यानाथ ने पत्र लिख कर बेटे के लिए न्याय की मांग की है। अब देखना ये होगा कि इस मामले में ऊपरी अधिकारी क्या फैसला लेते है.. वहीं स्कूल प्रींसीपल का कहना है कि बच्चा फेल हो गया है और उसे प्रोमोट करने के लिए ये सब किया जा रहा है.. अब देखना ये होगा कि जब जांच होगी तो इस मामले में क्या सच सामने आयेगा।
दलित बच्ची की बेरहमी से हत्या
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला यूपी के हरदोई से है, जहां एक दलित महिला ने उंची जाति के लड़के से रिश्ता बनाने के इंकार क्या कर दिया.. जातिवादी आतंकी ने दलित बच्ची की बेरहमी से हत्या कर दी। ये घटना हरदोई जनपद के मल्लावां थाना के अंतर्गत आने वाले गढ़ी रसूलपुर राघोपुर का है, जहां दिनदहाड़े कुशवाहा समाज से आने वाली शिल्पी कुशवाहा की ऋषभ पंडित नाम के शख्स से फावड़े से काटकर हत्या कर दी.. पुलिस ने बताया कि ऋषभ पंडित काफी लंबा समय से शिल्पी को तंग कर रहा था, और उसके एकतरफा प्रेम को जबरन स्वीकार करने के लिए कह रहा था।
जबकि शिल्पी पहले से शादीशुदा थी, और किन्ही कारणों से वो अपने मायके में रह रही थी.. पुलिस ने पीड़ित परिवार की तहरीर पर आरोपी की धरपकड़ के लिए 3 टीमे गठित की है। फिलहाल आरोपी फरार चल रहा है। हैरानी की बात है कि केवल अपनी जाति का दंभ भरने के लिए दलित महिलाओं के सम्मान से खेलने से भी बाज नहीं आते जातिवादी आतंकि.. और जब इनके मंसूबे पूरे नहीं होते तो ये मासूमों को मौत के घाट उतार देते है..अब देखना ये होगा कि ऋषभ पंडित कब तक पुलिस के हत्थे चढ़ता है।
राजस्थान में दलित युवक भटक रहा दर दर
5, दलितो से जुड़ा अगला मामला राजस्थान के भीलवाड़ा से है, जहां केवल दलित होने के कारण एक युवक को पहले तो एक चिट फंड कंपनी में चोरी का झूठा आरोप लगाकर उसके साथ मारपीट की गई, उसे जातिगत रूप से अपमान किया गया, लेकिन जब पीड़ित ने न्याय के लिए आवाज उठाई तो पुलिस ने इस मामले में उसे ही गिरफ्तार करके कस्टडी में उसके साथ लात-घूसों और पट्टे से बेरहमी से मारपीट की, जातिगत अपमान किया और जबरन खाली कागजों पर हस्ताक्षर कराए थे, और उसके बाद पल्ला झाड़ लिया है। इस, मुद्दे को करीब 2 साल से भी ज्यादा हो गए है।
पीड़ित को कही नौकरी नहीं मिली.. वहीं वो न्याया के लिए दर दर भटक रहा है.. इस मुद्दे को भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद ने उठाते हुए राज्स्थान की डबल इंजन राज में दलितो की स्थिति पर सवाल उठाते हुए पीड़ित के लिए न्याय की मांग की है। आजाद ने इस मामले में निष्पक्ष जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की है, ताकि आरोपी लोगो के खिलाफ सख्त कार्यवाई हो सकें। हैरानी की बात है कि जब तक कोई बड़ा नेता दलितो के मुद्दों को नहीं उठाता तब तक उन्हें न्याय क्यों नहीं मिलता। और क्या आजाद के आवाज उठाने से अब पिड़ित युवक को न्याय मिलेगा, ये तो आने वाला वक्त ही बतायेंगा.. लेकिन ये मुद्दा अब हाइलाइट तो जरूर हो जायेगा।



