Top 5 Dalit news: माइक्रोसॉफ्ट में जातिगत भेदभाव का आरोप, दलित इंजीनियर ने बयां किया अपना दर्द

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Top 5 Dalit news:  आज दलितों की स्थिति किस कदर खराब है इसका अंदाजा केवल आप इसी बात से लगा सकते हैं कि आम जनता तो छोड़िए राजनीति के रूप से ताकतवर दलित समाज के लोगों को भी भारी अपमान और जातिगत भेदभाव से गुजरना पड़ता है भला जो दलितों के अधिकारों की रक्षा करते जब अपने ही अधिकारों की रक्षा नहीं कर पा रहे तो वह कैसे बहुजन समाज के लिए लड़ेंगे। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाले घटनाओं के बारे में बतायेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।

भीम आर्मी चीफ ने लगाई सरकार के खिलाफ हुंकार

1, दलितों से जुड़ा पहला मामला भीम आर्मी की और आजाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद को लेकर है। बीते कुछ समय से यूजीसी के नए नियमों में हुए बदलाव और उस पर लगे स्टे को लेकर जिस तरह से दलित समाज सड़कों पर उतरा हुआ है, उन्हें ताकतवर बनाने के लिए अब भीम आर्मी चीफ भी बहुजन समाज के लोगों को जागरूक करने में जुट गए हैं। अभी हाल ही में उन्होंने संत कबीर नगर में संवैधानिक अधिकार बचाओ, भाईचारा बनाओ महारैली की और इस रैली में आई भीड़ में साफ कर दिया है कि 2027 विधानसभा चुनाव के नतीजे में बड़ा फेरबदल हो सकता है। आजाद ने वहीं सीएम योगी आदित्यनाथ पर भी तीखे हमले किए।

उन्होंने कहा कि राज्य की सरकार दलितों के हितों में काम करने की केवल दिखावे करती है जबकि सबसे ज्यादा उत्पीड़न बीजेपी राज्यों में ही हो रहा है उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि अगर उनकी सरकार बनती है तो वह दलितों को 5 किलो राशन और ₹2000 गुजारा भत्ता देने का दिखावा नहीं करेंगे बल्कि उनके लिए ऐसे रास्ते बनाएंगे जिससे वह आर्थिक रूप से मजबूत हो सके, वहीं अतिपिछड़ो के लिए भी 15 प्रतिशत आरक्षण देने की बात की है।

आजाद ने आगे कहा कि केवल सरकार की शय पर ही दलितों का उत्पीड़न हो रहा है, और उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है। आजाद ने आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अपनी जमीन तैयार करना शुरू कर दिया है। अब देखना ये होगा कि क्या बहुजन समाज आजाद का साथ देगा या नहीं।

हैदराबाद में माइक्रोसोफ्ट इंजीनियर ने लगाये संगीन आरोप

2, दलितों से जुड़ा अगला मामला तेलंगाना के हैदराबाद से है, जहां माइक्रोसोफ्ट कंपनी में काम करने वाले एक दलित इंजीनियर ने कंपनी स्टाफ पर जातिगत भेदभाव का संगीन आरोप लगाया है। ऐसा पहली बार हुआ होगा जब किसी एमएनसी कंपनी में जातिगत भेदभाव करने की शिकायत की गई हो। इंजीनियर ने कहा कि उसकी जाति के कारण उसे कई प्रोजेक्टक का हिस्सा तक नहीं बनने दिया जाता है, खासकर पायथन प्रोग्रामिंग लेंग्वेज प्रोजेक्ट में,पीड़ित ने कहा कि उसके सहकर्मी उससे कहते है कि ये प्रोग्राम उसके जैसे छोटी जाति वालो के लिए नहीं बल्कि ब्राह्मण और सवर्ण जाति वालो के लिए है।

इस भेदभाव के कारण उसका प्रमोशन नहीं हो रहा है। इस शिकायत के सामने आने के कंपनी ने लीगल एक्शन लेते हुए जांच बिठा दी है… और जांच पूरी होने के बाद आगे एक्शन लिया जायेगा। हैरानी की बात है कि भारत की राजनीति, और गलियों से निकाल कर जातिवाद अब बड़ी विदेशी कंपिनयों में भी दीमक बन कर घुस गया है… ऐसे में भला बहुजन लोग कैसे बराबरी और न्याया की उम्मीद रख सकते है।

पंजाब में आप के निशाने पर कांग्रेस

3, दलितों से जुड़ा अगला मामला पंजाब से है, जहां दलित नेता को लेकर कांग्रेस के नेताओं की कुंठित सोच खुलकर सामने आने लगी है। अभी हाल ही में कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ पर विवादित टिप्पणी करते हुए उनके पिता को बैंड बजाने वाला बताया था। बाजवा ने हरभजन सिंह को भ्रष्टाचारी कहते हुए बयान दिया था कि ‘पांचवे लुटेरा यहां का ईटीओ है। जो पहले बैंड बजाता रहा है। अब इसका बैंड हम बजाएंगे। जितनी लूट हरभजन सिंह ने मचाई है उसकी सारी जानकारी हमारे पास है। बाजपा ने सीधे कहा कि दिल्ली के लुटेरे पंजाब आकर लूट रहे है, जिसमें केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, जैन , और भगवंत मान के साथ साथ बाजवा को भी घेरा गया।

इस अपमान को लेकर आप कार्यकर्ताओं में काफी रोष है, उनका कहना है कि ईटीओ एक गरीब परिवार से निकले है, और मेहनत करके यहां तक पहुंचे है, लेकिन कांग्रेस की दलितो के प्रति कुंठित सोच जगजाहिर है, जिसका एक नमूमा बाजवा ने दिखाया है। आप कार्यकर्ता अब बाजवा को माफी मांगने के लिए कह रहें है, और विरोध प्रदर्शन करते हुए उनके घर के बाहर झोल बाजे लेकर पहुंच गये है। वैसे ये कोई पहली बार नहीं है जब बाजवा ने दलितों का अपमान किया है.. ऐसे में आप का ये कदम आपको सही लगता है हमें कमेंट करके बतायें।

तेलंगाना में इंटरकास्ट मैरेज की मिली सजा

4, दलितों से जुड़ा अगला मामला तेलंगाना के आदिलाबाद से है, जहां एक दलित युवक को इंटरकास्ट शादी करना काफी भारी पड़ गया, सवर्णों ने न केवल उसके परिवार को घर से बेघर कर दिया बल्कि उसके घर को आग के हवाले कर दिया। ये घटना आदिलाबाद के मंचेरियल जिले के भीमराम ​​मंडल के दामपुर गांव का है। पीड़ित सुरेंद्र ने मंजरियल पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा कि उसने एक BC समुदाय की महिला की शादी की थी, लेकिन इस शादी से लड़की के परिवार वाले काफी नाराज थे।

और जब उसके घर में कोई नहीं था तब महिला के पिता चेरुकु लक्ष्मण और उसके भाइयों अंजी और संपत ने मिलकर उसके घर पर केरोसीन डाल कर घर में आग लगा दी, जिससे पूरा घर जल गया, और वो लोग घर से बेघर हो गये है। उन्हें अब अपनी जान का भी डर सताने लगा है। पुलिस से तहरीर के आधार पर तीनो आरोपियो के खिलाफ SC और ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर तीनों को गिरफ्तार कर लिया है और इस मामले की आगे की जांच शुरु कर दी है, जांच के बाद ही आगे की कार्यवाई की जायेगी।

मेरठ में दो समुदाय में झड़प

5, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ का है, जहां दलित समाज का आगे बढ़ना तो छोड़िये, वो अपने पहचान के लिए कोई बोर्ड भी लगा दे तो दूसरे समाज के लोगो को वो भी हजम नहीं होता है। ताजा मामला मेरठ के लिसाड़ीगेट का है, जहां दलितों ने पहचान के लिए केवल एक बोर्ड लगाया था, जिसपर एरो का साइन बना कर ये बताया गया था कि अंबेडकर भवन जाने का रास्ता इधर से है, लेकिन वहां रहने वाले गुर्जर समाज के लोगो को ये जरा भी रास नहीं आया और उन्होंने ने उसे तुरंत हटाने के लिए हंगामा शुरु कर दिया..क्योंकि जहां बोर्ड लगा था वो गुर्जर चौक कहलाता है।

गुर्जर समाज के लोगो ने आरोप लगाया कि बहुजन समाज जानबूझ कर ये बोर्ड लगा रहा है ताकि गुर्जर चौक का नाम बदला जा सकें, जबकि ये पूरी तरह से गलत और भ्रामक जानकारी थी, बोर्ड लगवाने वाले अजय लिसाड़ी ने बताया कि बोर्ड कोई नाम बदलने के लिए नहीं बल्कि वहां से कुछ दूर पर अंबेडकर धर्मशाला है, जब भी कोई इस धर्मशाला में आने के लिए चौक पर इसका पता पूछते है तो वहां मौजूद उंची जाति के लोग उनका अपमान करते है, उने अलग अलग नामों से बुलाते है।

इसलिए ये बोर्ड लगाया गया था ताकि किसी को ये अपमान न सहना पड़ा। हालांकि हंगामे बढ़ते देखकर लिसाड़ीगेट थाना पुलिस और लोहियागेट थाना पुलिस, दोनो ही मौके पर पहुंच गई, औऱ किसी अनहोनी के होने से पहले ही उसे रोक दिया गया। फिलहाल जिस बोर्ड को लेकर हंगामा हुआ वो निकाल कर रख दिया गया है, लेकिन ये बात बेहद हैरान करती है कि जातिवादी कुंठित मानसिकता के कारण राहगीरो को भी नहीं छोड़ते कुछ लोग, उन्हें भी शिकार बना दिया जाता है।

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