Top 5 Dalit News: भारत चाहे कितनी भी तेजी से विकास करें लेकिन आज भी यहां जातिवादियों की मानसिकता में कोई बदलाव नहीं आया है.. और जब तक ये मानसिकता रहेगी..तब तक कभी भी न तो दलितो औऱ पिछड़ो का शोषण रुकेगा औऱ न ही कभी देश पूरी तरह से विकसित हो सकेगा। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओ के बारे में बताएंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
नाई समाज के लोगो ने दलितों के बाल काटने से किया इंकार
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले से है, जहां जातिवाद इतने चरम पर पहुंच चुका है कि दलितो के बाल काटने से पहले उनकी जाति पूछी जाती है.. और उनके दलित होने पर साफ इंकार कर दिया जाता है। ताजा मामला राजगढ़ जिले के खुजनेर थाना के अंतर्गत बांसखेड़ा गांव का है, जहां एक नाई की दुकान का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। यहां दुकान पर काम करने वाला नाई साफ तौर पर वाल्मीकि समाज के लोगों को भंगी कह कर बुलाते हुए बाल काटने से इंकार कर रहा है।
इतना ही नहीं जब वाल्मिकी समाज के व्यक्ति ने इसका विरोध किया तो आरोपी ने जान से मारने की धमकी देते हुए पीड़ित व्यक्ति पर हमला कर दिया। इस घटना के सामने आने के बाद भी पुलिस ने अभी तक कोई कार्यवाई नहीं की है जिसके बाद भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने सीएम मोहन यादव से मांग की है ।
वो आरोपी के खिलाफ जल्द कोई कार्यवाई करवाये वरना भीम आर्मी मजबूरन न्याय के लिए लोकतांत्रिक आंदोलन करेगी। हैरानी की बात है कि रोजाना मध्य प्रदेश में दलित उत्पीड़न की खबरों में तेजी से इजाफा हो रहा है लेकिन सरकार इन पर लगाम लगाने के लिए कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठा रही है.. आखिर इसकी जवाबदेही किसकी है।
गिरवी रखी जमीन छुड़ाने जा रहे युवक पर हमला
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के उन्नाव से है, जहां दलितों के मामूली बात पर मारपीट, उन्हें अपमानित करना, उनकी मेहनत की कमाई को मार लेना काफी आम हो गया है. ताजा मामला उन्नाव के बांगरमऊ कोतवाली क्षेत्र का है। पीड़ित अजय ने बताया कि वो अपनी गिरवी रखी जमीन को छुड़ाने के लिए 36 हजार रूपय लेकर दूसरे गांव जा रहा था, लेकिन रास्ते में उस पर दो युवको ने हमला कर दिया।
उन दोनो ने अजय को जातिसूचक गालिंयां देते हुए मारपीट शुरु कर दी.. इतना ही नहीं उसके 36 हजार रूपय भी लूट लिये.. हैरानी की बात है कि जब अजय क परिजनो ने जब आरोपी लड़को के परिवार वालो से बात करने की कोशिश की तो उन लोगो ने भी उन्हें धमकी दी। अजय ने बताया कि आरोपियो ने उसे धमकी दी है कि वो उन्हें जहां मिलेगा वहीं मार देंगे।
पुलिस ने अब तक इस मामले में कोई कार्यवाई नहीं की है उल्टा वो दवाब बना रहे है कि अजय समझौता कर लें। लेकिन अजय इसके लिए तैयार नहीं है उसने मांग की है कि उसके पैसे लौटाये जायें और उसे आश्वासन दिया जाये कि भविष्य में उसके साथ ऐसा घटना नहीं होगी। इस मामले में पुलिस की भूमिका पर उठ रहे सवाल के बाद क्या होगा पुलिस का रूख ये देखने वाली बात होगी।
2027 विधानसभा चुनाव के लिए आसपा की ललकार
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, जिन्होंने विपक्षियों के सामने ऐलान कर दिया है कि इस बार सालों से सताये यूपी के दलित और पिछड़ो के साथ पूरा न्याय होगा। यूपी के 2027 के आगानी विधानसभा चुनावों से पहले आजाद समाज पार्टी” ने ऐलान कर दिया है कि 2 जून से उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर आसपा प्रमुख चंद्र शेखर आजाद के नेतृत्व में सत्ता परिवर्तन यात्रा शुरु की जायेगी।
आसपा के इस ऐलान से ये भी साफ हो गया है कि इस बार आजाद समाज पार्टी पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतर रही है। वैसे ही आजाद की बढ़ती लोकप्रियता औऱ उनके एक्शन मोड के कारण वो वैसे ही काफी सुर्खियों में है, ऐसे में आजाद का यूपी के कोने कोने में यात्रा करना.. इशारा है कि वो दलित और पिछड़े समाज के किसी भी जाति या समुदाय को नहीं छोड़ने वाले है। ऐसे में देखना ये होगा कि 2027 के चुनाव के नजीतो में आसपा किस मजबूत स्थिति में नजर आयेगा.. और वो अकेले कितने लोगो को समीकरण बिगाड़ सकती है। वैसे आपको क्या लगता है कि क्या आसपा यूपी में इतिहास रचने वाली है.. हमें कमेंट करके जरूर बतायेँ।
दलितो की अनदेखी पर कर्नाटक सरकार फिर घेरे में
दलितों से जुड़ा अगला मामला कर्नाटक से है जहां सरकार पर फिर से दलितो और पिछड़ो की अनदेखी करने का संगीन आरोप लगा है। दरअसल कर्नाटक सरकार ने अल्पसंख्यक बस्तियों के विकास से लिए 600 करोड़ रूपय के योजना की स्वीकृति दी है लेकिन इस मामले में बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या सरकार पर निशाना साधते हुए पूछा कि आखिर सरकार ने किस आधार पर गरीब और वंचितो के लिए आवंटित करने वाले फंड को केवल धर्म पर आधारित अल्पसंख्यक बस्तियों के लिए आवंटित कर दिया है।
आखिर जमीनी स्तर का विकास धर्म से कब से जुड़ने लगा। सड़के, नालियां, गलियां मोहल्ले तो सबका है। लेकिन केवल कुछ विशेष क्षेत्रों को चुन कर उनके विकास के लिए फंड देना कहां का न्याय है। ये धर्म आधारिक पैकेज क्या संविधान के अनुच्छेद 14 औऱ 15 का अपमान नहीं है।
जिसके अनुसार धर्म के आधार पर भेदभाव कानूनन अपराध है तो क्या कर्माटक की सरकार संविधान से भी बढ़ कर है। क्या इसमें कमजोर, दलित पिछड़े हिंदू शामिल नहीं होने चाहिए। सरकार ऐसा करके केवल धार्मिक अलगाव को बढ़ावा दे रहा है। कर्नाटक सरकार का रवैया दलितो के प्रति काफी उदासीन रहा है, ऐसे में विशेष समुदाय को ये सौगात देकर कहीं उन्होंने दलितों की नाराजगी और तो नहीं बढ़ा दी है। आपको क्या लगता है हमें कमेंट करके जरूर बतायें।
उदयपुर में दलित दुल्हन की बिंदौली पर हमला
5, दलितो से जुड़ा अगला मामला राजस्थान के उदयपुर से है, जहां जातिवादियों के हौसले इतने बुलंद हो गए है कि वो दिनदहाड़े दलितो की शादिंयों में घुसकर अपनी मनमानी करते है लेकिन प्रशासन मूक दर्शक बन कर बैठी रहती है। ताजा मामला उदयपुर- जिले के डबोक थाना क्षेत्र के हरियाव गांव का है, जहां एक दलित दुल्हन की बिंदौली में जातिवादी दबंगो ने जाकर न केवल उत्पात मचाया बल्कि लाठियों, सरियों तथा तलवारों से हमला करके दलित दुल्हन को जबरन घोड़ी से उतार दिया।
पीड़ित दुल्हन के पिता भैरूलाल मेघवाल ने पुलिस को तहरीर देते हुए बताया कि ये घटना 29 अप्रैल की रात की है। जब उनकी बेटी की बिंदौली निकली रही थी तभी गांव के ही करीब 15 लोगो ने उन पर हमला कर दिया,,उन लोगो ने उन्हें जातिसूचक शब्दो का इस्तेमाल करते हुए बिदौली को उनके घर से सामने से न निकालने की चेतावनी दी.. वरना खूनखराबा करने की धमकी दी। यहां तक कि दुल्हन को बुरी तरह से अपमानित करके घोड़ी से नीचे उतार दिया गया। इस मुद्दे पर खुद भीम आर्मी ने आगे बढ़ कर पीड़ित परिवार से न्याय की मांग की है। वहीं पुलिस ने 4 लोगो को गिरफ्तार भी कर लिया है। इस हमले में करीब 4 महिलायें भी शामिल थी। देखना ये होगा कि पुलिस कार्यवाई के बाद क्या रिजल्ट आता है। क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा।



