Odisha News: दलित रसोइया की नियुक्ति पर आंगनवाड़ी का बहिष्कार, तीन महीने से बच्चे नहीं आ रहे केंद्र

Odisha Dalit cook, Top 5 Dalit news
Source: Google

Odisha News: ओडिशा केंद्रापड़ा (Odisha Kendrapara) जिले के नुआगांव गांव (Nuagaon village) से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां पर दलित रसोइया होने पर आंगनवाड़ी का बहिष्कार कर दिया। इससे तो ऐसा लग रहा है कि देश में जातिवाद अब भी मौजूद है, आए दिन जातिगत भेदभाव को लेकर जो खबरे हमारे पास आती है उनसे तो ऐसा ही लगता है कि आज भी कुछ नहीं बदला है कहने को तो लोग कहते है कि ऐसा अब कुछ नहीं है क्यों अपनी जाति को गाली की तरह लेते है लोग, तो शायद उन्होंने वो सच कभी देखा ही नहीं जो SC/ST के लोग आज भी झेल रहे है।

तीन महीनों से बच्चों की उपस्थिति न के बराबर

जी हां हम बात कर रहे है ओडिशा के केंद्रापड़ा जिले की, यहां एक आंगनवाड़ी केंद्र (Anganwadi Centre) में पिछले तीन महीनों से बच्चों की उपस्थिति लगभग न के बराबर है। वजह जानकर और भी हैरानी होती है। दरअसल, केंद्र में रसोइया के पद पर एक दलित महिला की नियुक्ति के विरोध में कुछ अभिभावकों ने आंगनवाड़ी का बहिष्कार कर दिया है। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और पोषण पर पड़ रहा है। साथ ही सरकार की योजनाओं पर भी सवाल उठने लगे हैं। मामले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन भी सक्रिय हो गया है और अभिभावकों को समझाने की कोशिश की जा रही है।

क्या है पूरा मामला?

मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि 21 साल की शर्मिष्ठा सेठी को 20 नवंबर को आंगनवाड़ी में रसोइया के पद पर नियुक्त किया गया था। वे ग्रेजुएट हैं और इस पद के लिए गांव से आवेदन करने वाली इकलौती उम्मीदवार थीं। उन्हें हर महीने 5000 रुपये मानदेय मिलता है। हालांकि विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता लिजारानी पांडव के मुताबिक, केंद्र में 6 महीने से 3 साल तक के 22 बच्चे और 3 से 6 साल तक के 20 बच्चे पंजीकृत हैं। यहां बच्चों और स्तनपान कराने वाली माताओं को सत्तू, अंडा जैसे पौष्टिक आहार दिए जाते हैं। आमतौर पर बड़े बच्चे केंद्र पर आकर खाना खाते हैं और छोटे बच्चों के अभिभावक राशन घर ले जाते हैं। लेकिन अब हालात यह हैं कि बड़े बच्चे बिल्कुल नहीं आ रहे हैं। सिर्फ दो अभिभावक ही राशन लेने पहुंच रहे हैं। यहां तक कि एक स्तनपान कराने वाली मां ने भी राशन लेना बंद कर दिया है।

समझाने की कोशिश नाकाम

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के अनुसार, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता लिजारानी ने बताया कि उन्होंने और शर्मिष्ठा ने कई बार अभिभावकों से बात की, लेकिन विरोध खत्म नहीं हुआ। आखिरकार उन्होंने इसकी लिखित शिकायत अधिकारियों को दी। इसके बाद ब्लॉक और तहसील स्तर के अधिकारी गांव पहुंचे और कई बैठकें कीं। केंद्रापड़ा की बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) दीपाली मिश्रा ने बताया कि जिला प्रशासन के अधिकारी भी गांव का दौरा कर चुके हैं। कुछ अभिभावक बच्चों को फिर से भेजने को तैयार हो गए हैं, जबकि कुछ ने तीन दिन का समय मांगा है। प्रशासन को उम्मीद है कि जल्द ही समाधान निकल आएगा।

समाधान में जुटा प्रशासन

केंद्रापाड़ा के कलेक्टर राघवम अय्यर ने कहा कि उप-कलेक्टर ने मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लिया है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह घटना साफ तौर पर दिखाती है कि जातिगत भेदभाव आज भी समाज में मौजूद है और इसका असर सीधे बच्चों के अधिकारों और पोषण पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आंगनवाड़ी जैसी योजनाएं समाज के कमजोर वर्गों तक पोषण और शिक्षा पहुंचाने के लिए बनाई गई हैं। ऐसे में जाति के आधार पर किसी कर्मचारी का विरोध करना संविधान की भावना के खिलाफ है। फिलहाल प्रशासन मामले को सुलझाने में जुटा है, लेकिन यह घटना समाज में समानता और सामाजिक समानता की दिशा में अभी लंबा सफर तय किए जाने की याद दिलाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *