BNS धारा 307: चोरी के दौरान जानलेवा हमला करने पर क्या कहता है नया कानून?

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307 BNS in Hindi: अक्सर आपने ऐसा सुना होगा कि चोरी या लुट-पाट के इरादे से घर में घुसे और घर के मालिक की हत्या करने का प्रयास करते है और लेकिन वह व्यक्ति बच जाता है। तो ऐसे मामले में BNS की कौन की धारा लगती है। और ऐसे मामले में किस तरह की सज़ा होगी?  तो आपको बता दें, ऐसा करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 307 लागू होती है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।

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धारा 307 क्या कहती है? BNS Section 307 in Hindi

जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 307 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 307  यदि कोई व्यक्ति किसी के घर चोरी करने के इरादे से जाता है और चोरी के दौरान घर का सदस्य जाग जाता है और उसे पकड़ने की कोशिश करता है उस समय उसको गोली लग जाए या वह घायल हो जाए तो वह अपराध धारा 307 के अन्दर आता है।

बीएनएस धारा 307 का उदहारण 

For Example: मान लीजिए ‘A’ किसी घर में चोरी करने के इरादे से घुसता है और अपने साथ एक लोडेड पिस्तौल या धारदार चाकू छिपाकर ले जाता है। उसका इरादा यह है कि अगर घर का मालिक जाग जाए या उसे पकड़ने की कोशिश करे, तो वह उसे गोली मार देगा या घायल कर देगा। यहां ‘A’ ने BNS की धारा 307 के तहत अपराध किया है।

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बीएनएस धारा 307  की और सजा

इसके अतिरिक्त, बीएनएस (BNS) की धारा 307 के तहत, यदि किसी व्यक्ति को दोषी (Guilty) ठहराया जाता है, तो उसके लिए सजा निर्धारित की गई है। यह तब लागू होता है जब कोई व्यक्ति चोरी से या धोखे से किसी की सम्पति की चोरी करता है या फिर छिना झपटी करता है तो इस सेक्शन के तहत अपराधी को साधारण दंड और 7 साल की सजा के साथ जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलवा आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है। इस अपराध में जमानत मिलना भी काफी मुश्किल हैं।

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