Top 5 Dalit news: दलितों पर अन्याय बर्दाश्त नहीं! संसद में मल्लिकार्जुन खड़गे ने दिखाया आक्रामक रुख

Mallikarjun Kharge, Mallikarjun Kharge attacks on BJP
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Top 5 Dalit news: हैरानी की बात है कि देश को आजाद इतना समय हो गया है, इसका संविधान बने भी 75 साल हो गए है लेकिन आज भी सवर्ण खुद को दलितों का भगवान समझने से पीछे नहीं हटते। वो कैसे जिएंगे और कहां शादी करेंगे, ये भी अब वो तय करने लगे है, और किसी ने अपने हिसाब कुछ करना चाहता तो जाति धर्म के नाम पर डराया धमकाया जाता है। समाज से अलग कर दिया जाता है। तो चलिए आपको इस लेख में  पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।

भीम आर्मी चीफ के आंदोलन को बदनाम करने की साजिश

1, दलितों से जुड़ा पहला मामला दिल्ली के जंतर मंतर से है। जहां भीम आर्मी चीफ और आजाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद यूजीसी के नए नियमों को फिर से लागू करने की मांग करते हुए आंदोलन कर रहे है। वहीं इस आंदोलन को बदनाम करने के लिए दलित समाज के लोगों के खिलाफ गलत अफवाहें फैलाई जा रही है कि वो शराब पी कर आए है। वहीं अब दलितों के इस आंदोलन को सही करार देते हुए ब्राह्मण समाज के लोगों ने उनका समर्थन करना शुरू कर दिया है। सोशल मीडिया पर जंतर मंतर से एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक ब्राह्मण युवक आजाद का साथ देते हुए यूजीसी के नए नियमों को फिर से लागू करने की बात कर रहा है।

उसने कहा कि नए नियम पूरी तरह से न्यायसंगत है। जो ब्राह्मण इन नियमों का विरोध कर रहे है असल में वो सभी ब्राह्मणों के नाम पर कलंक है। आजाद के समर्थन में सैकड़ों को भीड़ जंतर मंतर पर जमा हुई है, जिसके बिगड़ने के लिए कई साजिशे की जा रही है। इससे पहले भी दो लड़कियों ने आरोप लगाया कि आंदोलनकारी लोगों ने उनके साथ छेड़छाड़ की थी। लेकिन उनकी चाल उनपर ही भरी पड़ गई। वहीं जिस तरह से पूरे देश भर में दलितों का आंदोलन चल रहा है और दलितों के आंदोलन में ब्राह्मण समाज के समर्थन के बाद क्या होगा सरकार और कोर्ट का फैसला इसका इंतजार सबको है।

रोहिणी घावरी ने आजाद को लेकर किया दावा

2, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ की खातिर एक्स प्रेमिका रोहिणी घावरी के उस दावे को लेकर है जिसने वो आजाद को बीजेपी के गृहमंत्री अमित शाह का चमचा कह रही है। घावरी ने दावा किया है कि वो पिछले 8 महीने से एक एफआईआर दर्ज कराने की कोशिश कर रहीं है, लेकिन वो और उनकी टीम एक एफआईआर तक दर्ज नहीं करा पाई। इतना ही नहीं घावरी ने कहा कि वो उनकी टीम अमित शाह और सीएम योगी आदित्यनाथ से भी मिलने गई थी लेकिन सबकी तरफ से एक ही जवाब मिला कि 2027 तक कुछ नहीं होगा, क्योंकि वो हमारे लिए काम कर रहा है।

घावरी ने सीधे तौर पर आजाद को घेरते हुए कहा कि वो इसी लिए इतना उड़ रहे है क्योंकि उन्हें अमित शाह का संरक्षण मिला है। रोहिणी ने मांग की है कि आजाद दलितों और पिछड़ों को बेवकूफ बनाना बंद कर दें और इस बात को खुलेआम स्वीकार कर लें कि वो बीजेपी के लिए काम कर रहे है। सच्चाई तो ये है कि आजाद समाज पार्टी को बीजेपी ने इसी काम पर लगाया हुआ है कि वो समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के वोट काटे, और इसीलिए उसे इतना हाइलाइट किया जा रहा है। घावरी के तमाम दावों के बाद भी आजाद की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है और न ही  बीजेपी और विपक्ष ने कोई टिप्पणी की है। लेकिन सवाल ये है कि घावरी इतने कॉन्फिडेंट के साथ ये दावे क्यों कर रही है और इनमें कितनी सच्चाई है।

कोलकाता हाइकोर्ट का बड़ा बयान

3, दलितों से जुड़ा अगला मामला पश्चिम बंगाल के कोलकाता से है जहां एससी एसटी जाति के लोगों के अपमान को लेकर कोलकाता हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोलकाता हाईकोर्ट ने कहा कि अनुसूचित जाति का हर अपमान जातिगत अपमान नहीं होता और दलितों का हर अपमान scst एक्ट के अंतर्गत नहीं आएगा। हाईकोर्ट जस्टिस चैताली चटर्जी दास ने इस मामले सुनवाई करते हुए कहा कि वर्कप्लेस पर पेशेवर मतभेद, प्रशासनिक विवाद, या कथित अपमान को तब तक अपराध नहीं माना जाएगा जब तक कि वो जातिगत अपमान न हो या फिर डराया धमकाया न गया हो।

यह मामला एमहर्स्ट स्ट्रीट थाने में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा था। जिसमें संस्कृत की एसोसिएट प्रोफेसर ने आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी जाति के कारण उन्हें अपमानित किया गया है। विभागीय निर्णयों से जानबूझ कर दूर रखा गया, ऑनलाइन बैठक के दौरान अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। इससे उन्हें मानसिक आघात पहुंचा है, लेकिन कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि ये केवल  पेशेवर मतभेदों से उपजा मतभेद है, इसलिए एससीएसटी अधिनियम के तहत अपराध नहीं माना जायेगा। इसलिए कार्यस्थल का विवाद जातिगत अपराध नहीं माना जायेगा… कोर्ट के इस फैसले से आप कितने सहमत है हमें कमेंट करके जरूर बतायें।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का बड़ा बयान

4, दलितों से जुड़ा अगला मामला ओड़िसा में एक आंगनवाड़ी में दलित सहायिका की नियुक्ति के बाद किया गये बहिष्कार को लेकर है, अब तक ये मामला गांव तक सिमित था, लेकिन अब इस मामले को लेकर जमकर राजनीति होने लगी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इस मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में जातिगत भेदभाव एक संगीन और गंभीर मुद्दा बन गया है, जबकि सामाजिक की बात होता है, ये समझने की जरूरत कि समाजिक न्याय देश की आत्मा है। और इसकी रक्षा हमारी ही जिम्मेदारी है।

खड़गे ने कहा कि जिस तरह के एक आंगनवाड़ी का अभिभावकों ने बहिष्कार किया है, वो बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर नकारात्मक असर पड़ने वाला है। उन्होंने मांग की है कि ऐसे मुद्दो पर सरकार को निष्पक्ष कार्रवाई, दोषियों को दंडित करने और पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। ये कोई पहला मामला नहीं है, राज्य में दलितो और पिछड़ो को आर्थिक रूप से कमजोर करने के लिए गहरी साजिश की जा रही है।

इस तरह का भेदभाव संविधान के अनुच्छेद 21(क) और 47 के तहत शिक्षा और पोषण अधिकार का हनन है। 3 महीने से ये सब चल रहा है लेकिन अब तक सरकार का मूक बने रहना बताता है कि दलित और पिछड़ो को लेकर किस मानसिकता को फॉलो किया जा रहा है। अब देखना ये है कि विपक्ष के इस मुद्दे पर कूदने से सरकार का क्या रूख होगा।

मदुरै में 40 सालों से अंधेरे में रहने को मजबूर दलित परिवार

5, दलितों से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु के मदुरै से है, जहां दलितों को पिछले 40 सालो से अंधेरे में जीने को मजबूर होना पड़ रहा है। ये खबर मदुरै शहर के वंडियूर के पास तीर्थकाडु गांव की है, जहां पिछले 40 सालो से 360 दलित परिवारों के लिए जमीन पट्टा करने को लेकर नगर निगम और राज्य के रेवेन्यू डिपार्टमेंट के बीच विवाद चल रहा ह, जिसके सबसे ज्यादा असर दलित परिवारो पर पड़ रहा है। हैरानी की बात है कि इतने सालों से इस विवाद के कारण दलित परिवारों को बिजली, पीने का पानी, सड़क, ड्रेनेज और सफ़ाई की सुविधायें तक मुहैया नहीं कराई गई है।

दलित परिवारो ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि अब तक कई सरकारों ने नौ एकड़ और 13 सेंट ज़मीन का पट्टा देने का वादा किया था। लेकिन 40 साल हो गए है दलित परिवार अब भी टकटकी लगायें बैठे है। जिसे लेकर तीर्थकाडु SC रेजिडेंट्स प्रोटेक्शन वेलफेयर एसोसिएशन ने मांग पूरी न होने की सूरत में आने वाले चुनावों का बॉयकॉट करने का फैसला किया है।

ज्यादा परिवार में दिहाड़ी मजदूर है, दूसरी जगह किराये पर नहीं रह सकते, बिजली न होने के कारण अक्सर चोर उचक्के आते रहते है। विकास करते भारत में आज भी ये दलित परिवार अंधेरे में रहने को मजबूर है। वहीं अब जब दलित परिवारों ने हल्ला बोला तो सरकारी अधिकारी जल्द से जल्द काम करवाने की बात कर रहे है। लेकिन देखना ये होगा कि आखिर कब तक इनकी जिंदगी में रोशनी आती है।

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