IAS-IPS Distribution List: संसद में सरकार ने पेश की IAS, IPS और IFS अधिकारियों की लिस्ट, OBC-SC-ST की भागीदारी पर सवाल

IAS-IPS Distribution List
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IAS-IPS Distribution List: सामान्य वर्ग का एक बड़ा हिस्सा अक्सर यह सवाल उठाता है कि आरक्षण की व्यवस्था अब तक क्यों जारी है? उनका तर्क है कि कड़ी मेहनत के बाद 80% अंक लाने वाला सामान्य छात्र पीछे रह जाता है, जबकि 55-60% अंक लाने वाले आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार को स्थान मिल जाता है। वे इसे योग्यता की अनदेखी और अपने भविष्य के साथ नाइंसाफी मानते हैं। लेकिन क्या वाकई हकीकत यही है? अगर हम भारतीय ब्यूरोक्रेसी और सरकारी सेवाओं के हालिया आंकड़ों पर नजर डालें, तो तस्वीर इसके बिल्कुल उलट नजर आती है।

केंद्र सरकार ने राज्यसभा में आधिकारिक आंकड़े पेश किए

आंकड़ों का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि जहां बड़े फैसले लेने वाले करने वाले उच्च पदों पर आज भी एक विशेष वर्ग का वर्चस्व बना हुआ है, वहीं सफाई कर्मचारी जैसे निचले स्तर के पदों पर आरक्षित वर्गों (SC/ST/OBC) की उपस्थिति 70% से भी अधिक है। यह असमानता स्पष्ट करता है कि आरक्षण के बावजूद सत्ता और शासन के शीर्ष तक पहुंचने की राह अभी भी सभी के लिए एक समान नहीं है। तो चलिए इस लेख के जरिए बताते है ब्यूरोक्रेसी के उन आंकड़ों के बारे में, जो इस जमीनी हकीकत को बयां करते हैं।

मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार देश की सबसे प्रतिष्ठित सेवाएं मानी जाने वाली IAS, IPS और IFS में अधिकारियों की कमी को लेकर एक बड़ी जानकारी सामने आई है। CPI(M) यानी (भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (Marxist)) सांसद जॉन ब्रिटास (MP John Brittas) के सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने राज्यसभा में आधिकारिक आंकड़े पेश किए। इन आंकड़ों से पता चलता है कि देश की शीर्ष प्रशासनिक सेवाओं में हजारों पद अभी भी खाली हैं, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर असर पड़ रहा है।

ब्यूरोक्रेसी में हजारों पद खाली

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि 1 जनवरी 2025 तक IAS, IPS और IFS तीनों सेवाओं में कुल 2830 पद खाली हैं। जिनमें से IAS में 1300 पद खाली हैं, IPS में 505 पदों पर भर्ती नहीं हुई है और IFS में 1029 पद खाली पड़े हैं। इसका मतलब है कि जितने अधिकारियों की जरूरत है, उतने अधिकारी अभी सिस्टम में मौजूद नहीं हैं। इससे काम का बोझ मौजूदा अधिकारियों पर ज्यादा बढ़ जाता है।

स्वीकृत पद और तैनात अधिकारियों में बड़ा अंतर

सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, तय किए गए पदों और वर्तमान में तैनात अधिकारियों की संख्या में काफी अंतर है।

• IAS के कुल तय किए गए 6877 हैं, लेकिन केवल 5576 अधिकारी ही तैनात हैं
• IPS में 5099 पद स्वीकृत हैं, जबकि 4594 अधिकारी ही सेवा में हैं
• IFS में 3193 स्वीकृत पद हैं, लेकिन सिर्फ 2164 अधिकारी ही काम कर रहे हैं

यह स्थिति दिखाती है कि देश की प्रशासनिक मशीनरी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पा रही है।

तैनात अधिकारियों में OBC SC ST की संख्या

• IAS पद पर OBC 245 (4.3%), SC पद पर 135 (2.4%), ST पद पर 67 (1.2%)
• IPS पद पर OBC 255 (5.5%), SC पद पर 141 (3%), ST पद पर 71 (1.4%)
• IFS पद पर OBC 231 (10.6%), SC पद पर 95 (4.3%), ST पद पर 48 (2.2%)

यानी की 92% जरनल IAS, 90% जरनल IPS और 82% जरनल IFS

OBC, SC और ST की भागीदारी पर सवाल

सांसद जॉन ब्रिटास ने केवल रिक्तियों पर ही नहीं, बल्कि इन सेवाओं में SC, ST और OBC अधिकारियों के मौजूदा कुल प्रतिनिधित्व पर भी सवाल पूछा था। हालांकि, सरकार ने कुल अधिकारियों का जातिगत आंकड़ा साझा करने के बजाय केवल पिछले 5 वर्षों (2020-2024) के ‘डायरेक्ट रिक्रूट’ आंकड़े पेश किए। जिससे यह पता चलता है कि इन वर्गों की भागीदारी को लेकर स्थिति क्या है।

सरकार के अनुसार बताया जा रहा है कि सिविल सेवा परीक्षा के जरिए हर साल अलग-अलग वर्गों से उम्मीदवार चुने जाते हैं और आरक्षण नियमों के अनुसार उन्हें सेवाओं में जगह दी जाती है। हालांकि, कुल खाली पदों की बड़ी संख्या यह भी दिखाती है कि अभी भर्ती की जरूरत काफी ज्यादा है।

प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकारियों की कमी का सीधा असर प्रशासनिक कामकाज पर पड़ता है। इससे फैसलों में देरी हो सकती है और सरकारी योजनाओं को जमीन पर लागू करने में भी मुश्किलें आ सकती हैं। वहीं विपक्षी सांसदों का मानना है कि सरकार द्वारा कुल अधिकारियों का ब्यौरा न देना असल हकीकत को छिपाने की कोशिश है। विश्लेषण बताते हैं कि देश की 90% से अधिक शीर्ष नौकरशाही आज भी सामान्य वर्ग के पास है, जबकि बहुजन समाज (OBC, SC, ST) की भागीदारी उनकी आबादी के मुकाबले 10% के आंकड़े को भी पार नहीं कर पा रही है और इस पर सरकार का कहना है कि UPSC के माध्यम से हर साल भर्ती प्रक्रिया जारी रहती है और धीरे-धीरे इन खाली पदों को भरा जा रहा है।

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