Top 5 Dalit news: एक कहावत तो सुनी ही होगी अपने, बहती गंगा में हाथ धोना।। कुछ ऐसा ही माहौल है इस वक्त देश में जातिवादी आतंकियों के लिए। एक तरफ ये मुट्ठीभर मनुवादी पहले दलितों को निशाना बना कर उनके खिलाफ साजिश रचते है और फिर उन्हें ही आरोपी बना कर न्याय मांगने का ढोंग रचते है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाले घटनाओं के बारे में बतायेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
जातिवादी वकील अनिल मिश्रा का नया प्रोपगेंडा
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला मध्य प्रदेश के जातिवादी वकील अनिल मिश्रा को लेकर है। जब से उसने बाबा साहब का अपमान किया है उसके बाद से उसे लगता है कि अब संविधान उसका गुलाम हो गया है। लगातार संगीन मुद्दों पर अपनी टिप्पणी देने वाले अनिल मिश्रा ने 8 मार्च को दिल्ली आने का ऐलान किया है और वजह है पत्रकार रुचि तिवारी को न्याय दिलाना। हैरानी की बात है कि जहां 8 मार्च को इंटरनेशनल वूमेन डे है, और कई संगठन दिल्ली में जमा होंगे।
ऐसे मौके पर अनिल मिश्रा भी बहती गंगा में हाथ दो रहे है। वहीं रुचि तिवारी का भी एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें उनके पत्रकारिता के सारे दावे मिट्टी में मिल जाए है, क्योंकि उन्हें ये तक याद नहीं की पत्रकारिता की भी थी या नहीं। अनिल मिश्रा जिसका समर्थन करने दिल्ली जा रहे है वो तो खुद दलितों के प्रति नफरत फैलाने वाली निकली। ऊपर से बहुजन छात्रों का पलटवार देखने के बाद क्या रुचि तिवारी फिर से आंदोलन में जाएगी, इसकी उम्मीद कम है।
जब कि रूचि तिवारी ने भीम आर्मी के आंदोलन में जाकर बाबा साहब और बहुजनो को खुल कर अपमान किया था, जिसका नजारा सभी देख चुके है.. ऐसे में अनिल मिश्रा का रुचि तिवारी के लिए न्याय मांगने केवल राजनीतिक रोटियां सेंकने वाला एजेंडा नहीं है तो क्या है। जवाब आप भी जानते है।
भागलपुर में दलित परिवार के साथ मारपीट पर नया अपडेट
2 दलितों से जुड़ा अगला मामला बिहार के भागलपुर है, जहां एक दलित परिवार ने पूरे गांव के ब्राह्मणों पर मुकदमा दर्ज कराया था, लेकिन इस मुकदमे को गलत ठहरा के झूठा बताया जा रहा है। अब इस मामले में बड़ा खुलासा हुआ है, और ये खुलासा किया है केंद्रिय मंत्री चिराग पासवान ने। दरअसल मजदूरी के पैसे मांगने के बदले हुए विवाद में भरी पंचायत में दलित परिवार के साथ हुई मारपीट के बाद पीड़ित ने पूरे ब्राह्मण समाज के 70 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।
लेकिन इस मामले को लगातार झूठा बताया जा रहा था मगर अब खुद केंद्रिय मंत्री चिराग पासवान पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे, जहां मारपीट से घायल हुई एक बच्ची का दर्द देख कर उनकी आंखो में भी आंसू आ गये। बच्ची की रीढ़ की हड्डी टूट चुकी है, और डॉक्टर का कहना है कि अब वो कभी अपने पैरो पर खड़ी नहीं हो सकेगी। ये घटना कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के हरिनगर गांव का है, जहां 31 जनवरी को अशर्फी पासवान ने अपनी मजदूरी की मांग की थी।
लेकिन बदले में उसे और उसके पूरे परिवार को ब्राह्मणों ने बुरी तरह से पीटा, यहां तक कि बच्चों और महिलाओं को भी नहीं बख्शा। लेकिन वहीं दावा किया जा रहा था कि मामले में कई ऐसे नाम है जो गांव में थे भी नहीं.. इसलिए मामला झूठा और बेबुनियाद है, लेकिन चिराग पासवान के पीड़ित परिवार से मिलने पर दूध का दूध और पानी का पानी हो गया है। ऐसे में देखना ये होगा कि प्रशासन अब और क्या एक्शन लेती है।
बिहार में मुखिया के देवर ने किया दलित बच्ची का दुष्कर्म
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला बिहार के शेखपुरा से है, जहां मुखिया का रसूख दिखाने के नाम पर एक 8 साल की मासूम दलित बच्ची के साथ दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। ये घटना शेखपुरा जिले के मोहली थाना क्षेत्र के एक गांव की है। पीड़ित बच्ची के परिवार ने महिला थाना में तहरीर दी कि उनकी 8 साल की बच्ची के साथ गांव के ही मुखिया के देवर ने दुष्कर्म किया है, वहीं आरोपी काफी दबंग किस्म का शख्स है, इसलिए उन्हें अपनी जान का भी खतरा है। पुलिस ने तुरंत इस मामले में कार्यवाई शुरू की तो पता चला कि आरोपी फरार है।
पुलिस ने आरोपी के तलाश में आस पड़ोस के गांव में छापेमारी शुरु की, जिसके बाद आरोपी युवक को नवादा जिले के कौआकोल थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया, हैरानी की बात है कि आरोपी पहले भी बलात्कार के मामले में सलाखों के पीछे जा चुका है, वहीं गांव वालों में भी काफी रोष देखने को मिला है। उनका कहना है कि आरोपी मुखिया के रसूख के कारण अक्सर उनकी बहू बेटियों को छेड़ता, अश्लील बातें करता था, लेकिन शियाकत करने पर भी मुखिया ने कोई सुनवाई नहीं की।
एएसपी डॉ. राकेश कुमार ने गांव वालों को शांत कराया और आश्वासन दिया है कि जितनी जल्दी हो सकें, वो आरोपी का स्पीडी ट्रायल कराकर पीड़िता को न्याय दिलायेंगे साथ ही पुलिस की गस्त भी बढ़ा दी गई है ताकि कोई अप्रिय घटना न घटित हो। अब देखना ये होगा कि इस तरह के घिनौने अपराधी को कितने दिन जेल में रखा जा सकता है।
विदिशा में दलित नाबालिक कलाकार की हत्या
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के विदिशा से है, जहां जातिवादियों को एक दलित कलाकार का आगे बढ़ना इतना खल रहा था कि उसकी गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी गई। ये घटना विदिशा के सागर जिले का है, जहां दलित नाबालिक कलाकार विवेद धानुक 12 फरवरी 2026 की रात में शादी समारोह में शामिल होने गया हुआ था, वहां कुछ लोगो ने जबरन विवेक को ढ़ोल बजाने के लिए कहा, लेकिन विवेक ने ऐसा करने से इंकार कर दिया, जिसके बाद दबंगो ने उसे जातिगत गालियां दी, और जब विवेक ने इसका विरोध किया तो उसे गोली मार दी.. विवेक की हत्या को लेकर धानुक समाज में काफी रोष है।
धानुक समाज सेवा समिति ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सीएम को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें कहा गया कि जातिवादी कुंठा को शांत करने के लिए एक नाबालिक बच्चे की निर्मम हत्या कर दी जाती है, ये केवल जातिगत असामनता की कहानी है, जिसमें पुलिस की भूमिका पर भी सवालिया निशान खड़े हो गये है।
हैरानी की बात है कि अब तक इस मामले में पुलिस की तरफ से कोई कार्यवाई ही नहीं की गई है, जबकि विवेक का परिवार कई बार पुलिस थाने के चक्कर लगा चुका है, जिसके बाद उन्हें धानुक समाज समिति का सहारा लेना पड़ा है। एमपी में दलितो की स्थिति वाकई में दयनीय होती जा रही है, जहां कानून और प्रशासन भी अपनी मनमानी करके उन्हें उत्पीड़ित करने से पीछे नहीं हटती। ऐसे में भला किसके पास जायें न्याय के लिए।
भीम आर्मी चीफ ने किया बड़ा खुलासा
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, जिन्होंने असम के सीएम हिमंता बिस्वा शर्मा पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि उनके राज्य में दलितों के साथ लगातार इतना अत्याचार किया जा रहा है, उनका नरसंहार हो रहा है, सरेआम मारा जा रहा है, लेकिन बावजूद इसके क्यों उनके खिलाफ कोई कार्यवाई नहीं होती है। दलितों के नरसंहार पर सुप्रीम कोर्ट शांत क्यों है।
उन्होंने कहा कि असम सीएम जानबूझ कर दलितो को मजदूरी न देने और कम देने की बात करते है ताकि दलित असम छोड़ कर भाग जायें.. जबकि आज भारत के विकास में सबसे ज्यादा योगदान दलितों और बहुजनों का है, हम बिल्डिंग बनाने में अपना खून पसीना लगा देते है, और हमारे ही सिर पर छत नहीं होती। उन्होंने कहा कि हमारा हक हमसे छीन लिया जाता है, और फिर उत्पीड़न का सामना भी हमें ही करना पड़ता है।
जब आवाज उठाये तो आवाद दबाने की कोशिश होती है, और फिर भी सुप्रीम कोर्ट दलितो और पिछड़ो के साथ अन्याय होने पर कोई टिप्पणी नहीं करती.. क्योंकि अब न्यायपालिका भी चंद नेताओं की हाथों की कठपुतली बन चुकी है। आजाद की बातों से आप कितने सहमत है हमें कमेंट करके जरूर बतायें।



