Black magic in Buddhism: क्या बुद्ध वास्तव में वशीकरण जानते थे? लिच्छवी साम्राज्य का वो अनसुना विवाद

Black magic in Buddhism
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Black magic in Buddhism: जब आपके सामने कोई बौद्ध धर्म के बारे में चर्चा करता है तो आपके जेहन में सबसे पहले क्या आता है। एक भिक्षु, जो गेरूआ वस्त्र पहने हुए है, उनके चेहरे का एक तेज, उनकी मंद मुस्कान, किसी को भी अपनी तरफ आकर्षित कर सकती है, ये उनका प्रभाव ही थे कि लोग उनकी बातों से उनकी तरफ खिंचे आते तथे, उनके ज्ञान को पाकर वो परमात्मा के करीब पहुंचते थे, जीवन मरण के चक्र से आजाद होकर मोक्ष की राह पर चलते थे, जी हां, हम बात कर रहे है बौद्ध धर्म के संस्थापक बुद्ध की ये छवि उनकी की है, लेकिन इसी छवि के कारण वो कई बार विवादों में फंसे है।

बौध धर्म में काला जादू एक अफवाह

जिसमें एक विवाद उठा था उन पर लिच्छिवी सम्राज्य में.. जब उन पर आरोप लगा कि बुद्ध असल में काला जादू करते है, वो लोगो को अपने वश में कर उन्हें अपना अनुयायी बनाते है। लेकिन जो बुद्ध को करीब से जान पाया, उन्होंने कभी भी इन अफवाहों पर विश्वास नहीं किया.. लेकिन जब बुद्ध से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा सुनी सुनाई बातों को केवल इसलिए मत मानो की वो सदियों से फॉलो की जाती है, धर्म ग्रंथो में लिखी हुआ है, या फिर आपको वो बात सच लगती है।

उन्होंने आगे कहा कि जो कहते है कि बुद्ध जादू टोना करते है, क्या वो खुद ऐसे लोग नहीं है जो चाहते है कि उनकी ही बात को सर्वोपरि माना जायें। ऐसे लोग अपना मतलब पूरा करने के लिए हर उस इंसान को रास्ते से हटाने की कोशिश नहीं करेंगे, जो उनकी ढोंग का अनुसरण न करने का ज्ञान देता हो। रही बात काला जादू करने की..तो ये केवल ऐसे ही इष्यालु लोगो की फैलाई भ्रांति है। जिसे सत्य का भान होगा वो समझ पायेगा कि ज्ञान क्या है।

तंत्र साधना और काला जादू दो अलग अलग बातें

बुद्ध का ये तर्क ये तो बताता है कि बुद्ध जादू टोने के बजाये अहिंसा, करुणा और मन के प्रशिक्षण के माध्यम से ज्ञान प्राप्ति का मार्ग बताते थे, बुद्ध ने जादू-टोने को ‘निम्न कला’ मानकर त्यागने का उपदेश दिया था लेकिन फिर भी बौद्ध धर्म आज के समय में जादू टोने, तंत्र मंत्र से अछूता नहीं रहा.. आखिर कैसे.. चलिये बताते है कि कैसे बौद्ध धर्म में तंत्र मंत्र को जगह मिली और किसने दी ये जगह।

जब बौद्ध धर्म में काले जादू की बात होती है तो इस बात नहीं झुठलाया जा सकता है कि बौद्ध धर्म में तंत्र साधना की जाती है। जो कि वज्रयान परंपरा में मोक्ष का रास्ता पाने का एक जरिये माना जाता है, लेकिन तंत्र साधना और काला जादू दो अलग अलग बातें है। वज्रयान समुदाय गौतम बुद्ध के शुरु किए गए महायान परंपरा से बिल्कुल अलग है। महायान में जहां ये माना जाता है कि गुरु के सानिध्य़ में व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है।

बौद्ध धर्म में काले जादू जैसे कोई अवधारना

और कोई भी व्यक्ति अकेले मोक्ष के राह पर नहीं चल सकता है वहीं वज्रयान परंपरा को मानने वालों की सोच इससे बिल्कुल अलग है। वज्रयान जो कि सबसे नया समुदाय है, जिसका मतलब है हीरे अथवा धातु का वाहन। वज्रयान में माना जाता है कि आत्मा हमेशा एक स्वरूप में रहती है, वो अमर है, अजर है। लेकिन जहां तंत्र साधना दूसरे धर्मों में फायदा कमाने और लोगो को नुकसान पहुंचाने का साधन बन गया है, वहीं बौद्ध धर्म में काले जादू जैसे कोई अवधारना है ही नहीं। बौद्ध भिक्षु जो वज्रयान समुदाय से आते है, वो कठिन तंत्र साधना करते है, ताकि उनके मोक्ष के रास्ते आसान हो सकें, इसलिए लिए वो किसी की मदद लेने के बजाये अकेले ही साधना करते है।

व्यक्ति को संसारिक मोह माया से दूर करने का साधन

वज्रयान में माना जाता है कि मोक्ष की रास्ता व्यक्ति को अकेले ही तय करना होता है। ये तंत्रयान कहलाता है, जो व्यक्ति को संसारिक आडंबरो से दूर करके व्यक्ति को साधना और ध्यान के रास्ते पर ले जाता है, जो व्यक्ति को संसारिक मोह माया से दूर करने का साधन बनता है। इसमें व्यक्ति जो भी तांत्रिक क्रियाये करता है वो केवल अपने लिए ही होती है, किसी ओर के लिए नहीं। इसमें वज्र धारक की पूजा की जाती है, जो बुदध का ही एक तांत्रिक रूप है। यानि कि कुल मिलाकर ये कहा जा सकता है कि वज्रयान में तंत्र साधना करने का चलन इसीलिए शुरु हुआ ताकि तंत्र के जरिये निर्वाण को जल्दी और आसानी से पाया जा सकें।

क्या बौद्ध धर्म में काला जादू होता है?

अब सवाल ये है कि क्या बौद्ध धर्म में काला जादू किया जाता है, या फिर काले जादू जैसे मतो पर लोगो का विश्वास है या नहीं.. तो जवाब है नहीं, बौद्ध धर्म आध्यत्म की शक्ति पहचान कर मोक्ष का रास्ता बताता है, काला जादू एक निषेध क्रिया मानी गई है, जो व्यक्ति को धर्म के मार्ग से दूर कर देती है। लेकिन फिर भी वज्रयान बौद्ध परंपरा में काली तारा का जिक्र मिलता है, जो असल में देवी तारा का उग्र रूप है, जो कि सांवला या गहरा नीला होता है।जो कि एक शव पर खड़ी रहती है, काली तारा व्यक्ति के नकारात्मक विचारों और कर्मो को खत्म करके उसके अंहकार को दूर करती है।

ये देवी बेहद क्रोधित स्वरूप है। ये साधक को अंधकार से प्रकाश की तरफ ले जाती है। यानि की तंत्र साधना करने वाले को भी अपने सभी विकारों से दूर होना होगा, जिसके लिए उन्हें पहले काली तारा की साधना करना आवश्यक है, मगर ये साधना भी साधक केवल अपने मुक्ति के लिए कर सकता है, किसी ओर के लिए नहीं।

अन्यथा मुक्ति कभी भी उसके हिस्से नहीं आयेगा। जब तक साधन खुद को पूरी तरह से समर्पित नहीं करता है तब तक उनकी तंत्र साधना पूर्ण ही नहीं मानी जाती है। इसिलए हम ये कह सकते है कि बौद्ध धर्म मं तंत्र साधना भी होती है तो केवल मुक्ति के लिए न की किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए।

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