Top 5 Dalit news: पीलीभीत में जातिगत भेदभाव के चलते प्रेमी जोड़े ने खाया जहर

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Top 5 Dalit news: मौजूदा समय में जब वाकई में देखना चाहते है कि जातिगत भेदभाव क्या है, तो आप किसी भी बड़े शैक्षनिक संस्थानों में चले जाइये… सबसे ज्यादा उत्पीड़न को दलितों का शिक्षा के मंदिर में ही हो रहा है, फिर भला कैसे बाबा साहब की बात माना जायें कि शिक्षा भेदभाव को खत्म कर सकती है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओ के बारे में बतायेंगे, जो इस वक्त शोसल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।

जेएनयू में जातिगत भेदभाव चरम पर

1, दलितों से जुड़ा पहला मामला राजधानी दिल्ली के विवादित विश्वविद्यालय जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी से है। जहां कावेरी छात्रावास में 12 साल बाद एक दलित के अध्यक्ष पद उम्मीदवार बनने के बाद मनुवादी मानसिकता के छात्रों ने जमकर हंगामा और तोड़फोड़ मचाई। एक ओर देश में दलितों और बहुजन छात्रों को न्याय और बराबरी दिलाने की लड़ाई लड़ी जा रही है,उनके खिलाफ होने वाले जातिगत अपराधों को रोकने के लिए यूजीसी के नए नियमों को फिर से लागू करने को मांग को लेकर आंदोलन हो रहा है, लेकिन बावजूद इसके जेएनयू में दलित उम्मीदवार तक गवारा नहीं है।

जेवीएम इलेक्शन कमीशन का चुनाव

जो ये दवा करते है कि शैक्षणिक संस्थानों में जातिगत भेदभाव नहीं होता, ये घटना उन लोगों के मुंह पर करारा तमाचा है। दरअसल जेएनयू में कावेरी छात्रावास में अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होने है, लेकिन यूनिवर्सिटी में निष्पक्ष तरीके से जेवीएम का चुनाव किया जाना था। जेवीएम इलेक्शन कमीशन का चुनाव करता है लेकिन जब सो कोल्ड जातिवाद फैलाने वाले के मन मुताबिक प्रतिनिधि नहीं चुने जाते तो ये लोग इसे रद्द कराने के लिए तोड़ फोड़ मचाते है, और वॉर्डन भी जबरन उन लोगों के साथ मिलकर अपने प्रतिनिधि चुन लेते है। जिसका अब दलित और पिछड़े छात्रों ने विरोध किया है।

उन्होंने इसे दलित छात्रों के साथ अन्याय और भेदभाव भरा रवैया बताते हुए मांग की है कि पिछली बार भी ऐसी ही धांधली करके अध्यक्ष चुना गया था जो पूरे साल छात्रावास से बाहर रहा था, वहीं इस बार भी यहीं नीति अपनाई जा रही है। दलित छात्रों ने अपील की है कि चुनाव निष्पक्ष होना चाहिए, ताकि जो वाकई में अध्यक्ष पद का अधिकारी है उसे ही ये पद मिले। वैसे आपको बता दें कि जातिगत भेदभाव इस वक्त सबसे ज्यादा शैक्षणिक संस्थानों में ही देखने को मिल रहा है, ऐसे में क्या सुप्रीम कोर्ट इन मुद्दों पर कोई टिप्पणी भी देगी या सरकार के इशारों पर चलने का इरादा है।

पीलीभीत में जातिगत भेदभाव के चलते प्रेमी जोड़े ने खाया जहर

2, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से है, जहां जातिवादी मानसिकता और जातिगत भेदभाव ने एक जोड़े की जान पर बन आई है। ये घटना पीलीभीत तहसील के सेहरामऊ थाना क्षेत्र के एक गांव की है। जहां 18 साल के एक युवक ने 17 साल की नाबालिग दलित लड़की के साथ मिलकर जहरीला पदार्थ खा कर जान देने की कोशिश की, जानकारी के मुताबिक दोनों का काफी समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था, लेकिन लड़की के दलित होने के कारण दोनों ही परिवारों को ये रिश्ता मंजूर नहीं था।

वहीं दलित लड़की अपने दादा दादी के साथ रहती थी तो वहीं लड़का गांव के ही तालाब में सिंघाड़े की खेती करता है, दोनों को जब लगा कि परिवार वाले रिश्ते को स्वीकार नहीं करेंगे तो दोनों ने एक साथ सिंघाड़े में डालने वाली दवा खा कर जान देने की कोशिश की। जिसकी खबर मिलते है कि पूरे गांव में अफरा तफरी मच गई। आनन फानन में पहले उन्हें सीएचसी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया लेकिन गलत बिगड़ने पर दोनों को जिला अस्पताल में रेफर किया गया है लेकिन इस वक्त दोनों की हालत काफी गंभीर बनी हुई है।

वहीं इस मामले की जानकारी लेने  के लिए सीओ डॉ प्रतीक दहिया भी अस्पताल पहुंचे। पुलिस के मुताबिक प्रथम दृष्टया में ये मामला प्रेम प्रसंग के चलते आत्महत्या करने की कोशिश का लग रहा है। जब तक दोनों पीड़ितों में से किसी को होश नहीं आ जाता है तब तक इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती है।

बेतिया में दलित आईएएस पर सियासत तेज

3, दलितों से जुड़ा अगला मामला बिहार के बेतिया से है, जहां एक आईएएस अधिकारी को प्लेन में बैठने को लेकर उसे और उसके परिवार को जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। दरअसल बिहार में राजद ने अभी हाल ही में 2011 बैच के आईएएस नीलेश देवरे और उनके परिवार के चार्टर्ड विमान (डिसॉल्ट एविशन) से यात्रा करने को लेकर विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकारी पैसे को नाजायज इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन अब ये मुद्दा राजनीतिक रूप ले चुका है।

राज्य के मंत्री अशोक चौधरी ने इसे राजद की जातिगत भेदभाव की मानसिकता करारा दिया है, उन्होंने पूछा कि इस मुद्दे को इतना तूल केवल इसलिए दिया जा रहा है क्योंकि अधिकारी दलित जाति से है। जबकि उस चार्टेड प्लेन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी थे, और प्लेन खाली था तो आईएएस अधिकारी अपने परिवार को भी आठ ले आए। लेकिन सीएम के आने को लेकर कोई बात नहीं की गई। केवल दलित अधिकारी को निशाना बनाया गया है, जो कि विपक्ष की पूरी तरह से दलित और ओबीसी समुदाय के खिलाफ भेदभाव को मानसिकता का जीवंत उदाहरण है।

मध्य प्रदेश में आदिवासी लड़की की मिली लाश

4, दलितों से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के अलीराजपुर से है जहां एक आदिवासी समाज से आने वाली मेडिकल छात्रा अपने ही छात्रावास के बाथरूप के मृत पाई जाती है, परिवार, दोस्त सबका कहना है कि वो भेदभाव का शिकार हुई है, उसकी मौत भी संदिग्ध है, लेकिन पुलिस इसकी जांच करने के बजाय इस मामले को खुदकुशी का बता कर फाइल को बंद कर देना चाहती है। मृत छात्रा का नाम रोशनी कलेश है जिसने बड़ी मेहनत से नीट क्रैक करके गांधी मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया। लेकिन कुछ ही महीनों में उसकी खुदकुशी की खबर आती है।

जिससे पूरा परिवार टूट गया बड़े सपने देखने वाली रोशनी खुदकुशी क्यों करेगी जब परिवार ने ये सवाल पूछा तो यूनिवर्सिटी मूक हो गया, और तो और पुलिस बिना किसी जांच के मामले को आत्महत्या बता कर रफा दफा करने में लग गई। पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में है वहीं आदिवासी समाज ने अब इस मामले में तुरंत CBI जांच की मांग करते हुए हर एंगल से जिसमें जातिवाद, रैगिंग शामिल है, जांच करने की मांग की है। अब देखना ये होगा कि प्रशासन इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती हैं।

एटा में दलितो की बारात पर हमला करने के मामले में फैसला

5, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के एटा से है जहां एक दलित की बारात पर बुरी तरह से हमला किया करने के मामले में आखिरकार 16 साल बाद पीड़ितों को न्याय मिला है। ये घटना 25 मई 2010 को घटित हुई थी। जब एटा के अवागढ़ थाने के नगला गलुआ गांव ने इंद्रपाल की बारात आई थी। लेकिन तभी यादव समाज के कुछ दबंगों ने वहां आकर वहां नाचना शुरु कर दिया था।

लेकिन जब बारात के कुछ लोगो ने इसका विरोध किया तो दबंगो ने जातिसूचक गालियां देने शुरु कर दिया और तेजधार हथियारों से हमला कर दिया, जिसमें कई बाराती बुरी तरह से घायल हो गए थे, लेकिन आखिरकार करीब 16 सालों का बाद विशेष न्यायधीश एससीएसटी कोर्ट अशोक कुमार अष्टम ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए सभी दोषियों को पांच पांच साल की सजा और और 10-10 हजार रूपय का जुर्माना लगाया है। शायद इसे ही कहते है कि देर आये दुरुस्त आये।

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