Top 5 Dalit news: क्या आपने सोचा है कि दलितों औऱ पिछड़ो के साथ जो भी अत्याचार होते है उसके कितने प्रतिशत मामले ही पुलिस या लोगो के सामने आते है। शायद 50 प्रतिशत भी नहीं.. कहीं ताकतवर लोगो का दबदबा होता है तो कहीं कुछ लोगो को कानून बपौती लगती है.. और जो मामले सामने आते है उसमें से कितने में न्याय होता है…और वो भी कितने सालों का इंतजार करने के बाद..तो फिर कानून कैसे उनका रक्षक हुआ। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओ के बारे में जानेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
भीम आर्मी चीफ ने सपा अध्यक्ष पर साधा निशाना
1, दलितो से जुड़ा पहला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद को लेकर है, जहां वो अमेरिका में बाबा साहब के नक्शे कदम पर चल कर दलित समाज का नाम रोशन कर रहे है तो वहीं उन्होंने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के नीले अंगवस्त्र पहनने को लेकर भी निशाना साधा है, उन्होंने सीदे तौर पर पूछा कि केवल नीला रंग या बाबा साहब का अपनाया रंग पहनने से वो अंबेडकरवादी हो जायेगा.. भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी बाबा साहब की विचार धारा पर चलती है, किसी रंग को उसने अपनी पहचान नही बनाया हुआ है.. बल्कि बाबा साहब की विचारधारा को पहचान बनाया हुआ है, और कोई अखिलेश यादव से पूछा कि वो बाबा साहब के नक्शे कदम पर कितना ही चलते है, या ये नीला रंग ओढ़ना केवल उनका चुनावी एजेंडा मात्र ही है।
आपको बता दें कि आगामी यूपी विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश यादव ने फिर से पीडीए फॉमूले के तहत ही वोटर्स को लुभाने की कोशिश कर रहे है। तो वहीं इस वक्त चंद्र शेखर आजाद पूरे एक्शन मोड में है, उनकी रैलियों में रिकॉर्डतोड़ भीड़ हो रही है..जो साफ इशारा है कि आजाद चुनावों में कोई बड़ा धमाका करने वाले है…वैसे आजाद की बात से आप कितना सहमत है.. क्या अखिलेश का ये चुनावी खेल आजाद को फेल कर पायेगा। हमें अपनी राय कमेंट करके जरूर बतायें।
दलितों के पीने के पानी में डाला मल
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु के पुदुक्कोट्टई जिले से है, जहां पीने के पानी की टंकी में की गई छेड़छाड़ को करीब 4 साल हो गए है लेकिन अभी तक आरोपी का कोई पता नहीं है..जिससे नाराज दलित समुदाय ने चुनावों में वोटिंग का बहिष्कार किया है। ये घटना पुदुक्कोट्टई जिले के वेंगाइवयाल का है, दलित परिवारो से चुनाव बहिष्कार करने का कारण पूछा गया तो आपको भी हैरान रह जायेंगे। दलित परिवारों ने बताया कि दिसंबर 2022 में किसी ने जातिगत भेदभाव और बैर के कारण उनके पीने के पानी की टंकी में मल डाल दिया था।
दलित समुदाय ने इसका विरोध किया था, तब इस मामले की जांच CBCID कर रही थी, लेकिन 4 साल बीत चुके है मगर अभी तक इस घटना के पीछे कौन आरोपी था उसका कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। जिससे गांव वाले काफी नाराज है और उन्होंने गांव में काले झंडे लगा कर चुनाव का बहिष्कार कर दिया है,,वहीं पुलिस भी असली गुनाहगार को पकड़ने के बजाय दलितो को ही तंग कर रही है। हालांकि अधिकारियों ने मतदाताओं को बहुत समझाने की कोशिश की लेकिन वो अपनी जिद पर अड़े रहे.. आपको क्या लगता है कि क्या चुवान बहिष्कार करने से सरकार तक दलित ग्रामीणों की आवाज पहुंचेगी..और कब तक आरोपी पुलिस के शिकंजे में आयेगा।
कटनी में दलित बारातियों को पुलिस ने दौड़ा दौड़ा कर पीटा
3, दलितो से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के कटनी से है, जहां दलित बारातियो को डीजे बजा कर नाचना बेहद भारी पड़ गया.. पुलिस वालों ने बारातियों को न केवल दौड़ा दौड़ा कर पीटा बल्कि मामला शांत होने के बाद भी लड़की वालों के घर पहुंच कर वहां भी मारपीट की। ये घटना कटनी के कुठला थाना क्षेत्र के इंद्रा नगर की है। पीड़ित आकाश चौधरी जो कि होने वाली दुल्हन का भाई है, उसने बताया कि उसकी बहन की बारात मैहर जिले के अमदरा से आ रही थी, लेकिन इंद्रा नगर में बाराती नाच गा रहे थे तभी कुछ पुलिस वाले वहां पहुंच गए और डीजे बजाने को लेकर कहा सुनी होने लगी।
जिससे बाद मामला और गर्म हो गया औऱ पुलिस वालो ने गंदी गंदी गालिया देते हुए बारातियों को पीटना शुरु कर दिया.. बीचबचाव करने आये दूल्हे को भी बुरी तरह से पीटा। मगर फिर किसी तरह से मामसला शांत हो गया लेकिन आरोपी पुलिस वाले लड़की के घर पहुंच गए औऱ वहां भी कई लोगो के साथ मारपीट की। पीड़ित परिवार ने बताया कि इस घटना के कारण बेटी की शादी तक रूक गई।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. संतोष डहरिया ने बताया कि पुलिस वालों ने शराब के नशे में धुत्त लोगो को शांत कराने के लिए ऐसा किया था, लेकिन सवाल ये है कि फिर उन लोगो ने लड़की पक्ष के घर पर जाकर क्यों हमला किया.. वजह साफ है किसी दलित द्वारा इस तरह के करारा जवाब मिलना उनके बर्दाश्त नहीं हुआ। फिलहाल इस मामले की जांच शुरु हो गई है औऱ जांच के बाद सच सामने आ ही जायेगा।
छत्तीसगढ़ हाइकोर्ट का बड़ा फैसला
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला छत्तीसगढ़ से है, जहां एससी एसटी एक्ट लागू करने के लिए पीड़ित के पास वैध और ठोस जाति प्रमाण पत्र होना अनिवार्य है, सिर्फ कहने से ही वो एससी एसटी कैटेगरी में नहीं आ जाता है, ये फैसला सुनाया है छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने। न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास ने सीधे तौर पर कहा कि अगर पीड़ित के पास जाति प्रमाणपत्र नहीं है और तब भी उसे जातिसूचक गालियां दी गई है तो वो एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(आर) के तहत अपराध की श्रैणी में नहीं आयेगा। एक मामले में सुनवाई करते हुए उन्होंने जातिसूचक गालियों को बिना पुख्ता जातिगत प्रमाणपत्र के अपराध मानने से इंकार करते हुए मामले को रद्द करने का ऐलान कर दिया है।
हालांकि आईपीसी की धारा 294 (अश्लील भाषा के उपयोग) का आरोप लगा रहा। हैरानी की बात तो ये है कि ये मामला 21 साल पुराना है, और अब कोर्ट फैसला सुना रही है..जिसमें उन्होंने अब मामले को एससी एसटी एक्ट के तहत रद्द कर दिया है। वहीं आरोप पर 2000 रूपय का जुर्माना लगा दिया है। समझने वाली बात ये है कि आपको दलित होने के लिए दस्तावेज में प्रमाण चाहिए तभी न्याय होगा.. लेकिन उस मानसिकता के लिए क्या सजा होगी.. जो केवल दलित के घर पैदा लेते ही लोगो के मन में दलितो के प्रति भर जाती है.. उन पर अत्याचार करते समय कोई उनसे प्रमाणपत्र देख कर अत्याचार क्यों नही करता..ये केवल दोहरी मानसिकता को बढ़ावा देने वाला फैसला है. आप क्या सोचते है।
नीमच में दलित परिवार के घर में लगाई आज
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के नीमच से है. ये राज्य दलितों और पिछड़ो के लिए एक ऐसा नरक बनता जा रहा है, जहां कोई दलित सुरक्षित नहीं है, न्याय की बात तो छोड़ ही दिजिये.. ताजा मामला नीमच के बघाना पुलिस थाना क्षेत्र के जयसिंह पूरा गांव की है, जहां गोपाल जाटव की बेटी पिछले 10 दिनो से लापता है, लेकिन जब वो पुलिस कंप्लेन करने गए तो उल्टा पुलिस वालों ने गोपाल जाटव पर ही झूठे आरोप लगा कर गिरफ्तार कर जेल में बंद कर दिया। गोपाल जाटव औऱ उनकी एक बेटी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है जिसमें वो सीएम मोहन यादव से गुहार लगा रहे है कि पहले उनकी बेटी लापता है।
उसे खोजने के बजाय उन लोगो के घर के मुखिया को ही गिरफ्तार कर लिया.. ऊपर से वो लोग उनका घर तोड़ने पहुंच घए थे, लेकिन जब वो उसमे सफल नहीं हो सके तो सरपंच, सचिव और पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत ने उनके घरों में आग लगा दी… जिससे चारो तरफ केवल चीख पुकार मची है। इस मुद्दे पर भीम आर्मी ने भी दलित परिवार की मदद के लिए आगे आकर नीमच अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गए है। अब देखना ये होगा कि क्या ये चीख पुकार सीएम के कानो तक पहुंचेगी.. और आखिर क्या दलित परार को न्याय मिल सकेगा।



