Top 5 Dalit news: भारत से तब तक जातिवाद खत्म नहीं होने वाला जब तक कुछ तथाकथित धर्म के रखवाले हिंदुओं को कंट्रोल करते रहेंगे। पिछड़ों को बराबरी देना तो दूर उनके बराबरी के सपने को भी साकार होते हुए नहीं देखना चाहते है ये मनुवादी.. फिर भला कैसे दलितों के भले की बात होगी। तो चलिए इस लेख में जानते हैं पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में जानेंगे, जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
पलामू में दलित युवक के साथ मॉब लिंचिंग
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला झारखंड के डाल्टनगंज से है जहां एक दलित युवक को रात के अंधेरे में ट्रेक्टर की बैटरी चोरी करने के शक में भीड़ ने बुरी तरह से पीट पीट कर उसकी हत्या कर दी। ये घटना पलामू जिले के परवा थाना क्षेत्र के तेलियाही गांव का है। मृतक पवन कुमार को पहले रात के अंधेरे में चोर होने के शक में पकड़ा गया था और फिर उसे लकड़ी की चौकी से बांधकर बुरी तरह से पीटा गया।
पुलिस ने बताया कि युवक पर चोरी का आरोप गलत लगा है जबकि मामला प्रेम प्रसंग था, घटना के वक्त किसी ने उन्हें जानकारी दी थी दलित युवक को चोर होने के शक में बुरी तरह से पीटा जा रहा है, जिसके तुरंत बाद पेट्रोलिंग के निकली पुलिस की टीम तुरंत वहां पहुंची और पीड़ित की जान बचा कर उसे मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल ले जाया जा गया था।
लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं परवा पुलिस स्टेशन के ऑफिसर-इन-चार्ज अंचित कुमार के मुताबिक पुलिस ने जांच में पाया कि मामला चोरी का नहीं बल्कि प्रेम प्रसंग का लग रहा है। मृतक के पास से किसी तरह का कोई चोरी का सामान नहीं मिला है, वहीं पुलिस को शक है कि उसकी प्रमिका के परिवार ने ही अपनी कुन्नस निकालने के लिए पवन को पकड़ कर मारपीट की है। फिलहाल इस मामले में एक संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया गया है, और बाकि 8 सदिंग्धों की जांच जारी है।
यूजीसी को लेकर जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज का बयान
2, दलितो से जुड़ा अगला मामला जातिवादी विवादित वकील अनिल मिश्रा को लेकर है, यूजीसी के बदलावों का लगातार विरोध करने के बाद अब अनिल मिश्रा धर्म गुरुओं के समर्थन में आकर राजनीति में आने से पहले ही अपना वोट बैंक मजबूत कर रहने है। ये खबर है जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी महाराज को लेकर, जिन्होंने अपने प्रवचनों के दौरान यूजीसी एक्ट को पूरी तरह से बेबुनियाद बताया है।
उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यूजीसी किसी हाल में सफल नहीं होगा, अगर सरकार नहीं मानती तो भी ये वापिस हो कर रहेगा। जिसे लेकर अब वकील अनिल मिश्रा ने भी समर्थन करते हुए एपने एक्स हैंडल पर लिखा- यदि देश को टकराव और अराजकता की ओर बढ़ने से बचाना है, तो सरकार को तत्काल UGC निर्णय पर पुनर्विचार कर उसे वापस लेना चाहिए। अब तो संत समाज भी UGC के विरुद्ध खुलकर सामने आ चुका है।
यूजीसी का नियम शिक्षा और राष्ट्रहित के साथ समझौता होगा, जिसे सवर्ण समाज किसी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा। अब देखना ये होगा कि यूजीसी के नियमों को लेकर एक तरफ भीम आर्मी लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे है तो वहीं जिन संतो को एकजुटता का संदेश देना चाहिए वो ही बांटने का काम कर रहे है तो भला कैसे दलित हीनभावना के दायरे से ऊपर उठेंगे।
कानपुर में दलित परिवार का घर जलाया
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर से है, जहां जातिवादी दबंगो ने ट्रेक्टर निकालने के विवाद में दलितों को बुरी तरह से पीटने के साथ साथ सरेआम एक दलित का घर भी जला दिया। ये घटना कानपुर के घाटमपुर क्षेत्र के सरगांव गांव की है। पीड़ितों ने पुलिस को तहरीर दी कि सरगांव के ग्राम प्रधान नीधि यादव का बेटा अभय यादव ट्रैक्टर-ट्राली से भूसा लेकर दलित बस्ती से जा रहा था, लेकिन रास्ते में महेश संखवार के घर के बाहर मिक्सर मशीन खड़ी थी, और राशन की गाड़ी आई हुई थी।
जिससे थोड़ी देर के लिए बाधित हो गया था, मगर अभय और महेश की पत्नी भाग्यवती के बीच तीखी बहस हो गई, और ये बहस इतनी बढ़ गई कि अभय और उसके कुछ साथिय़ों ने रात को अंधेरे में लाठियां, डंडे और कुल्हाड़ियों से हमला किया गया। यहां तक पड़ोसे से जो बीच बचाव करने आये थे, उन्हें भी काफी पीटा गया, और दलित के मकान में आग लगा दी।
इस घटना के सामने आने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने घायलो को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में भर्ती कराया गया था, जहां 5 की हालात गंभीर बनी हुई है, वहीं घाटमपुर की विधायक सरोज कुरील ने भी खुद अस्पताल जाकर घायलो से मुलाकात की है और पीड़ितो को आश्वान दिया है कि उनके आरोपियों को बख्शा नहीं जायेगा। डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि आरोपी घटना को अंजाम देने के बाद से ही फरार है पुलिस उनकी तलाश में है। जल्द ही वो सलाखों के पीछे होंगे।
कर्नाटक में दलित कपल को मंदिर से बाहर निकाला
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला कर्नाटक के तुमकुरु ज़िले का है, जहां एक नए दलित शादीशुदा जोड़े ने भगवान का आशिर्वाद लेने के लिए मंदिर में प्रवेश क्या कर लिया, जातिवादी आतंकियो को इतना नागवार गुजरा की दंपंत्ति को बेज्जत करके मंदिर से बाहर निकाल दिया गया। पीड़ित पंकजा और पुनीत ने पुलिस को तहरीर दी कि वो दोनो तुरुवेकेरे तालुक के गोनी तुमकुरु गांव के अरसम्मा मंदिर में दर्शन करने के लिए गए थे, लेकिन नारायणप्पा नाम के एक आदमी ने उन पर चिल्लाते हुए कहा कि “दलित मंदिर में अंदर नहीं जा सकते।
तुम कहीं और जाकर अपनी पूजा करो। तुरंत चले जाओ, जिससे वहां काफी हंगामा हुओ और दोनो को बिना दर्शन के ही वापिस लौटना पड़ा। जिसके बाद पंकजा के छोटे भाई ने जगदीश ने तुरुवेकेरे पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया। जगदीश ने नारायणप्पा पर जानबूझ कर जातिगत भेदभाव फैलाने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी।
जिसके बाद पुलिस ने मामले की संगीनता को समझते हुए तुरंत आरोपी को गिरफ्तार कर जांच शुरु कर दी है। डिप्टी एसपी ओमप्रकाश ने भरोसा दिलाया है कि जिन्होंने भी इस भेदभाव का घटना के वक्त समर्थन किया है उन्हें भी गिरफ्तार किया जायेगा। हैरानी की बात है अगर वाकई में पुलिस एससी एसटी मामलो में इतनी तेजी दिखाती तो शायद अपराध कम हो गए होता..आपका क्या सोचना है।
पत्नी से तंग आकर दलित नेता ने की आत्महत्या
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला पंजाब के अमृतसर से है, जहां हैरसमेंट और मेंटल प्रेशर से तंग आकर एक दलित नेता ने गोली मारकर आत्महत्या कर ली है। दरअसल दलित नेता और म्युनिसिपल यूथ एम्प्लॉइज फेडरेशन के प्रेसिडेंट अश्वनी कुमार, जिन्हें आशु नाहर के नाम से भी जाना जाता था, लगातार हो रहे सालो के हैरसमेंट और ससुराल वालों के टॉर्चर से तंग आकर खुदकुशी कर ली। आशु नाहर असल में पंजाब के एक नामी दलित नेता थे।
आशु ने आत्महत्या के पहले एक वीडियो जारी कर अपनी आपबीती भी बताई है। वहीं आशू के भाई ने भी आशू के ससुराल वालों और पत्नी के खिलाफ उत्पीड़न करने का मामला दर्ज कराया है। आशु राजनीति में सक्रिय रहने के साथ साथ एक ऑटो वर्कशॉप में ड्राइवर का काम करते थे, लेकिन उनकी पत्नी प्रिया के परिवार की दखलअंदाजी के कारण अक्सर दोनो का झगड़ा होता था।
जिसके बाद प्रिया ने मायके जाकर आशू पर झूठा केस दर्झ करा दिया, जिससे वो काफी अवसाद में रहने लगे थे, और इतना बड़ा कदम उठाया है। पुलिस ने आशू के आत्महत्या को लेकर जांच शुरु कर दी है, और जल्द ये भी साफ हो जायेगा कि असली दोषी कौन है। वहीं आशू के परिवार ने जल्द से जल्द न्याय की मांग की है। हालांकि अभी तक किसी को भी हिरासत में पूछताछ शुरु नहीं की गई है।



