Top 5 Dalit news: अब तक जिन दलितों को मनुवादी आतंकी सेवा करते और उनके टुकड़ों पर पलते हुए देखते आए थे, फिर भला उनसे यह कैसे बर्दाश्त होगा की कोई पिछड़ी और दलित जाति का उन्हें टक्कर देते हुए बड़ी-बड़ी गाड़ियों में घूमे, बड़े पद पर हो। शायद यही वजह है कि आज भी बाबा साहब अंबेडकर तथाकथित जातिवादियों के सबसे बड़े दुश्मन है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली खबरो के बारे में बतायेंगे.. जो इस वक्त आपको देश में दलितो की वास्तविक स्थिति से अवगत करायेंगे.. साथ ही कैसे दलितों की प्रताड़ना को आज भी न्यायसंगत करार दे दिया जाता है।
प्रतापगढ़ में दलित नाबालिक से सामूहिक बलात्कार
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले से है, जहां एक 17 साल की दलित किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म करने का मामला सामने आने के बाद सनसनी फैल गई है। ये घटना प्रतापगढ़ जिले के अंतू पुलिस थाना क्षेत्र के चमनगंज बाजार के पास के एक गांव की है। पीड़िता को दिलीपपुर के खमपुर गांव के तीन लोगों ने अगवा किया था, जिसके बाद परिजनो ने तुरंत पुलिस को इसकी जानकारी दी.. अगले दिन पीड़िता अपने गांव के बाहर बेहोश मिली थी, पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था, पुलिस ने तुरंत मामले की सख्ती से जांच करते हुए आरोपियों की तलाश शुरु कर दी.. लेकिन पीड़िता ने होश में आने के बाद बताया कि उसकी गुड्डू खान नाम के लड़के से दोस्ती फेसबुक के जरिये हुई थी।
उसने उसे घुमाने के बहाने से बुलाया था औऱ बाइक से माहुली मंडी ले गया, लेकिन तभी वहां पर गुड्डू के दो दोस्त सोहेल और इरफान कार से आ गए और जबरन उसे बगीचे में ले गये और उसका सामूहिक बलात्कार किया..जिसके बाद बेहोशी की हालत में गांव के बाहर छोड़ गए। पुलिस ने गुड्डू को एक मुठभेड़ में गिरफ्तार कर लिया था जिसके बाद एसओ अभिषेक सिंह सिरोही ने दूसरे आरोपी इरफान खान उर्फ खुन्ने को अंतू रेलवे स्टेशन से पकड़ा। वहीं तीसरे आरोपी की तलाश जारी है। हैरानी की बात है कि इतनी जागरूकता फैलाने के बाद भी बच्चे आखिर ऐसा गलती क्यों कर रहे है, वजह साफ है.. ये जागरूकता असल में सभी जगहों पर पहुंच ही नहीं रही है।
मध्य प्रदेश के विवादित वकील अनिल मिश्रा की बढ़ी मुश्किलें
2, दलितो से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के ग्वालियर कोर्ट के विवादित वकील अनिल मिश्रा को लेकर है, जिसने भले ही बाबा साहब अंबेडकर के बारे में अपशब्द कह कर प्रसिद्धि तो पा ली थी, लेकिन अब अनिल मिश्रा की बनावटी हिंदूवादी नीतियां सबके सामने उजागर हो गई है। खासकर वकील आशुतोष दूबे ने अनिल मिश्रा के गंदे इरादों की पोल पट्टी खोलते हुए कहा कि वो दलितों और पिछड़ो को भारत के लिए खतरा कहते है।
एससी एसटी एक्ट कानून को खत्म करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे है..लेकिन अनिल मिश्रा ये बताये कि जाति के नाम पर वो युवाओ को सड़को पर उतरने के लिए भड़का रहे है मगर कभी वो अपने बेटे को इस आंदोलन में क्यों नहीं लाते। वो युवाओं के जीवन से खेल कर केवल फेमस होना चाहते है, लेकिन वहीं अपने बेटे को भी ले कर आये.. तब तो सबको यकीन होगा कि वो सच्चे ब्राह्मण है, और हिंदू धर्म की रक्षा करने चाहते है। वहीं एक और वकील ने अनिल मिश्रा पर निशाना साधा कि.. वो कहते है कि ग्वालियर कोर्ट में बाबा साहब की मूर्ति उन्होंने नहीं लगने दी।
अगर उनमें हिम्मत है तो वो एक ट्रक रोक कर दिखा दें.. मूर्ति लगने से रोकने की बात तो दूर है। अनिल मिश्रा केवल हर काम का क्रेडिट लेना चाहते है.. लेकिन ऐसा लगता है कि बाबा साहब के खिलाफ बोलना और दलितों और पिछड़ो के खिलाफ बयानबाजी का असर खत्म हो गया और अब उनके ही टीम में फूट पड़ गई है। अब देखना ये होगा कि अनिल मिश्रा अपनी छवि सुधारने के लिए किस दलित महापुरुष को निशाना बनाने की तैयारी कर रहे है।
रोहिणी घावरी ने फिर से भीम आर्मी चीफ को घेरा
3, दलितो से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद की तथाकथित एक्स गर्लफ्रेंड को लेकर है, एक तऱफ आजाद यूपी के आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर एक्शन मोड में है, उत्तर प्रदेश की जनता आजाद को अगला सीएम बनाने के लिए पूरा जोर लगा रही है वहीं आजाद इस वक्त अपने वादों औऱ इरादों के जरिए एक लोकप्रिय नेता बन गए है तो वहीं रोहिणी घावरी ने भी आजाद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। घावरी ने पहले ही समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव से हाथ मिला लिया है और उनके लिए चुनाव प्रचार करने की बात की है तो वहीं अब घावरी ने आजाद के खिलाफ बयानबाजी करते हुए कहा कि वो किसी भी हाल में आजाद को चुनाव नहीं जीतने देगी.. और न ही किसी से गठबंधन करने देगी।
अब तक सपा के सहारे सरकार बनाने का सपना देख रहे आजाद को जब अखिलेश यादव ने भाव देना बंद कर दिया है तो अब वो MIM चीफ असद्दुदीन औवेसी को कॉल करके हाथ मिलाने की कोशिश कर रहा है। घावरी ने कहा कि आजाद उन्हें कमजोर न समझे… घावरी के खबरी हर जगह है खास कर आजाद के आसपास तो और ज्यादा। हैरानी की बात है कि आजाद ने औवेसी के संपर्क साधा है ये खबर घावरी को किसने दी.. और इस बात में कितनी सच्चाई है या ये केवल चुनावी हथकंडा ही है। वैसे आपको क्या लगता है क्या घावरी वाकई में आजाद को कड़ी टक्कर दे पायेगी।
रांची विश्वविद्यालय के आदिवासी कर्मचारी ने की आत्महत्या
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला झारखंड के रांची से है, जहां जातिगत भेदभाव से तंग आकर रांची विश्वविद्यालय के आदिवासी कर्मचारी राम कुमार ने पर आत्महत्या कर ली है, जिसके बाद से पूरे विश्वविद्यालय में हड़कंप मच गया है। इस मुद्दे पर अब ट्राइबल आर्मी के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय के कुलपति सरोज शर्मा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.. उन्होंने कहा कि मृतक राम कुमार के आदिवासी समाज से होने के काऱण उनके साथ जातीय उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना की जाती थी, यहां तक कि उसने उसकी कई बार शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
जिससे आहत होकर राम कुमार ने आत्महत्या जैसा संगीन कदम उठा लिया। ट्राइबल आर्मी ने रांची विश्वविद्यालय की कुलपति सरोज शर्मा को तत्काल पद से हटाने की मांग करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है, साथ ही दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिले। हैरानी की बात है कि अब तक छात्रों के साथ जातिगत भेदभाव की खबरे आती थी, लेकिन अब तो कर्मचारियों को भी प्रताड़ित करने से पीछे नहीं हटते है.. ऐसे में भला कैसे वो शिक्षा पर औऱ शैक्षणिक संस्थानो पर भरोसा कर सकेंगे। अब देखना ये होगा कि सरकार का इस पर क्या रुख होगा।
कर्नाटक में 101 दलित परिवारों का बहिष्कार
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला कर्नाटक के कालाबुरागी से है, जहां दलित परिवारों का सामाजिक और आर्थिक तौर पर बहिष्कार करने का मामला सामने आया है, जिससे दलित परिवार एक एक दाने को मोहताज हो गये है साथ ही उनका आशियाना भी तबाह हो गया है। ये मामला कालाबुरागी के कामप्ली तालुक के श्रीरामारंगपुरा गांव का है, जहां पीड़ित दलित परिवार ने कर्नाटक मदिगारा रक्षा वेदिके के सदस्यों के साथ मिलकर बल्लारी में समाज कल्याण के सदस्यों से मुलाकात कर अपनी समस्या बताई। पीड़ितो में करीब 101 दलित परिवार शामिल है, उन्होंने बताया कि साल 2014 में राजस्व विभाग ने काफी विवाद के बाद दलित परिवार को गांव के भीमनेनी सोमाप्पा के कब्जे वाली लगभग 135 एकड़ जमीन जारी की थी।
लेकिन इसका नतीजा ये हुआ कि गांव के दूसरे समाज के लोगो ने उनका बहिष्कार करना शुरु कर दिया है, वहीं वो घर बनाने का भी विरोध झेल रहे है, इसलिए पीड़ितो ने अर्जी दी है कि उनके लिए उचित आवास स्थल का बंदोबस्त किया जायें। साथ ही राज्य सरकार से आर्थिक सुरक्षा उपाय, प्रत्यक्ष ऋण देने की भी अपील की है। अब सरकार ने जमीन देने का वादा तो जारी कर दिया लेकिन उसके लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता पर कोई चर्चा नहीं है। जिससे दलित लोग अभावो में जीने के लिए मजबूर है। अब देखना ये होगा कि इन अर्जी से दलित परिवारो को कुछ फायदा होगा।



