Top 5 Dalit news: सालों से जिस गांव में था सामाजिक बहिष्कार, वहां अब प्रशासन ने कायम किया समान अधिकार

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Top 5 Dalit news: ये तो तय है कि अगर सरकार और प्रशासन चाहे तो कभी किसी की हिम्मत नहीं होगी किसी भी दलित के साथ उत्पीड़न करने की। लेकिन दुख की बात तो ये है कि आज दलितों की स्थिति दयनीय होने के पीछे का सबसे बड़ा कारण ही सरकार हो गई है। केवल वोटबैंक की राजनीति के कारण दलितों को इतना दबाया जाता है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।

भीम आर्मी चीफ पर लगा संगीन आरोप

1, दलितों से जुड़ा पहला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है जिनके साथ एक और नया विवाद जुड़ गया है। दरअसल एक्टर एजाज खान ने आजाद को धोखेबाज कहते हुए कहा कि आजाद के कारण उनका राजनीतिक करियर डूब गया। एजाज खान ने कहा कि आजाद के लोगों ने आधी रात को टिकट दी कि चुनाव लड़ों, लेकिन वो खुद एक बार भी महाराष्ट्र में सभा में शामिल भी हुए, और न ही उनके लिए कोई प्रचार किया।

ऐसा लगता है कि कुछ लोगों के इशारे पर वो मेरे पास आए थे, अगर वाकई में चाहते तो मेरे लिए एक बार खड़े तो होते, लेकिन ऐसा एक बार भी नहीं हुआ। वहीं एजाज खान का वीडियो शेयर करके उनकी एक्स गर्लफेंड्र रोहिणी घावरी ने भी रावण को घेरते हुए कहा कि उनके खून में ही गद्दारी है। ये बीजेपी का ही प्यादा है जो बहुजनों की एकता को तोड़ने आया है। अब देखना ये होगा कि इस बार भी आजाद चुप्पी साधे रहेंगे या अपने बचाव में कुछ कहेंगे।

कर्नाटक में दलितों के लिए सरकार की बड़ी पहल

2, दलितों से जुड़ा अगला मामला कर्नाटक के गडग से है, जहां राज्य सरकार की पहल के कारण दलितों को सामाजिक न्याय मिलने लगा है। जी हां बिल्कुल सही सुना आपने, ये खबर गडग जिले के शिंगातलूर गांव की है, जहां ऊंची जाति वालों ने भेदभाव के चलते दलितों के बाल काटने पर पिछले कई सालों से रोक लगा रखी थी, लेकिन जब सामाजिक कल्याण विभाग को इसकी जानकारी लगी तो उन्होंने दलितों को न्याय दिलाने के लिए सोशल वेलन विभाग, तालुक प्रशासन, तालुक पंचायत, दलित संगठनों और शिवशरणा हडपदा अप्पन्ना समुदाय के साथ मिलकर एक नया सैलून ही खुलवा दिया और तिप्पापुर गांव के बसवराज हडपदा को सैलून चलाने की जिम्मेदारी दी गई है।

जानकारी के मुताबिक गांव की दूसरी जाति के लोगों का मानना है कि नौवीं पूजा के दौरान अगर दलितों के बाल काटे गए तो घर में गरीबी और अशुभता आएगी, इस अंधविश्वास के कारण दलितों के साथ अन्याय हो रहा था। सरकार की इस पहल से गांव के दलित समुदाय में काफी खुशी है। वो कह रहे हैं कि अगर सरकार दलितों पर ध्यान दें तो दलितों का उत्पीड़न कोई नहीं कर सकता।

यूपी में दलित नाबालिग से दुष्कर्म आरोपी को सजा

3, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के सोनभद्र से है, जहां दुष्कर्म की शिकार एक नाबालिग दलित बच्ची को न्याय मिलने में 7 साल का समय लग गया। लेकिन 7 सालों की लड़ाई के बाद आरोपी को आजीवन कारावास की सजा हुई है।

ये घटना सोनभद्र जिले के राबर्ट्सगंज थाने की है।  पीड़िता और उसके पिता ने 25 अक्टूबर 2018 को पुलिस थाने में तहरीर दी थी कि आरोपी राज मिश्रा बहला-फुसला कर जंगल में ले गया और वहां उसके साथ पहले दुष्कर्म किया और फिर उसे जातिसूचक गालियां देते हुए मारपीट भी की थी।

जिसके बाद इसकी जांच चल रही थी। करीब 7 सालों बाद सबूतों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश (पाक्सो अधिनियम) अमित वीर सिंह की अदालत ने आरोपी को 20 साल की सजा और 56 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। जिसमें से 40 हजार पीड़िता को दिए जाएंगे।

दिल्ली में जेएनयू में दलित छात्रों के साथ बर्बरता

4, दलितों से जुड़ा अगला मामला राजधानी दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी से है, जहां आरक्षण को दलितों के किए जा रहे नशे से जोड़ने वाले वाइस चांसलर के खिलाफ दलित छात्रों ने जैसे ही अपनी आवाज बुलंद करना शुरू किया वैसे कानून को अपनी ड्यूटी नजर आने लगी। वीसी के निलंबन की मांग करते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पुलिस भर भर कर जेल ले गई।

हैरानी की बात है प्रदर्शन कर रहे scst समाज के ये छात्र किस कारण जेल गए , उन्हें क्यों गिरफ्तार किया गया ये कारण तक नहीं बताया गया है। बता दें कि जेएनयू की कुलपति शांतिश्री धुलिपुडी पंडित ने बयान दिया था कि दलित और अश्वेत लोग हमेशा पीड़ित बनकर या विक्टिम कार्ड खेलकर आगे नहीं बढ़ सकते है, जिसे सीधा उनके आरक्षण लेने पर तीखा प्रहार समझा गया। ये मामला तूल पकड़ता गया और scst समाज के छात्र उनके इस्तीफे की मांग कर रहे है।

हैरानी की बात है कि हमेशा दलित छात्रों के खिलाफ ही क्यों कार्यवाही होती है, जबकि यूजीसी का विरोध कर रहे एक भी सवर्ण छात्र गिरफ्तार नहीं हुआ, मगर वहां भी दलित छात्रों को अपमान और हिंसा ही सहनी पड़ रही है। जो केवल सरकार की जातिवादी दोहरी नीति का सबूत है। आपकी क्या राय है हमें कमेंट करके बताएं।

भीम आर्मी चीफ को मिली जान से मारने की धमकी

5, दलितों से जुड़ा अगला मामला आजाद समाज पार्टी से नगीना सांसद और भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को खुलेआम मिलने वाली धमकियों को लेकर है। एक तरफ उनके प्रतिद्वंदी आजाद के खिलाफ उन्हें धोखेबाज होने का आरोप लगा कर इन्हें बदनाम करने को कोशिश कर रहे है तो वहीं अब आजाद को खुलेआम जान से मारने की बात कही जा रही है।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है जिसमें साधु का रूप धारण किए हुए एक दबंग आजाद को लंकापति रावण के समान कह रहा है, इतना ही नहीं रावण को पागल कुत्ता कहते हुए उसे जितनी जल्दी मार दिए जाए उतना ही समाज के लियर अच्छा है । ये शख़्स यही नहीं रुका , उसने कहा कि जैसे रामराज्य स्थापित करने के लिए रावण का वध हुआ था वैसे ही इस रावण को भी मार देना चाहिए तभी राम का राज्य स्थापित होगा।

ये पहली बार नहीं है जब आजाद को लेकर खुलेआम धमकियां मिल रही हो, भीम आर्मी ने सरकार से आजाद की सुरक्षा को लेकर z+ सिक्योरिटी की मांग की है। वैसे जिस तरह से आजाद की लोकप्रियता बढ़ रही है उसे लेकर आपको क्या लगता है क्या आजाद को z+ सुरक्षा वाकई में मुहैया कराई जानी चाहिए।

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