Gautama Buddha Controversy: क्यों आज भी कुछ लोग मानते है कि बुद्ध महात्मा नहीं बल्कि अपराधी है?

Gautama Buddha Controversy
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Gautama Buddha Controversy: आपने जब गौतम बुद्ध के सिद्धार्थ गौतम से भगवान बुद्ध की यात्रा के बारे में सुना या पढ़ा होगा, तो आप में से ज्यादातर को यहीं पता है कि बुद्ध रात के अंधेरे में पत्नि और बेटे को छोड़ कर चुपचाप निकल गए थे, लेकिन क्या वाकई में ऐसा था। क्या सच में उन्होंने अपनी पत्नी और बच्चे का बिना उनकी जानकारी के परित्याग कर दिया था, या ये केवल बुद्ध को बदनाम करने के लिए तब के ब्राह्मवादी सोच को फैलाया गया था, ताकि बुद्ध की छवि को सभ्य समाज के लिए और पारिवारिक विचारधारा को लेकर चलने वालो के बीच में खराब की जा सकें।

आज भी समाज का एक तबका बुद्ध को नापसंद करता है, उन्हें परिवार की जिम्मेदारी से भागने वाला कहता है। जो ये मानते है क बुद्ध असल में कोई महात्मा नहीं बल्कि एक अपराधी है। अब सवाल ये है कि क्यों ऐसा सोचा जाता है, और क्या सच में बुद्ध ने अपने परिवार के साथ अन्याय किया था। क्यों माना जाता है उन्हें अपराधी.. और किसकी फैलाई भ्रांति है ये।

बुद्ध का गृह त्याग

बुद्ध के जन्म के समय ही राजपुरोहितो ने ये भविष्यवाणी की थी कि या तो बुद्ध बड़े महाश शासक बनेंगे या फिर दुनिया का मार्गदर्शक करने वाले सन्यासी। पिता किसी भी हाल में बेटे को वैरागी बनते नहीं देखना चाहते थे, नतीजा उन्होंने सिद्धार्थ पर कभी दुखों का साया आने ही वहीं दिया था, उन्हें सारी सुविधाएं और भोग विलास मिले ताकि वो विरक्ति की तरफ न जाये, लेकिन सब कुछ होते भी उनका मन नहीं लगता था। ऐसे में जब राज्यअभिषेक का बात हुई तो सिद्दार्त ने राज्य भ्रमण की इच्छा व्यक्त की और वहीं से सिद्धार्थ के जीवन का ध्येय ही बदल गया, वो समझ गए कि व्यक्ति कितना ही धनवान क्यों न हो, लेकिन न तो वो खुद को बूढ़ा होने से रोक सकता है, न वो बिमार होने से रोक सकता है और न ही मरने से।

कपिलवस्तु की सीमा पर त्यागे राजशी वस्त्र

ऐसे में एक सन्यासी से मिलने के बाद वो ये समझ गए कि वैराग्य के जरिये ही मन की शांति प्राप्त की जा सकती है, और 29 साल की उम्र में एक रात बैचेनी के कारण सत्य की तलाश में वो अपनी पत्नी और बेटे को सोया हुआ छोड़ कर महल से निकल गए थे, और बाहर खड़े अपने सारथी छन्न से कपिल वस्तु की सीमा तक जाने को कहा। छन्न चुपचाप अपने स्वामी की बात मानकर चल दिये और सिद्धार्थ ने कपिलवस्तु की सीमा पर अपने सारे राजशी वस्त्र त्याग दिये और छन्न को लौटाते हुए लौट जाने को कहा। सिद्धार्थ समझ चुके थे अगर सत्य की तलाश करनी है तो वैराग्य ही एकमात्र उपाय है। इस घटना को बौद्ध धर्म में ‘महाभिनिष्क्रमण’ कहा जाता है।

क्यों मानते है लोग बुद्ध को अपराधी?

दरअसल तथाकथित ब्राह्मणों के पारंपरिक समादिक मानदंड़ो में व्यक्ति का अपने कर्तव्यों से भागना उन्हें अपराधी बनाता है, और बुद्ध ने भी अपने राजपाट को, अपने माता पिता को, और अपनी पत्नी बच्चे को छोड़ कर सन्यास लेने का निर्णय लिया था जो कि सामाजिक दृष्टि में गलत और अन्याय था, इस कारण उन्हों भगोड़ा भी कहा गया। बुद्ध ने सामाजिक व्यवस्ता की त्याग कर दिया और उनके विपरीत चले गए, सामाजिक परंपरा और रीतियों को तोड़ दिया था, जिसके कारण उस वक्त समाज में उन्हें एक तरह से अपराधी कहा माना गया।

बुद्ध ने जाति व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई

एक राजकुमार के तौर पर उन्हें अपने पिता का भार संभाला चाहिए थे, राज काज के कार्य को आगे बढाना चाहिए थे, एक पिता जिनके सारे सपने, सारी उम्मीदें उनके पुत्र से लगी थी, उसे तोड़ने के लिए उन्हें अपराधी माना गया। एक पिता के लिए ये बेहद दुख की बात थी कि उनकी युवा पुत्र वैरागी हो गया था।

वहीं बौद्ध धर्म के बढ़ते प्रभाव के कारण भी इस तरह की भ्रांति फैलाई गई, जिसमें बुद्ध ने जाति व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई थी, ब्राह्मणों ने इसे समाज और भगवान की आज्ञा का अवहेलना बताया था, और बुद्ध को समाजिक व्यवस्था के खिलाफ बताया था। बुद्ध भले ही आज बौद्ध धर्म को मानने वालों के लिए महात्मा है जिन्होंने लोगो को दुखों से उठाने के लिए जन्म लिया था, लेकिन ब्राह्मवादी समाज की नजरों में वो आज भी एक अपराधी है, जिन्होंने अपनी नैतिक जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लिया था। हम आपसे पूछते है कि बुद्ध आपकी नजरों में क्या है।

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