Logic behind Buddha: बौद्ध धर्म को हमेशा शाक्य मुनि गौतम बुद्ध से भी जोड़ कर देखा जाता है। शाक्य वंश का होने के कारण उन्हें शाक्य मुनि गौतम बुद्ध कहा गया है, आज दुनिया भर में बौद्ध धर्म को मानने वाले शाक्य मुनि के बताये मार्ग पर ही चलते है, उनके ही बतायें मार्ग का अनुसरण करते है। जो उनकी ज्ञान को बांटने से शुरु हुई थी और आज भी जारी है, हालांकि बुद्ध जहां महायान परंपरा को मानते थे, वहीं भी के समय में बौद्ध धर्म को मानने के लिए अलग अलग पद्दति अपना लिये गए है, लेकिन सबका ध्येय आज भी समान है मोक्ष की प्राप्ति।
बुद्ध को भगवान विष्णु के नौवे अवतार
बुद्ध के जन्म और उनके धरती पर आने को लेकर लोगो की अलग अलग भ्रांति है, कोई उन्हें हिंदू भगवान विष्णु के नौवे अवतार कहते है तो कुछ उन्हें एक साधारण इंसान ही मनाते है जिन्होंने अपने तपोबल के दम पर ज्ञान प्राप्त कर असाधारण बन गए थे। बुद्ध बनने से पहले के जीवन में वो एक शाक्य राजकुमार सिद्धार्थ गौतम थे, जिनके पास विलासिता के भरपूर साधन थे, धन, धन्य और सुख सुविधा के सारे साधन थे। एक राजसी जीवन जिया था उन्होंने, ऐसे में सवाल ये है कि क्या भगवान बुद्ध और गौतम बुद्ध एक ही है या मतो के हिसाब से उनमें बदलाव हुआ।
शाक्यमुनि गौतम बुद्ध क्यों कहा गया ?
बौद्ध धर्म की स्थापना और उसके तेजी से फलने फूलने के कारण गौतम बुद्ध सबसे ज्यादा प्रचलित होने वाले बुद्ध हुए, दरअसल बुद्ध कोई नाम है ही नहीं, बल्कि ये तो एक उपाधि है, जो कि ज्ञान की प्राप्ति के बाद सिद्धार्थ गौतम को मिली थी। बुद्ध जिसका अर्थ है वो व्यक्ति जो जागृत हो चुका है जिसने परम ज्ञान को प्राप्त कर जीवन का रहस्य जान लिया हो। जन्म से बुद्ध सिद्धार्थ गौतम थे, गौतम उनका गौत्र था, और बुधत्तम प्राप्त करने के बाद उन्हें शाक्यमुनि गौतम बुद्ध कहा जाने लगा, यानि की ये बात साफ है कि सिद्धार्थ गौतम से पहले भी की ऐसे लोग हुए जिन्हें बुद्ध की उपाधि दी गई थी, और उन्होंने ही अपने ज्ञान को बांटा था, उनका ज्ञान कभी भी किसी और से धर्म से विरक्ति तो सिखाता ही वहीं था।
बौद्ध धर्म को मानने वाले नास्तिक प्रवृति के
उन्होंने तो स्वयं को जानने का, अपनी अंतर्रात्मा को शुद्ध करने का ज्ञान दिया था। जातिवाद और बलि से त्रस्त हो चुकी जनता को उस वक्त बुद्ध का ज्ञान काफी प्रभावित कर गया, वो उन्हें जीवन को आसानी से जीने का मार्ग लगा और लोग बौद्ध धर्म से जुड़ने लगे थे। वहीं ब्राह्मणों के आंडबर से बचने के लिए बुद्ध का ये संदेश की देवी देवता खुद भी संसार चक्र से मुक्त नहीं है।
बुद्ध ने कभी भी ईश्वर के अस्तित्व को नकारा नहीं लेकिन ईश्वर के रास्ते पर चलने के लिए भी प्रेरित नही किया, जिससे धीरे धीरे बौद्ध धर्म को मानने वाले नास्तिक प्रवृति के होते चले गए। बुद्ध ने ये कहा कि मानव जाति के लिए किसी देवी देवता को मानना जरूरी नहीं है। उनकी नजरों में देवी देवता खुद भी कई पीड़ाओ से घिरे हुए है तो फिर वो भला वो मुक्ति का मार्ग कैसे प्रशस्ति करेंगे।
भगवान बुद्ध और गौतम बुद्ध का फर्क
भदवान बुद्ध को लेकर हम ये कह सकते है कि बुद्ध कई हुए, लेकिन जब आप कलयुग के बुद्ध की बात करते है तो वो शाक्यमुनि गौदम बुद्ध ही है। कलयुग के पहले द्वापर युग में भगवान बुद्ध को भगवान विष्णु का नौवां अवतार माना जाता है। वहीं गौतम बुद्ध के ज्ञान की मानी जाये तो उनका कहना है कि भगवान खुद भी पुनर्जन्म के चक्र से नही बच पाये है, तो आत्मज्ञान पाने के लिए ईश्वर में विश्वास होना जरूरी नहीं है। यानि कि भगवान बुद्ध को लेकर हम ये कह सकते है कि बुद्ध कई हुए है, जिसमें विष्णु के नौवे अवतार भी शामिल है लेकिन गौतम बुद्ध ही कलयुग के बुद्ध है।
ऐसे में सबका अपना मत हो सकता है कि वो किस युग के बुद्ध का अनुसरण कर रहे है, कलयुग के बुद्ध और शाक्य मुनि गौतम बुद्ध एक ही है। और उन्ही के बताये मार्ग पर आज के बौद्ध धर्म को मानने वाले लोग चलते है। सिद्धार्थ गौतम ने ही अपने तपोबल पर ज्ञान प्राप्त कर बुद्धत्व को प्राप्त किया था औऱ वो ही आज के भगवान बुद्ध और गौतम बुद्द भी है।



