Telangana news: हाल ही में तेलंगाना से एक विवादित मुद्दा सामने आया है, जहाँ गुड फ्राइडे के दिन दलित ईसाइयों ने अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने हेतु अपनी आवाज़ उठाई है। उन्होंने एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट के आर्डर को चुनौती देते हुए न्याय की मांग की है।
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दलित इसाइयों के उठाई हक की मांग
कुछ दिन पहले, दलित ईसाइयों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि दलित समुदाय के जो सदस्य ईसाई धर्म अपना चुके हैं, वे अब दलितों के लिए बनी योजनाओं के तहत किसी भी लाभ के हकदार नहीं होंगे; वे ऐसे सभी प्रावधानों के दायरे से बाहर रहेंगे। वही बीते दिन तेलंगाना (Telangana) के खम्मम (Khammam) से खबर सामने आई है, जहां दलित ईसाइयों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी दलित ईसाई हार मानने को राजी नहीं है। शुक्रवार को गुड फ्राइडे के मौके पर खम्मम धर्मप्रांत के बिशप सगीली प्रकाश ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए फिर से समीक्षा करने की मांग की है।
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दलित ईसाइयों के अधिकारो पर प्रहार
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 13, 14 और 25 के तहत दलित इसाइयों को भी धर्म की स्वतंत्रता और कानून के समक्ष समानता मिलनी चाहिए, जबकि अनुसूचित जाति आरक्षण का लाभ न देना उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित बना रहा है। इतना ही नहीं उन्होंने 1950 के उस फैसले की भी आलोचना की जिसमें हिंदूओं के साथ साथ सिखों और बौद्धो को तो अधिकार मिले लेकिन ईसाइयों और मुसलमानो को बाहर रखा।
उन्होंने कहा कि इस बहिष्कार के कारण दलित ईसाईयों को शिक्षा और सार्वजनिक रोजगार में आरक्षण से वंचित रखा जा रहा है। ये केवल धार्मिक सौहार्द के खिलाफ उठाया गया कदम था। जो धर्म बदलने वाले दलित ईसाइयों के अधिकारो पर प्रहार है। इसके अलवा आपको बता दें, आज से नहीं दलितों के साथ अत्यचार काफी समय से होता आ रहा है. उन्हें उनके हकों से वंचित किया है। विशव के इस तरह के आरोपो और आलोचनाओ के बाद क्या सुप्रीम कोर्ट फिर से दलित इसाइयों के लिए अपने विचार बदलेगी… वैसे हम आपसे पूछना चाहते है कि क्या दलित इसाईयों को भी आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए.. आप सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कितने सहमत है।



