Ambedkar Jayanti 2026: डॉ. भीमराव अंबेडकर भारत के महान विचारकों में से एक थे, जिन्होंने समाज, शिक्षा और न्याय व्यवस्था को एक नई दिशा दी. उनका जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था और इसी दिन उनकी जयंती मनाई जाती है। बाबासाहेब के विचार आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं, जो समानता, अधिकारों और शिक्षा के महत्व को दिखाते हैं।
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शिक्षा और प्रगति पर विचार
- “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो।”
- “शिक्षा वह शेरनी का दूध है जो इसे पियेगा वह दहाड़ेगा।”
- “बुद्धि का विकास मानव के अस्तित्व का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए।”
- “मैं किसी समुदाय की प्रगति को उस डिग्री से मापता हूँ जो महिलाओं ने हासिल की है।”
समानता और धर्म पर विचार
- “धर्म मनुष्य के लिए है, न कि मनुष्य धर्म के लिए।”
- “मैं ऐसे धर्म को मानता हूँ जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाता है।”
- “समानता एक कल्पना हो सकती है, लेकिन फिर भी इसे एक गवर्निंग सिद्धांत के रूप में स्वीकार करना चाहिए।”
- “एक महान व्यक्ति एक प्रतिष्ठित व्यक्ति से इस तरह भिन्न होता है कि वह समाज का सेवक बनने के लिए तैयार रहता है।”
स्वतंत्रता और स्वाभिमान पर विचार
- “स्वतंत्रता का अर्थ केवल राजनीतिक शक्ति नहीं, बल्कि सामाजिक स्वतंत्रता भी है।”
- “छीनकर खाने वाले की उम्र कम होती है, लेकिन जो दूसरों को खिलाकर खाता है वह अमर हो जाता है।”
- “इतिहास गवाह है कि जहाँ नैतिकता और अर्थशास्त्र के बीच संघर्ष होता है, वहाँ जीत हमेशा नैतिकता की होती है।”
- “अपने भाग्य के बजाय अपनी शक्ति पर विश्वास करो।”
लोकतंत्र और संविधान पर विचार
- “संविधान केवल वकीलों का दस्तावेज नहीं है, यह जीवन का एक माध्यम है।”
- “यदि मुझे लगा कि संविधान का दुरुपयोग किया जा रहा है, तो मैं इसे सबसे पहले जलाऊंगा।”
- “लोकतंत्र केवल सरकार का एक रूप नहीं है; यह अनिवार्य रूप से साथ रहने का एक दृष्टिकोण है।”
- “कानून और व्यवस्था राजनीति के शरीर की दवा हैं और जब राजनीति बीमार हो जाए तो दवा लेनी ही चाहिए।”
जीवन दर्शन
- “जीवन लंबा होने के बजाय महान होना चाहिए।”
- “एक सुरक्षित सेना एक सुरक्षित सीमा से बेहतर है।”
- “मनुष्य नश्वर है, उसी तरह विचार भी नश्वर हैं। एक विचार को प्रचार-प्रसार की उतनी ही आवश्यकता होती है जितनी कि एक पौधे को पानी की।”
- “रात भर जागने वाला हर व्यक्ति साधु नहीं होता, वह समाज की चिंताओं में भी जागा हो सकता है।”



