Top 5 Dalit news:दलितों की दिन प्रति दिन बगड़ रही स्थिति पर चाहे कितनी भी आवाज बुलंद कर ली जाए, लेकिन जब तक मनुवादी मानसिकता रहेगी, दलितों को सम्मान के लिए हमेशा लड़ना पड़ेगा। चाहे संविधान आ जाए या फिर कोई शख्त कानून, लेकिन जब दलितों की बात आती है तो सब धरे के धरे क्यों रह जाते है। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाले घटनाओं के बारे में जानेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
विवादित वकील अनिल मिश्रा की बड़ी चाल
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला विवादित वकील अनिल मिश्रा के फिर से दलित संगठन पर किए गए टिप्पणी को लेकर है। दरअसल अमिल मिश्रा ने एक वीडियो शेयर की है जिसमें दवा किया जा रहा है कि मनीष शुक्ला नाम के एक शख्स के घर पर भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने हमला किया है। ये खबर मध्य प्रदेश के सीधी की है। जहां शांतिपूर्ण आंबेडकर रैली में पहले तो कुछ नकाबपोशों ने हमला किया, और फिर मनीष शुक्ला नाम के व्यक्ति के घर पर हमला कर दिया, लेकिन अनिल मिश्रा ने बिना किसी आधार के नकाबपोशों को भीम आर्मी का गुंडा कहा। जबकि किसी की भी पहचान नहीं हुई है।
हैरानी की बात है जहां दलित संगठन बाबा साहब जयंती को शांतिपूर्ण तारीखें से मना रहा था वहीं अनिल मिश्रा जैसे जातिवादी लोगों को केवल मौका चाहिए कि वो ऐसे दिन को टारगेट कर सकें। बिना सबूत के इस तरह का आरोप वो भी इतना विश्वास से, कहीं ऐसा तो नहीं कि खुद ही जानबूझ कर रैली ने हंगामा करवाया हो और फिर भीम आर्मी को बदनाम करने की साजिश कर रहा है। वैसे भी जो बाबा साहब को पसंद नहीं करता है वो उनके लोगों के खिलाफ कुछ भी कर सकता है। आपकी क्या राय है हमें कमेंट करके जरूर बताएं।
दलितों महिलाओं के लिए पंजाब सरकार की बड़ी सौगात
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला पंजाब के आदमपुर से है, जहां बाबा साहब की 135वी जयंती के मौके पर दलित समाज के पुरुषों को ही नहीं बल्कि अब महिलाओं को भी आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में भगवंत मान सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने 14 अप्रैल से सार्वभौमिक महिला-केंद्रित योजना की शुरुआत की है, जिसके तहत पंजाब में जुलाई 2026 महीने से 18 साल की उम्र से बड़ी दलित महिलाओं को हर महीने अब 1500 रूपये आर्थिक सहायता देने का फैसला किया है। कल ये योजना 9 निर्वाचन क्षेत्र में शुरू की गई है वहीं 15 मई से बाकी के 105 क्षेत्रों में शुरू होगी, साथ ही जुलाई महीने से पैसे मिलने भी शुरू हो जाएंगे। वहीं इसके आवेदन की कोई अंतिम तारीख नहीं है।
इसके लिए 26,000 पंजीकरण केंद्रों बनाए गए है, ताकि जिन दलित महिलाओं को इसके बारे में जानकारी भी है उन्हें भी इसके बारे में जागरूक कराया जा सका। इसके पंजीकरण के लिए पंजाब के पते वाला आधार कार्ड, पंजाब का मतदाता पहचान पत्र और बैंक पासबुक की ही जरूरत होगी, लेकिन अगर किसी दलित महिला के पास दस्तावेज नहीं है तो वो उनके लिए भी आवेदन दे सकती है। भगवंत मान सरकार का ये फैसला वाकई में राज्य की अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं के लिए एक बेहद ऐतिहासिक कदम है। हालांकि इस कदम से आप सरकार को विधानसभा चुनावों में कितना फायदा होगा ये देखने वाली बात होगी।
तमिलनाडु में डीएमके कार्यकर्ता पर जातिगत भेदभाव का आरोप
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला तमिलनाडु के कोयंबटूर से है, जहां डीएमके की मेट्टुपलयम उम्मीदवार कविता कल्याणसुंदरम पर जातिगत भेदभाद और दलित महिला का अपमान करने का आरोप लगा है। ये आरोप लगाया है कविता को एक दलित महिला ने चुनाव प्रचार के दौरान कुमकुम लगाया था लेकिन कुछ देर के बाद कविता कल्याणसुंदरम ने वो कुमकुम पोछ दिया जबकि वो खुद मानव संसाधन एवं पर्यावरण संरक्षण विभाग की न्यासी नियुक्ति समिति की सदस्य है, लेकिन दलितों के साथ उनकी ऐसी भावना बताती है कि पार्टी के धर्म निरपेक्ष होने के सारे दावे कोरे है… इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ है।
वहीं डीएमके ने इन आरोपो को खारिज करते हुए कहा कि वो केवस पसीना पोछ रही है, विपक्ष कविता कल्याणसुंदरम की बढ़ती लोकप्रियता से डरा हुआ है.. इसलिए इस तरह का आरोप लगा रहे है। अब देखना ये होगा कि किनके आरोपो में सच्चाई है, वैसे डीएमके के कार्यकर्ताओं का नाम अक्सर जातिगत भेदभाव में सामने आता है.. ऐसे में क्या वाकई में पसीना पोछा गया या दलित अपमान हुआ..वो तो आने वाले वक्त में पता चल ही जायेगा।
चित्रकूट में गैंगरेप पीड़िता ने की खुदकुशी
4,दलितो से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के चित्रकूट से है, जहां एक दलित बच्ची अपने साथ हुई बर्बरता के लिए पहले दर दर न्याय के लिए भटकती रही, लेकिन जब कहीं से भी न्याय नही मिला तो उसने मौत को गले लगा लिया। ये घटना चित्रकूट जनपद पहाड़ी थाना क्षेत्र के एक गांव का है, जहां होली के दिन 17 साल की नाबालिग दलित बच्ची के साथ गांव के ही तीन युवक भूषण प्रजापति ,शीतल प्रजापति और बोधि शुक्ला ने गैंगरेप किया था, और अधमरी हालात में खेतों में छोड़ कर फरार हो गए थे, इतना ही नही पुलिस ने भी पीड़ित परिवार को डराया धमकाया कि अगर केस हुआ तो उनकी ही बदनामी होगी।
इसलिए केसस न करें, लेकिन जब परिवार अड़ा रहा तो पुलिस वालों ने आरोपियों के खिलाफ कार्यवाई करने के बजाये तीनो को 6 महीने के लिए गांव से दूर रहने को कहा। पुलिस की कार्यवाई से आहत दलित बच्ची ने फांसी लगा कर आत्महत्या कर ली.. इस घटना से पूरे गांव में सनसनी मच गई है। वहीं पुलिस की कार्यवाई को लेकर लोगो का गुस्सा फूट पड़ा है। अब देखना ये होगा कि इस मुद्दे पर अब भी पुलिस कोई कार्यवाई करती है या अभी भी उनका इरादा बहरा और अंधा बने रहने का है।
क़तर में भी धूमधूम से मनाई गई आंबेडकर जयंती
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला भारत के बाहर एक गल्फ कंट्री कतर से है, जहां 14 अप्रैल को बाबा साहब की जयंति पर उनके सम्मान में चार चांद लगाते हुए केवल भारत में ही बल्कि कतर जैसे एक इस्लामिक देश में भी आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के तेलुगु दलित समुदाय ने पूरे जोश के साथ जयंति मनाई। हैरानी की बात है कि जहां भारत में बाबा साहब के नाम पर दंगे फसाद किये गए, उनका अपमान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई, तो वहीं कहीं कहीं तो उनकी जयंति पर होने वाले कार्यक्रमों को भी नहीं होने दिया गया वहीं कतर ने बाबा साहब के प्रति अपना सम्मान व्यक्ति करते हुए न केवल दलित संगठन को जयंति मनाने की परमिशन दी, साथ ही ये भी साबित किया कि कतर जैसे देश में भी बाबा साहब को कितना सम्मान प्राप्त है।
इसमें भारतीय दूतावास की भी बड़ी भूमिका रही है, जो कतर के दलित मजदूरों के लिए लगातार काम कर रहे है। वहीं भारतीय समुदाय के कल्याण से जुड़े एक प्रमुख संस्था ICBF के अध्यक्ष शनावस टी. बावा ने बताया कि उन्हें खुशी है कि कतर जैसे देशों में भारत की तरह दलितों को जातिगत भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ता, जिससे उनकी प्रतिभा का सही इस्तेमाल किया जाता है। वहीं ‘जय भीम यूथ ऑर्गनाइज़ेशन’ के अध्यक्ष बाबू सिकोलू भी इस कार्यकर्म में पहुंचे थे। ये हर क दलित के लिए बेहद गर्व की बात है कि बाहरी देशों में बाबा साहब को केवल सम्मान नहीं मिलता बल्कि दलित समुदाय भी समानता और सम्मान महसूस कर सकता है।



