Ambedkar’s visits to Lucknow: आज भले ही बाबा साहब भीम राव अंबेडकर के नाम की गूंज सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में सुनाई देती है, जिसका कारण जातिगत समीकरण और चुनावों में पिछड़ी जातियों का दवदबा हो सकता है… लेकिन क्या आप ये जानते है कि जिन बाबा साहब अंबेडकर का आज एक चुनावी मुद्दा मात्र बन कर रह गया है, उनका यूपी में आना कई बड़े बदलावो का कारण बना था।
इसी यूपी की एक नगर उनकी सबसे पसंदीदा नगरी हुआ करती थी, जहां पहली बार दौरा करने के बाद ही बाबा साहब समझ गए थे कि उनके आंदोलन को मजबूती देने लिए ये शहर सबसे बेहतर है। हर यात्रा ने बाबा साहब के साथ साथ इस शहर को भी कुछ नया दिया था। जी हां हम बात कर रहे है नवाबों की नगरी के नाम से फेमस और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की.. ये वो शहर है जिससे बाबा साहब को बेहद लगाव था.. अपने इस लेख में हम बाबा साहब की उन यात्राओं के बारे में जानेंगे जब वो लखनऊ आये और हर बार एक नई कहानी लिखी गई।
बाबा साहब की लखनऊ की यात्रा
बाबा साहब का जन्म मध्य प्रदेश में हुआ था लेकिन 2 साल क उम्र में ही वो महाराष्ट्र चले गए थे, जाति से महार होने के कारण उन्हें बचपन से हर चीज के संघर्ष करना पड़ता था.. उनके लिए पढ़ाई और जीवन यापन के लिए पैसे जुटाना मुश्किल थी, ऐसे में अलग अलग स्थानो पर जाना उनके लिए कहां आसान था.. लेकिन जब बाबा साहब अपनी पीएचडी की पढ़ाई पूरी करके लौटे तो वो दलितो और पिछड़ो के लिए ही आवाज उठाते रहे, लेकिन 1930 में जब लंदन में प्रथम राउंड टेबल कांफ्रेस में बाबा साहब पहुंचे तो उनकी मुलाकात तब के लखनऊ के नवाब मुहम्मद अहमद सैयद खान छतारी से हुई.. और नवाब साहब बाबा साहब की शख्सियत से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने बाबा साहब को लखनऊ में उनका मेहमान बनने का निमंत्रण दे दिया था।
लखनऊ में दलितों की संख्या ज्यादा
इस सम्मेलन के बाद बाबा साहब पहली बार लखनऊ की यात्रा पर गए थे.. और वहां का माहौल देखकर ये शहर उनकी पहली पसंद बन गया था। बाबा साहब अपने पहली यात्रा के दौरान गोलागंज के रिफा ए आम में नवाब साहब के साथ बैठक की थी। अपनी यात्रा के दौरान बाबा साहब को ये भी समझने का मौका मिला कि लखनऊ में दलितों की संख्या ज्यादा है, जहां उनके आंदोलन को और तेजी के हवा दी जा सकती है.. आपको बता दें कि लखनऊ को दलितों की नगरी भी कहा जाता है। बाबा साहब ने अपने आंदोलन का विस्तार केवल महाराष्ट्र तक ही सिमित नहीं रखा, वो अब दूसरे राज्यों में भी दलितों औऱ पिछड़ो के लिए आवाज उठाने लगे थे।
राजनितिक विकास के लिए संबोधित
जिसके कारण उन्हें पूरे देश में बड़ी प्रसिद्धि भी मिली। लेकिन लखनऊ के दलितों के लिए बाबा साहब ने 25 अप्रैल 1948 को खुल कर बात की। जब आजाद भारत के वो पहले कानून मंत्री बने। बाबा साहब उस वक्त फिर से लखनऊ की यात्रा पर आये थे, और इस बार पर्पस साफ था, वो 1948 में शेड्यूल्ड कास्ट्स फेडरेशन’ द्वारा आयोजित कंपनी गार्डन मैदान में एक सम्मेलन को में शामिल होने और दलितो के मुद्दों पर उनके राजनितिक विकास के लिए संबोधित करने आये थे। इस दौरान ‘डॉ. भीम राव अंबेडकर महासभा उत्तर प्रदेश’ के अध्यक्ष लालजी निर्मल ने बाबा साहब के भाषण के कुछ अंश में भी सांझा किये।
उनके अनुसार बाबा साहब मानते थे कि सामाज्क रूप से विकास के लिए जरूरी है कि दलितों और पिछड़ो को कांग्रेस तथा वामपंथ के बीच एक ‘तीसरे विकल्प’ के रूप में मजबूती से उभरना होगा। तभी अनुसूचित जाति के लोग पूरी तरह से भेदभाव से निकल कर स्वतंत्र हो पायेंगे। बाबा साहब स्पेशल दलितों औऱ पिछड़ो को उनकी शक्ति पहचानने औऱ उन्हें मजबूती से तीसरे विकल्प के रूप में खड़ा होने के लिए प्रेरित करने आये थे। बाबा साहब के इस भाषण ने दलितों की राजनीति में बड़ा बदलाव किया था।
सरोजिनी नायडू के यहां ठहरने का प्रस्ताव ठुकराया
इस यात्रा से जुड़ा एक किस्सा भी काफी प्रचलित है, कि जब तत्कालीन राज्यपाल सरोजिनी नायडू को बाबा साहब के आने का पता चला था तो वो खुद उनके स्वागत के रागबाग रेलवे स्टेशन तक गई थी, उन्हें खाने के लिए आमंत्रित किया था.. जहां उनके पद का सम्मान किया था..जिससे बाबा साहब काफी खुश थे, लेकिन बाबा साहब ने सरोजिनी नायडू के यहां ठहरने का प्रस्ताव ठुकरा कर कहा कि वो अपनी ट्रेन के एक सैलून में रूकेंगे, क्योंकि वहां उनकी सबसे प्रिय मित्र उनकी किताबें मौजूद है। जिन्हें वो उनके घर नहीं ला सकते है.. जिस पर सरोजिनी नायडू मुस्कुरा दी थी और बाबा साहब ट्रेन के डिब्बे में ही रहे थे।
आज के समय में बाबा साहब की याद में सबसे ज्यादा स्मारक यूपी में ही बने हुए है। आंबेडकर महासभा में बाबा साहब की अस्थि कलश आज भी रखी हैं.. इसके अलावा अनगिनत अंबेडकर पार्क मौजूद है। दलित प्रेरणा स्थल है, जो सभी बाबा साहब को ही समर्पित क्या गया है। बाबा साहब के लखनऊ यात्रा ने न केवल वहां के दलितों के सोच में बदलाव लाने का काम किया बल्कि बाबा साहब के मकसद को और मजबूती दी थी।



