Odisha News: ओडिशा से हाल ही में एक चौंकाने वाली और परेशान करने वाली घटना सामने आई है। दलित समुदाय के सदस्यों ने एक स्थानीय पुलिस थाने में ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं; उनका दावा है कि पुलिसकर्मी उन्हें जमानत देने के बदले उनसे थाने में साफ-सफाई का काम करवाने की मांग करते हैं।
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ज़मानत के बदले धुलवाते है पुलिस स्टेश
जब न्यायपालिका कुछ फैसलों में ‘सुधारात्मक दृष्टिकोण’ अपनाती है, तो ऐसे निर्णय अक्सर चर्चा और विवाद का विषय बन जाते हैं। हाल ही में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसमें अदालत ने ज़मानत देने की शर्त के तौर पर ‘पुलिस थाने की सफ़ाई’ करने का आदेश दिया। जी हाँ , ओड़िसा (Odisha) के रायगड़ा जिले से है, जहां कानून को जातिगत भेदभाव के खिलाफ सख्त कदम उठाना चाहिए था वहीं उल्टा कोर्ट ने दलितों और आदिवासियों को गिरफ्तारी के बाद जमानत देने की शर्त में पूरा पुलिस स्टेशन साफ करने का निर्देश दिया है।
हैरान कर देने वाली ये घटना रायगड़ा (Rayagada) और कलाहांडी जिलों (Kalahandi District) के तिजिमाली इलाके (Tijimali areas) की है, जहां एक बाक्साइट खदान (Bauxite Mine) के मालिक कंपनी वेदांता के खिलाफ दलित और आदिवासी समाज के लोग करीब 2023 से ही विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, यहां तक कि अब तक 40 लोगो को गिरफ्तार भी किया गया..लेकिन अब एक बड़े खुलासे ने वहां की न्याय व्यवस्था पर सवालियां निशान खड़े कर दिये है।
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पुलिस स्टेशन की सफाई करने के आदेश दिये
आरोप है कि करीब 8 मामलो में जमानत देने के बदले ओडिशा हाईकोर्ट और जिला अदालतों ने रोजाना पुलिस स्टेशन की सफाई करने के आदेश दिये थे। इन आठ लोगो में 6 दलित और 2 आदिवासी समाज से आते है। एक मजदूर कुमेश्वर नायक ने इन आरोपो की पुष्टि भी की है, जिन्हें मई 2025 में ओडिशा हाईकोर्ट ने जमानत देते हुए काशीपुर पुलिस स्टेशन की सफाई करने के आदेश दिये थे.. हैरानी की बात है कि अब तक ये मामला दबा हुआ था, लेकिन सिविल राइट्स संगठनों ने इस मामले को उठाया है..अब देखना ये होगा कि इन आरोपो के बाद पुलिस प्रशासन और न्यायपालिका क्या जवाब देती है। ये मामला पूरी तरह से जातिगत अपमान का है, जिसकी जांच होनी ही चाहिए.. अब देखना ये होगा कि क्या सरकार इस पर कोई फैसला लेती है।



