Gujarat news: हाल ही में, गुजरात के साबरकांठा से एक चौंकाने वाली और दुखद खबर सामने आई है। जहाँ जाति-आधारित भेदभाव से तंग आकर, एक गाँव के दलित समुदाय ने रेजिडेंट एडिशनल कलेक्टर को एक पत्र सौंपा है, जिसमें कहा गया है कि यदि दबंगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई नहीं की गई, तो वे सभी अपने पुश्तैनी गाँव से पलायन कर जाएँगे।
जातिगत भेदभाव के कारण दलितों का सामूहिक पलायन
आज भी, गाँवों और छोटे कस्बों जैसे इलाकों में, दलितों को जाति-आधारित भेदभाव, दबंगों द्वारा किए जाने वाले अत्याचारों और शारीरिक हिंसा का सामना करना पड़ रहा है; ये उत्पीड़क अपने कृत्यों को अंजाम देने में ज़रा भी हिचकिचाहट नहीं दिखाते और पूरी तरह से बेखौफ़ होकर घूमते हैं। हाँ, इसका एक जीता-जागता सबूत गुजरात के साबरकांठा के एक गाँव में देखने को मिला है… एक तरफ देश के प्रधानमंत्री खुद को पिछड़ा कह कर दलितों और पिछड़ो का सांत्वना हासिल करने की कोशिश करते रहते है तो वहीं उनके ही गृह राज्य में दलितो की स्थिति इतनी बद से बदतर हो गई है कि वहां पूरा दलित समाज सामूहिक पलायन कर रहा है।
दरअसल ये हैरान करने वाली खबर साबरकांठा जिले (Sabarkantha District) के तलोद तालुका (Talod Taluka) के रूपल गांव (Rupal Village) की है, जहां अनुसूचित जाति (scheduled caste) से आने वाले ग्रामीणों ने हिम्मतनगर जिला कार्यालय (Himatnagar District Office) में रेजिडेंट एडिशनल कलेक्टर (Resident Additional Collector) को एक ज्ञापन दिया है।
दबंगो को कानून का भी डर नहीं
जिसमें उन्होंन अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि कैसे उन्हें जातिगत रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है..उन पर ऐसे ऐसे निय़म लगाये जा रहे है जो संवैधानिक रूप से गलत है लेकिन दबंगो को कानून का भी डर नहीं है और होगा भी क्यों… जब वो ही उनकी रक्षा कर रही है। दरअसल पीड़ितों ने खुलासा किया है कि अब तक करीब 6 अर्जी दी गई है लेकिन किसी भी पर कोई कार्यवाई नहीं हुई।
हालांकि इस मुद्दों को बातचीत से भी सुलझाने की कोशिश की गई थी लेकिन मामला और बद से बदतर हो गया। उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। अर्जी में पीड़ितो ने कहा कि अगर जल्द से जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वो सामूहिक रूप से अपने पैतृक गांव से पलायन कर जायेंगें। अब देखना ये होगा कि जिला में अर्जी देने के बाद इस मामले में आगे क्या होता है।



