संविधान निर्माता से राष्ट्र निर्माता तक, जानिए कैसे बाबासाहेब ने गढ़ा आधुनिक भारत का भाग्य – Father of India’s Constitution

Dr. B.R. Ambedkar, Dr. B.R. Ambedkar untold story
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Father of India’s Constitution: जिस जाति को कभी पढ़ना लिखना तो दूर… वेदो पुराणों की बातें भी अगर वो सुन ले तो उनके कानों में पिघला गर्भ शीशा डाल दिया जाता था,, क्योंकि वेदो पुराणों का वो ज्ञान केवल बाह्मणों के ही लिये जो होता था.. चाहे वो काबिल हो भी या नहीं..पद और ओहदा जाति के आधार पर तय होता थी.. कई सदियों तक यहीं रूढीवादी परंपराओं के नीचे दबे एक विशेष जाति ने अपनी जिंदगी गरीबी, लाचारी और भेदभाव के साथ गुजार दिया।

ऐसा लगता था कि जैसे उन लोगो ने भी ये मान लिया होगा कि वो इंसान की कैटेगरी में भी नहीं आते है.. वो उन मवेशियों के सामान है जो जंगलो में, ऐसे ही मरने के लिए छोड़ दिये जाते थे..लेकिन इस सोच को बदला एक महामानव ने।  जिसने इस ब्राह्मणी मनुवादी रूढीवादी सोच को न केवल बदला… बल्कि उन्होंने करीब 5000 साल पुरानी कुरिति को बदल कर रख दिया.. उन्होंन अपने दम पर अकेले  भारत की किस्मत लिखी थी.. जी हां, हम बात कर रहे संविधान शिल्पीकार भारत रत्न डॉ भीम राव अंबेडकर की… एक शुद्र जाति से होकर भी कैसे बदल दी उन्होंने किस्मत भारत की.. और क्या दिया उन्होंने भारत को.. जानेंगे इस लेख में..

शिक्षा के दम पर सब हासिल किया जा सकता है

हम सभी जानते है कि भारत में हिंदू धर्म वर्ण व्यवस्था पर चलती है, जिसके मुताबिक हिंदूओं के वेदों और पुराणों में चारों वर्णों के दायित्व, उनका ओहदा औऱ उनके कार्य बतायें गए है। शूद्र सेवा के लिए है तो ब्राह्मण धर्म कार्य और शिक्षा के लिए.. ये व्यवस्था हिंदू धर्म में सदियों से चली आ रही है… लेकिन विडंबना ये है कि कहीं भी ये नहीं कहा गया कि शूद्र शिक्षा हासिल नहीं कर सकते है.. लेकिन बाबासाहब के मुताबिक शिक्षा के दम पर ही केवल अपने दिमाग से संसार की सोच बदली जा सकती है। इसलिए दलितो को बराबरी करने के लिए, अपने लिए सम्मान और समानता हासिल करने के लिए शिक्षा अनिवार्य है।

जब आजादी का मतलब समझा

महात्मा गांधी जब 1915 में साउथ अफ्रीका से रंग भेद का आंदोलन जीत कर भारत लौटे तो वो एक जाने पहचाने शख्सियत बन चुके थे, और उन्होंने कांग्रेस का हाथ थाम लिया अंग्रेजो के खिलाफ भारत को आजाद कराने की लड़ाई में…. लेकिन उस दौरान बाबा साहब अमेरिका में थे, जहां उन्होंने आजादी का सही मतलब पहली बार देखा था,, जहां उन्हें उनकी जाति से नहीं उनकी शिक्षा से पहचाना जा रहा था। उन्हें जाति देखकर अलग थलग नहीं किया जा रहा था। बल्कि उनकी शिक्षा का सम्मान करके उन्हें समान समझा जा रहा था.. बाबा साहब को तब पहली बार अहसास हुआ कि सहीं मायने में गुलामी की बेड़िया तो जातिवाद के नाम पर जकड़ी है।

अंग्रेजो ने भले ही भारत को लूटा हो, कमजोर किया हो लेकिन उन्होंने भारत को काफी कुछ दिया भी.. रेल लाइन जिस पर आज भारत सरकार का एकाधिकार है.. वो अंग्रेजो की ही लाई हुई थी।बाबा साहब की दूरदर्शी सोच का नतीजा ही है भारत का रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया..उनकी पीएचडी की थीसिज रूपय की समस्या- इसकी उत्पत्ति और समाधान.. की ही देन है, जिसके कारण ये आइडिया जेनेरेट हुआ था कि एक ऐसी संस्थान होनी चाहिए जो भारत के अर्थव्यवस्था और मुद्रा नीति को कंट्रोल कर सकें, उनकी इस किताब के आधार पर ही आरबीआई का गठन हुआ.. जो आज भी भारत की अर्थव्यवस्था को बनाये रखने में अहम रोल निभा रही है।

महिलाओं को आजादी बाबा साहब ने दिलवाई

संविधान का निर्माण करने के रूप में तो हम सभी जानते है लेकिन इस बारे में बहुत कम लोग जानते है कि महिला हो या पुरुष..सबको समान समझने के लिए महिलाओ को उनके कई अधिकार देने की योजना भी बाबा साहब की थी। हिंदू कोड लॉ, जो महिलाओ को केवल उत्पीड़न से ही नहीं बचाता बल्कि वो उन्हें वो अधिकार देने के लिए थे जिससे वो पुरुष सत्तात्मक सोच से बाहर निकल कर आजादी से अपने लिए सोच सकती थी।

हालांकि बाबा साहब की इस सोच को तब नकार दिया गया था, लेकिन बाद में इस बिल को 4 हिस्सों में लाकर सरकार ने अपना क्रेडिट बनाया था, लेकिन सच नहीं छिपता.. महिलाओं को आजादी तो सहीं मायने में बाबा साहब ने ही दी थी। आज महिला भारत में जिस आजादी से जी रही… चांद तक जा रही है, पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर उन्हें टक्कर दे रही है.. ये बाबा साहब की ही दूरगामी सोच का नतीजा था।

बाबा साहब की देन धर्मनिरपेक्ष देश

बाबा समाज हमेशा से एक ऐसा समाज चाहते थे जहां जातिगत भेदभाव न हो.. लेकिन उनकी कोशिशों के बाद वो ये बदलाव नहीं ला पायें, बस फिर क्या था, उन्होंने उस धर्म को ही छोड़ दिया जो उन्हें इंसान होने की परिभाषा से ही अलग करता था। .. उन्होंने भारत को सबसे बड़ा धर्म निरपेक्ष देश बनाया.. उन्होंने एक ऐसे समतावादी , सामाजिक न्याय , और मौलिक अधिकारों को भारत के लोकतंत्र में मुख्य नींव में रख दिया जिससे भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बन गया।

उन्होंने तमाम भारतीयों को बचाने के लिए भारत को एक हिंदू राष्ट्र नहीं बनने दिया। सच कहें तो भले ही बाबासाहब की आज भी एक तथाकथित समाज अवहेलना करता हो.. लेकिन ये बाबा साहब की देन है जो आप एक धर्मनिरपेक्ष देश में रहते है। जहां ताकत आम लोगो के हाथों में है.. वर्ना तो देश कब का फिर से ब्राह्मणों का गुलाम हो गया होता.. और फिर से मनुवादी कानून लागू हो गया होता.. सहीं मायने में बाबा साहब ने ही भारत की तकदीर बदली.. और करोड़ो भारतीयों की भी।

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