Top 5 Dalit news: ऐसा क्यों है कि जब उत्पीड़न करने को बात होती है, किसी को निशाना बनाना हो तो सबसे पहले दलितों की बहु बेटियों को निशाना बनाया जाता है, दलितों के साथ उत्पीड़न करना तो सदियों से चला आ रहा है, लेकिन उनकी घरो की बेटियों को भी नहीं बख्शा जाता है। जो देश की लचर कानून व्यवस्था पर करारा तमाचा जड़ने जैसा है। फिर भला दलित जायें तो जायें कहाँ। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाले घटनाओं के बारे में जानेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है, जो देश में दलित समुदाय की वास्तविक स्थिति से रूबरू कराते है।
राजधानी दिल्ली में दलित महिला के साथ बर्बरता
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला भारत की राजधानी दिल्ली से है जहां एक दलित लड़की के साथ लव जिहाद करने के साथ साथ मानवता की सारी हदें पार कर दी गई है। 23 साल को दलित महिला ने जामिया नगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराते हुए खुलासा किया कि नवंबर 2021 में सोशल मीडिया पर उसकी उसकी मुलाकात साहिल नाम के व्यक्ति से हुई थी, दोनो की दोस्ती बढ़ी तो वो उससे मिलने के लिए मार्च 2022 में बाटला हाउस के एक घर में गई थी, लेकिन साहिल ने वहां उसका उत्पीड़न किया और वीडियो बना लिया।
जिसे बाद वो उसने लगातार धमकी देते हुए कई बार बलात्कार किया.. लेकिन कुछ समय के बाद वो पीड़िता को मेरठ ले गया, जहां पहली बार उसे पता चला कि आरोपी मुसलमान है औऱ उसका असली नाम फहीम है। पीड़िता ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि 27 मई, 2022 को उसे बंदूक की नोक पर उसका जबरन अगवानपुर के एक मदरसे में धर्म परिवर्तन कराया गया, और फहीम ने उससे शादी की थी, लेकिन वो पीड़िता को लगातार टॉर्चर करता रहा। यहां तक कि फहीम के पिता और उसके कई रिश्तेदारों ने उसके साथ बलात्कार भी किया., पीड़िता की एक बेटी है, जिसे वो लोग हमेशा जान से मारने की धमकी देते है।
उसने ये भी खुलासा किया कि फहीम अवैध हथियारों की अदला बदली करता है। फहीम अक्सर किसी न किसी मामले में जेल में रहता है और अभी भी वो किसी मामले में जेल में है। पीड़िता जनवरी 2025 में बेटी के साथ भागकर बल्लभगढ़ आ गई, जिसके बाद फहीम उसे लगातार परेशान कर रहा है। पीड़िता के इस सनसनीखेज खुलासे के बाद महिला सुरक्षा को लेकर फिर से सवालियां निशान लगने लगे है। मुख्य आरोपी अभी जेल में है, लेकिन पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है, ताकि पीड़िता के साथ जिस जिस ने अन्याय किया है उन सभी को सलाखों के पीछे पहुंचाया जायें।
मध्य प्रदेश के वीदिशा में पुलिस की दादागिरी
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के विदिशा से है, जहां कानून के रक्षक ही भक्षक बन कर अब जाति के नाम पर दलितो का उत्पीड़न करने से बाज नहीं आ रहे है। ये मामला विदिशा के रायसेन के संग्रामपुर का है। पीड़ित उधम सिंह अहिरवार समेत अहिरवार समाज के लोगो ने विदिशा पुलिस की डायल 112 में तैनात कांस्टेबल दीपक गुर्जर के खिलाफ विदिशा एसपी के पास शिकायत दर्ज कराई है। पीड़ित ने बचाया कि कुछ दिनों पहले उसकी और उसकी पड़ोसी के कुछ मवेशी चोरी हो गये थे।
जिसकी जानकारी उन्होंने 112 पर दी थी, कुछ दिनो के बाद खबर मिली कि उनके पशु विदिशा के पशु बाजार में बेचे जा रहे है, जिसकी खबर सुनकर पीड़ित वहां पहुंचे लेकिन वहां पर पुलिस वाले खुद ही पशुओं की खरीद फरोख्त की बात कर रहे थे। जिसका एक युवक ने वीडियो भी बनाया, लेकिन इससे विवाद हो गया औऱ पुलिस आरक्षक दीपक गुर्जर ने युवक को पीटा औऱ जब पीड़ित ने विरोध किया तो उसे भी थप्पड़ मारे गए और लाठी से बाजार में दौड़ा-दौड़ाकर पीटा।
फिर गंभीर हालत में जबरन थाने ले जाया गया जहां उनकी जाति पूछी गई, इसके बाद उसे जातिसूचक गालियां दी गई, प्यास लगने पर पानी मांगा तो जबरन पेशाब पिलाने की कोशिश की गई। उसे थाने में भी बुरी तरह से पीटा गया जिससे वो बेहोश हो गया। जब ये मामला सामने आया तो दीपक गुर्जर को फिलहाल के लिए सस्पेंड कर दिया गया है, और मामले की जांच शुरु कर दी गई है। हैरानी की बात है कि जिस पुलिस को दलितो के हक की रक्षा करनी चाहिए वहीं उनके लिए सबसे बड़ा खतरा बन गए है।
मथुरा में फिर से दलितो के बारात पर जातिवादियों का हमला
3, दलितो से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के मथुरा से है, जहां जातिवाद इतनी गहराई तक भरा हुआ है कि दबंगो ने न केवल दलित समुदाय की बारात चढ़त में जमकर पत्थरबाजी की, बल्कि उनका बीच बचाव करने आये पुलिस वालो को भी नहीं बख्शा.. उन पर पत्थर बरसाएं। ये मामला मथुरा के हाइवे थाना के अंतर्गत आने वाले गांव नरहौली का है। पीड़ित परिवार ने बताया कि उनके घर में दो भाईयो अशोक कुमार और कुलदीप कुमार की शादी थी और रात 11 बजे नरहोली के भरतपुर चौराहे से बारात निकाली जा रही थी।
इस दौरान एक दूल्हे ने बाबा साहब अंबेडकर की तस्वीर ले रखी थी, लेकिन मथुरा भरतपुर रोड के पास पहुंचने के बाद वहां मौजूद राजपूत समाज के लोगो ने बाबा साहब की तस्वीर को लेकर चलने का विरोध किया और बारात को वहां से न जाने की बात कहीं, लेकिन जब बारातियों ने इंकार कर दिया तो राजपूत समाज के लोगो ने बारातियो पर पथराव करना शुरू कर दिया।
जिसके बाद इसकी जानकारी हाइवे थाना को दी गई, मगर मौके पर पहुंचे पुलिस की टीम को भी नहीं बख्शा गया और उन पर भी पथराव किया गया, जिससे दूल्हे के पिता के साथ साथ हाइवे थाना प्रभारी शैलेंद्र सिंह, और तखरखी चौकी इंचार्ज नीतिन राठी भी बुरी तरह से घायल हो गये है। इसके अलावा सदर थाने के एसडीएम आदेश कुमार को भी गंभीर चोट लगी है। इस मामले में अब तक 16 लोगो के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है, हालांकि अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया है। मामले की जांच जारी है, अब देखना ये होगा कि पुलिस वालों के साथ ऐसी हरकतें करने के बाद क्या जातिवादियों को यू हीं जाने दिया जायेगा।
क्रोकरॉच जनता पार्टी के संस्थापक अब निशाने पर
4, दलितो से जुड़ा अगला मामला अभी हाल ही में सोशल मीडिया पर छाने वाली नवनिर्वाचित पार्टी क्रोकरॉच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके को लेकर है, जिन्होंने जब से खुलासा किया है कि वो एक दलित जाति से है, तब से उन पर लगातार जातिगत हमले शुरु हो गए है, लोगो की मानसिकता देखियें, कल तक जिस पार्टी के जेन जी का सबसे बड़ा रैव्यूलेशन कहा जा रहा था, आज वहीं पार्टी जातिगत एजेंडे से भरी हुई कहलाने लगी है। जो केवल यहीं साबित करती है कि जब किसी मुद्दे में दलित आ जाये तो वो मुद्दा फिर समाज का नहीं बल्कि केवल दलितो का मुद्दा बन जाता है।
अमेरिका के बोस्टन विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले अभिजीत दिपके ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की भारतीय युवाओ को लेकर “तिलचट्टे” और “परजीवी” जैसी की गई टिप्पणी के बाद दिपके ने ये आंदोलन शुरु किया था, लेकिन जब इस आंदोलन को लेकर कटाक्ष करने लगे तो दिपके ने खुलासा किया वो एक दलित है, उनका कोई गलत एजेंडा नहीं है, बस फिर क्या था।
उन पर दलित विरोधी कटाक्ष शुरु हो गए, जबकि मोहुआ मोइत्रा, कीर्ति आजाद जैसे नेता भी सीजेपी को सपोर्ट कर रहे है, लेकिन अब सवाल ये है कि कल तक जिस पार्टी को लोग वास्तविक रूप से राजनीति में आते हुए देखना चाहते थे अब वो उससे दूर भाग रहे है.. वजह साफ है कि भारत में जातिगत भेदभाव इस कदर चिपका हुआ है कि किसी दलित को वो उंचे उठते देखना ही नहीं चाहते है, चाहे वो सोशल मीडिया पर ही क्यों न हो। वैसे आपको क्या लगता है क्या अभिजीत दिपके को वास्तविक रूप से इस पार्टी को लाना चाहिए।
बलरामपुर में 11 साल बाद मिला दलित को न्याय
5, दलितो के जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के बलरामपुर से है, जहां एक दलित का घर उजाड़ने और दलित परिवार को जातिसूचक गालियां देकर अपमानित करने के मामले में करीब 11 सालो के बाद न्याय मिला। ये मामला बलरामपुर के पचपेड़वा क्षेत्र का है, जब 2015 में पीड़ित अवधराम ने पुलिस को तहरीर दी थी कि वो काफी सालो से एक आबादी वाली जमीन पर रह रहे थे लेकिन तत्कालीन प्रधान ने पीड़ित को जमीन खाली करने का आदेश दे दिया.. वो भी बिना कारण के.. पीड़ित ने जब इसका विरोध किया तो वो कुछ लोगो के साथ पहुंच गया और जबरन घर खाली करा कर छप्पर, थूनी और घरेलू सामान तोड़ फोड़ दिया.. इस दौरान उन लोगो ने पीड़ित को जातिसूचक गालियां भी दी।
तब से ये मामला अदालत में चल रहा था, लेकिन आखिरकार 11 साल बाद पीड़ित को न्याय मिला औऱ अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया। इस मामले में पहले ही दो आरोपी मलखे और बब्लू दोषी करार दिये जा चुके है और तीसरा आरोपी भुर्रे यादव को भी दोषी करार दिया गया है। कोर्ट ने तीसरे आरोपी को 6 महीने की probation पर छोड़ने का आदेश दिया है। लेकिन हैरानी की बात है कि पीड़ितो को उनका आशियाना अब तक नहीं मिला। तो क्या उनका आशियाना उन्हें मिलेगा या नहीं इसकी जवाबदेही किसकी होगी।



