Azad on Casteism: चंद्रशेखर आजाद का सवर्ण समाज पर बड़ा हमला, बोले- वोट के लिए भाई, चुनाव बाद पराया

Chandrashekhar Azad
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Azad on Casteism: हाल ही में भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आज़ाद (Bhim Army Chief Chandrashekhar Azad) से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई, जिसका विडियो सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हो रहा है। जिसमें उन्होंने एक बार फिर उन लोगों को निशाना बनाया और उनकी कड़ी आलोचना की जो खुद को कट्टर हिंदू कहते हैं और बहुजन समुदाय के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हैं।

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चंद्रशेखर आजाद ने सवर्ण समाज को घेरा

आपने अक्सर देखा और सुना होगा कि भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आज़ाद हमेशा किसी न किसी विवाद में फंसे रहते हैं, चाहे वह उनकी कथित एक्स-गर्लफ्रेंड रोहिणी घवारी से जुड़ा मामला हो या दलितों के खिलाफ भेदभाव और हत्या का मामला; वह लगातार सुर्खियों में बने रहते हैं। लेकिन हाल ही में  उत्तर प्रदेश के नगीना से सांसद चंद्र शेखर आजाद को लेकर है। आजाद इस वक्त ऐसा नेता बन चुके है जिनमें पूरे दलित समाज को अपना मसीहा नजर आता है। अभी हाल ही में आजाद ने खुद को कट्टर हिंदू कहने वाले और बहुजन समाज के खिलाफ आंदोलन करने वाले के खिलाफ जमकर निशाना साधा है।

आजाद ने कहा वैसे तो कुछ लोग कहते हैं कि सभी हिंदू भाई भाई हैं लेकिन जैसे ही चुनाव खत्म होते हैं, वह भाईचारा खत्म हो जाता है, और जातिवादी सोच फिर से सामने आ जाती है। इतना ही नहीं उन्होंने आगे कहा जब SC-ST-OBC के अधिकारों की बात आती है, उनके हितों की बात आती तो यही कथित हिंदू भाई दलितों बहुजनों के खिलाफ आंदोलन चलाते हैं।

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चंद्रशेखर ने कहा भाई से तो दुशमन अच्छे

ऐसे भाई से तो दुश्मन अच्छे है क्योंकि इसे तथाकथित भाई बहरूपिए बनकर हमारा गला काट रहे हैं। चुनाव से पहले भाई बताते हैं और फिर हमारे सिर पर पेशाब करते हो और चोटियां काटते हो” फिर दलित समाज कैसे इनका भाई हो गया। ये केवल राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए होने वाला प्रपंच है, जिससे अब बहुजन समाज को जागने को जरूरत है। उन्होंने ये भी कहा कि दलितों को “भाई” कहना सिर्फ़ वोट पाने का एक ज़रिया है।

आज़ाद ने सवाल किया कि जो लोग खुद को “कट्टर हिंदू” कहते हैं, वे दलितों के साथ अन्याय होने और विरोध प्रदर्शन होने पर चुप क्यों रहते हैं या उनके खिलाफ क्यों खड़े हो जाते हैं। तो कैसे समाज में एकता होगी कैसे दलित समाज को न्याय मिलेगा। इसके अलवा आपको बता दें, वैसे आजाद का ये बयान कहीं न कहीं दलित समाज को जागरूक करने के लिए उठाया गया बेहतर कदम है, जो बस कोशिश कर रहे है कि बहुजन समझ मनुवादी हिंदुओं के हाथों की कठपुतली बन कर न रहे।

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