Top 5 Dalit news: कहते है कि जब कोई कमजोर आगे बढ़ने लगता है, वो खुद को और अपने समाज को मजबूत करने लगता है तब कुछ लोग हमेशा उसे नीचे गिराने की कोशिश में लगे रहते है, ऐसा ही कुछ भारत में दलित नेताओं के साथ हो रहा है.. दलितों को कभी भी मजबूत स्थिति में देखना ही नहीं चाहते है मनुवादी लोग..तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितो के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे, जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
नगीना में आजाद के खिलाफ करणी सेना
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, जैसे जैसे उनकी लोकप्रियता बड़ रही है, मनुवादियों के पेट में दर्द हो रहा है तो वहीं दलितों के लिए वो पहली पसंद बनते जा रहे है। जी हां, अभी हाल ही में विवादित वकील अनिल मिश्रा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो डाला है, जिसमें नगीना में ब्राह्मणों ने एक सम्मेलन किय़ा है। जहां वो नगीना के सांसद आजाद को नकली सनातनी कहते हुए ऐलान कर रहे है कि जो हिंदू धर्म के विरोध में बात करेगा वो सनातनी नहीं हो सकता है। रावण नाम रखने से कोई रावण जैसा नहीं हो जाता। ब्राह्मणों का रावण महाप्रतापी था।
आजाद ने रावण नाम रख कर उन्हें बदनाम करने की कोशिश की.. 2027 में उसका जवाब जरूर मिलेगा.. वहीं दूसरी तरफ अपनी जनता पार्टी के मुखिया स्वामी प्रसाद मोर्य ने आजाद पर लगने वाले संगीन आरोपो का करारा जवाब देते हुए कहा कि आजाद पर आरोप लगते है कि वो BJP की सेकेंड विंग का हिस्सा है उनके लिए काम करते है, लेकिन सच तो ये है कि चन्द्रशेखर आजाद की बढ़ती छवि से कुछ लोगों को दर्द हो रहा है। जिनका भविष्य अंधेरे में लग रहा होगा, वो ऐसी बात करते हैं। क्या पता आरोप लगाने वाले ही सेकेंड विंग का हिस्सा हो..और जानबूझ कर एक मजबूत नेता की छवि बिगाड़ी जा रही है। हैरानी की बात है कि आजाद की छवि धीरे धीरे काफी मजबूत हो रही है.. जो इशारा है कि 2027 में आजाद समाज पार्टी की तरफ से कुछ तो बड़ा होने वाला है।
आंध्र प्रदेश में दलितो के साथ अन्याय
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला आंध्रप्रदेश के अकिनाडु से है, जहां एक दलितों के देवी के मंदिर को जबरन राम मंदिर में बदलने की कोशिश को लेकर दलित संगठन और तेलुगू देशम पार्टी के बीच तनाव बढ़ गया है। ये तनाव तब शुरु हुआ जब 7 मार्च को आंध्र प्रदेश के डिप्टी स्पीकर रघु राम कृष्ण राजू पश्चिम गोदावरी जिले के अकिनाडु के पेडापेटा इलाके के दौरे पर गए थे, जहां उन्होंने ‘रामालयम’ (राम मंदिर) बनाने की एक औपचारिक घोषणा की थी, लेकिन 27 मार्च को गांव के दलितो के ही ‘गोंथेनम्मा’ मंदिर को ‘रामालयम’ (राम मंदिर) में जबरन बदलने की कोशिश की, जिसमें आरएसएस भी शामिल है।
लेकिन उससे दलितो का गुस्सा भड़क गया औऱ वहां हिंसा हो गई.. पुलिस ने जब इसकी गहीनता से जांच की तो पाया कि ये स्थान पहले मंदिर नहीं बल्कि एक सराय था, लेकिन कुछ समय बाद गोंथेनम्मा मंदिर में तब्दील कर दिया.. और दलितो के लिए यहीं पूजनीय स्थान रहा है, लेकिन अब उसके जर्जर होने का हवाला देकर मंदिर को राम मंदिर बनाने की कोशिश की जा रही है। नागरिक अधिकार समूह ह्यूमन राइट्स फोरम (HRF) की रिपोर्ट के मुताबित मंदिर की रक्षा कर रहे दलितो और बाकि समुदाय के बीच हुई झड़प में 3 लोग घायल हुए लेकिन गिरफ्तारी केवल दलितो की ही हुई है।
हालांकि पुलिस कोशिश कर रही है कि वो मध्यथा से मामले को शांत कराये.. वहीं अमलापुरम के पूर्व सांसद GV हर्षा कुमार ने कहा कि सभी समुदाय के बात करके मंदिर का निर्माण कराया जाये ताकि हिंसा न हो.. हैरानी की बात है कि राम मंदिर बनाना है तो अलग जमीन पर बना सकते है लेकिन दलितों का शोषण करने का कोई मौका नहीं छोड़ा जाता।
बिहार के सांसद पप्पू यादव का बड़ा ऐलान
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला बिहार से है, जहां अमित शाह के नक्सलवाद को खत्म करने को लेकर कांग्रेस नेता और सांसद पप्पू यादव ने उन्हें घेरते हुए पूछा कि क्या सच में सरकार नक्सलवाद को खत्म कर रही है या दलित आदिवासियों को उनके ही घर से बेघर करने की बड़ी साजिश रच रही है। सभी जानते हैं कि जंगल पहाड़ दलितों और आदिवासियों का घर है, जिन्हें बचाने के लिए नक्सली है, लेकिन सरकार नक्सलियों का खात्मा करने के नाम पर दलितों और आदिवासियों को ही खत्म कर रही है।
वजह साफ है सरकार नहीं चाहती कि ये कभी आगे बढ़े, इसलिए उनकी जीवन की धारा ही छीन रहे है। पप्पू यादव ने सीधा बीजेपी पर पलटवार किया है, की कांग्रेस ने दलितों आदिवासियों के हक को रक्षा की है लेकिन बीजेपी ने उन्हें घर से बेघर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। हमारे जंगलों और उनकी प्राकृतिक संपदा को तो लालची लोगों की गिद्ध की नजरों से बचाने में दलित और आदिवासियों ने जान की बाजी लगाई लेकिन अब उन्हें नक्सली कह कर मारा जा रहा है। पप्पू यादव के इस पलटवार से कहीं न कहीं बीजेपी के दावों का पर्दाफाश हो रहा है जिसमें वो दावे करती है कि वो दलितों आदिवासियों के भले के लिए काम कर रही है।
कर्नाटक में ऑनर किलिंग पर बड़ा फैसला
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला कर्नाटक से है, जहां जाति के नाम पर बढ़ रहे ऑनर किलिंग के मामले को लेकर सरकार ने एक सख्त कदम उठाया है, जिससे न केवल अंतरजातीय शादी करने वालों को सुरक्षा मिलेगी..बल्कि अगर शादीशुदा जोड़े के साथ किसी भी तरह की अनहोनी होती तो सरकार आरोपियों के लिए नए सजा के प्रावधान ले कर आई है। 24 मार्च को विधानसभा में ‘कर्नाटक प्रोहिबिशन ऑफ क्राइम्स इन द नेम ऑफ ऑनर, ट्रेडिशन एंड फ्रीडम ऑफ चॉइस इन मैरिज बिल, 2026’ के नाम से एक बिल पारित करने के लिए लंबी बहस हुई थी।
जिसे अब पास कर दिया गया.इस बिल को इवा नम्मावा बिल नाम दिया गया है। इस बिल में कई तरह के प्रावधानो को जड़ा गया है, जिसमें सबसे पहले जो भी कपल शादी करते है उन्हें 6 घंटे के अंदर पुलिस की सुरक्षा मुहैया कराई जायेगी.. साथ ही ऑनर किलिंग के नाम पर हत्या करने या कपल को नुक्सान पहुंचाने की कोशिश के मामले में अब 5 साल से लेकर आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान बनाया गया है।
साथ ही इस तरह के जघन्य अपराधों के लिए कोई जमानत नहीं होगी..अंतरजातीय दंपितयों के लिए सरकार विशेष हेल्पलाइन मुहैया करायेगी, और अलग के आश्रय दिया जायेगा, ताकि उन्हें प्रताड़ित न किया जा सकें। इस कानून के आने के बाद बहस छिड़ गई है.. ऑनर के नाम पर किलिंग को लेकर क्या वाकई में हत्यायें रूकेंगी.. आपको क्या लगता है।
अलीगढ़ में राशन लेने गई महिला के साथ बर्बरता
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला यूपी (UP) के अलीगढ़ (Aligarh) से है, जहां दलितों के लिए सरकारी योजनाओ का लाभ पहले ही पूरा मिलना आसान नहीं है ऊपर से जब वो अपने हक के लिए आवाज ऊठाते है तो बदले में मिलती है उन्हें गालियां, मारपीट और जान से मारने की धमकी। ताजा मामला अलीगढ़ जनपद के लोधा थाना क्षेत्र के गांव बरौठ छजमल का है, जहां पीड़ित दलित महिला नीतू देवी ने पुलिस को तहरीर दी है कि 25 मार्च की सुबह वो राशन लेने गई थी, लेकिन उसे पहले तो राशन कम दिया गया, लेकिन जब नीतू ने विरोध किया तो दुकानदार प्रेमचंद काफी नाराज हो गया, उसने पीड़िता को आवाज उठाने के लिए जातिसूचक गालियां दी।
उसे कई चांटे मारे.. इतना ही नहीं उसके साथ कई और लोगो ने मिलकर पीड़िता को धमकी दी कि अगर अनाज कम देने की शिकायक उसने कहीं भी की तो वो उसे और उसके पूरे परिवार को राइफल से गोली मार देंगे। पीड़िता को डर है कि कहीं उनके खिलाफ आवाज उठाने के लिए उसे या उसके परिवार को नुकसान न पहुंचाया जाये,, वहीं पुलिस ने मामले की संगीनता को समझते हुए मामला दर्ज कर लिया है और आरोपियों की तलाश शुरु कर दी है। हैरानी की बात है हमेशा से दलितों से बेगारी कराने की मानसिकता रखने वाले आज भी उनका हक खाने से बाज नहीं आते..ऐसे लोगो के साथ क्या होना चाहिए आप खुद ही बतायें।



