324 BNS in Hindi: हर दिन, हमें अनगिनत रिपोर्टें मिलती हैं – चाहे अखबारों में हों या हमारे आस-पास – जैसी कि हमने कई बार सुनी है – कि कोई पड़ोसी जानबूझकर या शरारत करके अपने पड़ोसी के घर के चारों ओर दीवार बना रहा है ताकि उसकी प्रॉपर्टी को नुकसान हो जाये। तो ऐसे मामले में BNS की कौन की धारा लगती है और ऐसे मामले में किस तरह की सज़ा होगी? तो आपको बता दें, ऐसा करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 324 लागू होती है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।
Also Read: BNS Section 320: लेनदारों को धोखा देने की नीयत से संपत्ति छिपाना अब पड़ेगा भारी
धारा 324 क्या कहती है? BNS Section 324 in Hindi
जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 324 क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 324 यह मुख्य रूप से ऐसे व्यक्ति पर लागू होता है जो बेवजह नुकसान पहुंचाने के इरादे से जानबूझकर प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाना या उसमें बदलाव करना।
Also Read: BNS Section 321: लेनदारों के साथ धोखाधड़ी अब पड़ेगी महंगी, जानिए क्या है नया कानून
BNS section 324 Important points
- आम नुकसान: 6 महीने तक की जेल या जुर्माना।
- सरकारी/लोकल अथॉरिटी की प्रॉपर्टी को नुकसान पहुचाने पर 1 साल तक की जेल हो सकती है।
- वही अगर ₹20,000 से ₹1 लाख के बीच का नुकसान होता है तो आरोपी को 2 साल तक की जेल हो सकती है और 5 साल तक की जेल।
- इसके अलवा अपराधी मौत/चोट का डर पैदा करता है तो उसे 5 साल तक की जेल और जुर्माना दोनों हो सकता है।
BNS section 324 example
मान लीजिए गोविंद नाम के किसी व्यक्ति ने जानबूझकर किसी की प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाया है या शरारत की है और विरोध करने पर उसे जान से मारने की धमकी दी है। तो पकड़ने जाने पर अपराधी पर BNS की धारा 324 लागू होती है।
बीएनएस धारा 324 की और सजा
इसके अलावा, BNS की धारा 324 धोखाधड़ी पर भी लागू होती है। यह तब लागू होती है, जब कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी दुसरे आदमी की प्रॉपर्टी को नुकसान पहुँचता है। तो इस सेक्शन के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को 6 महीने तक की सज़ा जिसे बढाकर 5 साल तक किया जा सकता है या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है। इस अपराध में जमानत मिलना भी काफी मुश्किल हैं।



