घर में घुसकर हमला? जानिए BNS की धारा 333 में क्या है सजा – BNS Section 333

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333 BNS in Hindi: हम हर दिन अखबारों में ऐसी खबरें पढ़ते हैं जब कोई अचानक से पूरी तैयारी के साथ आपके घर में मारपीट, हत्या या चोरी के इरादे से घुस आता है और डराने धमकाने लगता है। तो कभी सोचा है कि ऐसे मामले में BNS की कौन की धारा लगती है और ऐसे मामले में किस तरह की सज़ा होगी? तो आपको बता दें, ऐसा करने पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 333 लागू होती है। तो चलिए आपको इस लेख में बताते हैं कि ऐसा करने पर कितने साल की सजा का प्रावधान है और बीएनएस (BNS) में इसके के बारे में क्या कहा गया है।

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धारा 333 क्या कहती है? BNS Section 333 in Hindi

जैसा कि आप जानते हैं कि अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग अधिनियम और दंड हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बीएनएस (BNS) की धारा 333  क्या कहती है, अगर नहीं तो आइए जानते हैं। भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 333 उस व्यक्ति पर लागू होती है जो किसी के घर में बिना परमिशन के प्रवेश करता है, और पहले से ही हमला करने, नुकसान पहुँचाने या डराने-धमकाने के लिए तैयार होता है।

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BNS section 333 Important points

  • यह किसी के घर की सुरक्षा और निजता के उल्लंघन से संबंधित है, चाहे वह ज़बरदस्ती घर में घुसकर किया गया हो या घर के किसी भी हिस्से में छिपकर।
  • बिना इजाज़त के किसी के घर में ज़बरदस्ती घुसना।
  • किसी के घर का दरवाज़ा या खिड़की तोड़कर घुसना।
  • डरा-धमकाकर या डरा-धमकाकर घर में घुसने की इजाज़त लेना।
  • चोरी करने के इरादे से घर में घुसना।
  • किसी को चोट पहुँचाने के इरादे से घुसना।
  • आपको बता दें, यह धारा पहले IPC की धारा 452 के अंतर्गत लागू  होती थी,लेकिन अब इसे BNS की धारा 333 के नये नियमो के साथ लागू  किया हैं।

BNS section 333 example

मान लीजिए, आपके पड़ोस में रहने वाला कोई व्यक्ति—यह जानते हुए भी कि आप उसे अपने घर में प्रवेश की अनुमति नहीं देंगे और वो जबरदस्ती घर में घुस आता है, और ऐसा करने के पीछे उसका पहले से ही यह इरादा होता है कि वह आपको डराएगा, धमकाएगा या नुकसान पहुँचाएगा। ऐसी स्थिति में, यदि वह व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो BNS की धारा 333 के तहत उसके खिलाफ यह धारा लागू होती है।

बीएनएस धारा 333 की और सजा

इसके अलावा, BNS की धारा 333 यह तब लागू होती है, जब कोई व्यक्ति अपराध करने के इरादे से किसी के घर में जबरन घुस आता है। तो इस सेक्शन के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को crime करने पर अधिकतम 7 साल की कैद और जुर्माना होता है। आपको बता दें, यह एक गैर-संज्ञेय (non-cognizable) अपराध है, इसलिए पुलिस को जाँच के लिए मजिस्ट्रेट की अनुमति चाहिए होती है। इस अपराध में जमानत मिलना भी काफी मुश्किल हैं। वही पुलिस इस अपराध के लिए बिना वारंट के भी आरोपी को गिरफ्तार कर लेती है।

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