History TV18 CNN-IBN Poll: जुलाई 2025 के दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता की लिस्ट जारी हुई थी और मॉर्निंग कंसल्ट के अनुसार पिछले 4 सालों की ही तरह 2025 में भी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 75% रेटिंग के साथ पहले स्थान पर चुने गए थे। ये तो आज के लोकप्रिय नेताओं की लिस्ट थी, जो देश पर शासन कर रहे है लेकिन अगर हम आपसे ये कहे कि साल 2012 भी एक ऐसा सर्वेक्षण किया गया था जिसमें उन नेताओं के बारे में पूछा गया था जो ऑल टाइम सबके फेवरेट है।
तो शायद किसी को यकीन ही न हो, लेकिन दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेताओं में बाबा साहब आंबेडकर पहले स्थान पर चुने गए थे, जबकि पंडित जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी जैसे दिग्गज नेता भी इस लिस्ट में थे। अब सवाल ये है कि बाबा साहब को इतना पसंद क्यों किया और क्यों बाकी नेताओं की पूछ कम हो गई।
क्या था सर्वे
दरअसल साल 2012 में हिस्ट्री टीवी 18 ने भारत के अब तक के सबसे लोकप्रिय नेता के बारे में सर्वे कराया था, जिसमें करीब 2 लोगो ने भारत रत्न बाबा साहब अंबेडकर को सबसे लोकप्रिय शख्सियत चुना था, यानि की ये तो बात साफ है कि आज के युवाओ के लिए बाबा साहब एक महान और दूरदर्शी व्यक्ति थे, जिन्होंने देश को न केवल एक महान संविधान दिया था बल्कि उन्होंने समाज सुधार की दिशा में हो या फिर देश की इकॉनामी को मजबूत करने के लिए बताई गई रणनीति हो, सभी देश की तरक्की के लिए एक व्यापक और क्रांतिकारी उपाय रहे थे, जिसने बाबा साहब की लोकप्रियता को बढ़ावा दिया।
बाबा साहब का ज्ञान
बाबा साहब को शिक्षा हासिल करने के लिए कितना संघर्ष करना पड़ा था, उसके बारे में की बार बात होती है, लेकिन उस शिक्षा के कारण ही बाबा साहब को सम्मान भी मिला था। हालांकि ये बेहद दुख की बात है कि भारत की जातिवाद प्रथा के कारण बाबा साहब का टैलेंट और उनके ज्ञान का सही और पूरा इस्तेमाल किया ही नहीं गया।
गुटबाजी के कारण उनके प्रस्तावों पर अक्सर बहस छिड़ जाया करती थी, जहां सोचिये बाबा साहब ने 1950 में हिंदू प्रसनल लॉ तो आधुनिकता के साथ हिंदू कोड बिल लाकर महिलाओं को सम्मान दिलाने की कोशिश की थी, लेकिन चुंकि ये काम बाबा साहब कर रहे थे, तब उन्हें पूरे संसद में भारी विरोध का सामना करना पड़ा, जिससे नाराज होकर बाबा साहब संसद से इस्तीफा देकर चले गए थे।
मजदूरो को बंधुआ मजदूरी से आजाद किया
वहीं इस बिल को बाद में तत्कालीन पीएम पंडित जवाहरलाल नेहरू चार अलग अलग हिस्सों में ले कर आए, जिसमें हिंदू विवाह अधिनियम 1955, हिंदू दत्तक ग्रहण और भरणपोषण अधिनियम 1956, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम 1956 औऱ हिंदू अल्पसंख्यक और संरक्षकता अधिनियम 1956 ले कर आये.. मतलब साफ है कि आईडिया बाबा साहब का औऱ क्रेडिट कांग्रेस की सरकार को.. इस कानून ने महिला शसक्तिकरण में अहम भूमिका निभाई थी।
केवल महिलाओ के लिए ही नहीं बल्कि मजदूर वर्ग के लिए भी बाबा साहब ने कुछ ऐसे कदम उठाये, जिसने उन्हें सम्मान से और इंसानो की तरह जीवन जीने के लिए प्रेरित किया, साफ शब्दों में कहें तो बाबा साहब ने मजदूरो को बंधुआ मजदूरी से आजाद किया था।
सामाजिक समानता के लिए लड़ाई लड़ी
उन्हें एक्ट्रा गुजारा भत्ता दिलवाना हो या एक दिन की छुट्टी, या फिर दिन के केवल 8 घंटे की काम.. ये सब तय करने वाले बाबा साहब ही थे। भले ही बाबा साहब दलितो के भगवान, उनके मसीहा कहलाते हो, लेकिन जब आप विश्लेषण करके देखेंगे तो उन्हों ने हर वर्ग, हर जाति की भलाई में काम किया है, लेकिन चुंकि उन्होंने सामाजिक समानता के लिए लड़ाई लड़ी थी, इसलिए उन्हें एक ऐजेंडे के तहत केवल दलितों का नेता बना कर पेश कर दिया गया, और सवर्ण लोगो को जानबूझ कर बाबा साहब की छवि इस तरह से दिखाई गई कि संविधान में उन्होंने केवल दलितों के लिए कदम उठाये थे।
जातिवाद के नाम पर उन्हें भड़काया
वो दलित नेता थे, जबकि सही मायने में भारत में केवल सुनी सुनाई बातों को ही सच मान लिया गया, जबकि सच्चाई का विश्लेषण कोई नहीं करना चाहता है। अगर वाकई में हमारी किताबों में बाबा साहब के कार्यों को सच्चाई के साथ पढाया जाये तो शायद ही कोई ऐसा होगा जो बाबा साहब को न पूजे। आज का युवा पढ़ा लिखा है, जोशिला है लेकिन जातिवाद के नाम पर उन्हें भड़काया जाता है। जो ऊंजी जाति का दंभ भरते है उनमें से कोई एक भी बाबा साहब के बराबर तक नहीं पहुंच सका।
ऐसे में कहते है न कि जब बराबरी नही कर पाये, तो उन्हें बदनाम ही कर दो। बस कुछ ऐसा ही एजेंडा चंद मुट्ठीभर जातिवादी मानसिकता के लोगो ने चलाया हुआ है। आप खुद विचार करके बताइये की क्या बाबा साहब के कार्यों और उनके ज्ञान के करीब कोई और है क्या.. जवाब आपको खुद पता है।



