Top 5 Dalit news: क्या आपने कभी सोचा है कि सदियों से ही आखिर क्यों कुछ मनुवादी दलित की शिक्षा के खिलाफ वही है। वजह साफ है अगर वो शिक्षित होंगे तो मनुवादियों की बेगारी कौन करेगा। शिक्षा सम्मान से जीने की प्रेरणा देती है, इसलिए उनसे वो सम्मान का हक ही छीन लिया जाएं, स्कूल कॉलेज में होने वाला भेदभाव भी इसी मानसिकता की देन है, जो दलितों और पिछड़ो को उनसे आगे बढ़ते देख नही सकते। तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाले घटनाओं के बारे में जानेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
सिद्धार्थनगर में दलित हिंदुओ को बनाया जा रहा मुसलमान
1, दलितो से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश से है..जहां एक तऱफ लव जिहाद के जरिए हिंदू लड़कियो को निशाना बनाने के मामलों में पहले से ही सरकार फेल हो रही है तो वहीं अब यूपी से बेहद ही सनसनीखेज खबर सामने आई है। दरअसल पैसों और नौकरी का लालच देकर अब मौलवी दलित युवकों को भी इस्लाम में कंवर्ट कर रहे है। ताजा मामला यूपी के सिद्धार्थनगर से सामने आया है, जहां पूर्व मंत्री सतीश द्विवेदी ने खुलासा किया है कि मिश्रौलिया थाना क्षेत्र के धोबाही गांव में पूर्व ग्राम प्रधान मौलवी गुलाम हुसैन, हदीसुल्लाह और फारूक पैसे का लालच और सरकारी लाभ का झांसा देकर दलित परिवारों को इस्लाम में परिवर्तित कर रहे है।
इतना ही नहीं विदेशों की कई कंपनी से धर्म बदलने वाले लोगो के खाते में पैसे आये है.. जो एक बड़ी साजिश की तरफ भी इशारा कर रहे है। मंत्री ने मांग की है कि इस मामले में निष्पक्ष जांच की जायें, ताकि भविष्य में किसी अनहोनी घटना को रोका जा सकें, साथ ही दलितो को बरगलाने के इस रैकेट पर भी शिकंजा कसें। हैरानी की बात है कि इन दलित हिंदुओ को ये तक नहीं पता कि देश का संविधान धर्म बदलते ही उनके दलित होने के सारे लाभ से वंचित कर देता है। अब देखना ये होगा कि सरकार दलितो के कंवर्सन को कैसे कंट्रोल करती है। वैसे आपको क्या लगता है क्या वाकई में कोई बड़ी साजिश हो रही है।
छेड़छाड़ से तंग आकर दलित छात्रा ने लगाई खुद को आग
2, दलितो से जुड़ा अगला मामला मध्य प्रदेश के सागर जिले से है. जहां लगातार हो रही छेड़छाड़ से तंग आकर 14 साल की नाबालिक दलित किशोरी ने खुद को आग लगा ली। ये सनसनीखेज घटना सागर जिले के मालथौन (खुरई) थाना क्षेत्र की है.. पीड़िता के पिता ने बताया कि उनकी बेटी मालथौन के सरकारी स्कूल में 9वीं कक्षा की छात्रा है। वो बस से स्कूल आना जाना करती थी लेकिन पिछले 3 महीनो से पास के गांव का एक लड़का कपिल लोधी उनकी बेटी को लगातार परेशान कर रहा था, वो जबरन पीड़िता पर बात करने का दवाब बना रहा था।
जिसे लेकर पीड़िता के पिता ने मालथौन थाने में शिकायत दर्ज करा दी, लेकिन उस शिकायत से नाराज होकर कपिल लोधी ने अपने 3 साथियों के साथ मिलकर पीड़िता के घर के बाहर ही उसके पिता को बुरी तरह से पीटना शुरु कर दिया.. जिससे घबराई पीड़िता ने घर में रखा डीजल खुद पर छिड़क कर आग लगा ली.. जिससे अफरा तफरी मच गई। पीड़िता को गंभीर हालात में सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, पुलिस के मुताबिक
पीड़िता की गर्दन, छाती का दाहिना हिस्सा और दोनों हाथ गंभीर रूप से झुलस चुके है, उसका इलाज जारी है साथ ही मामले की गंभीरता को समझते हुए पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरु कर दी है, साथ ही चारों आरोपियो की तलाश जारी है, हालांकि अभी तक कोई आरोपी पुलिस के हाथ नहीं लगा है। देखना ये होगा कि पुलिस कब तक पीड़िता को न्याय दिला सकती है।
बिहार सरकार ने दलितो के मामलों को निपटाने के लिए लिया फैसला
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला बिहार से है, जहां दलितों पिछड़ों और गरीब जरूरतमंद लोगो की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए First In First Out (FIFO) प्रणाली को 30 जून 2026 तक स्थगित कर के भूमि और आर्थिक लाभ देने के मामलो में अब SC-ST समुदाय के लोगो को पहले निपटाने का फैसला किया है। इसके अलावा सरकार ने विधवा औरते, सेना में कार्यरत या रिटायर जवानों, सुरक्षाकर्मीयों और सरकारी कर्मचारियों के मामलों को भी प्राथमिकता देने का फैसला किया है। राज्य में दिलत उत्पीड़न के बढ़ते मामलो और अभावो के कारण प्रताड़ना झेलने वाले दलितों को लेकर सरकार का ये रवैया एक सकारात्मक पहल है।
जिसके जरिये दलितो की स्थिति पर भी नजर रखी जायेगी.. और उनके मामलो को पहले निपटाया जायेगा.. जिससे उसकी स्थिति में सुधार लाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार ने सीधे चेतावनी दी है कि अगर इन मामलों को निपटाने में देरी हुई तो कसूरवार परिणाम के लिए तैयार रहें। बात दें कि राज्य सरकार ‘ईज ऑफ लिविंग’ को बेहतर बनाने का प्रयास कर रही है,, साथ ही पूर्व सीएम नीतिश कुमार को मिली लापरवाही के शिकायतो के बाद सरकार ने तेजी से सख्त कदम उठाया है।
वहीं अब से सरकार एससी/एसटी छात्रों को अब नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप के तहत विदेश में पढ़ाई का मौका देते हुए लाखों रूपये के स्कॉलरशिप की भी घोषणा कर चुकी है..ताकि उनकी शिक्षा पर ध्यान दिया जा सकें.. वैसे बिहार सरकार के इस कदम से क्या दलितों और पिछड़ो की स्थिति में कोई सुधार होगा हमें कमेंट करके जरूर बतायें।
पुरानी रंजिश के चलते दलित युवक पर जानलेवा हमला
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से है, जहां पुरानी रंजिश के चलते एक दलित युवक पर न केवल जानलेवा हमला किया गया बल्कि जब पीड़ित ने पुलिस से इसकी शिकायत की तो पहले तो पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार करने का स्वांग रचा और फिर कुछ देर बाद बिना किसी कार्यवाई के उसे रिहा कर दिया.. ये घटना सुलतानपुर के गोसाईगंज थाना क्षेत्र के कसमऊ गांव की है। पीड़ित बृजेश कुमार ने अपनी अपील में बताया कि 1 अप्रैल को वो अपने खेतो के ट्यूबवेल पर गया था, जहां पहले से ही आरोपी अरबाज मौजूद था।
दोनो के बीच पूरानी रंजिश थी, लेकिन जैसे ही बृजेश वहां पहुंचा अरबाज उसे गालियां देने लगा.. वो नशे में था, लेकिन जब ब्रजेश ने विरोध किया तो अरबाज ने बोतल तोड़ कर पीड़ित के सिर पर जानलेवा हमला कर दिया, जिससे वो बेहोश हो गया था। पीड़ित परिवार ने जब इसकी शिकायत थाने में दर्ज करानी चाही तो पुलिस आरोपी को ले भी गई लेकिन शाम होते ही छोड़ दिया।
जिसके बाद से पीड़ित का पूरा परिवार काफी डरा हुआ है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से गुहार लगाई है कि उन्हें न्याय मिले औऱ सुरक्षा मुहैया कराई जायें। अब देखना ये होगा कि क्या पुलिस पीड़ित परिवार के लिए न्याय दिला पायेगी.. या फिर ताकतवर लोगो के सामने वो भी केवल तमाशबीन बन कर रह जायेगी।
यूजीसी को लागू करने के लिए दलितों के साथ मुसलमान भी आयें साथ
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला यूजीसी के लागू करने की मांग को लेकर है, जहां अब तक दलित समाज केवल यूजीसी के नई गाइडलाईस को लागू कराना चाहती थी लेकिन अब दलिस संगटनो के साथ साथ मुसलमान भी यूजीसी को लागू करने के लिए उनके साथ खड़े हो गए है। इतना ही नहीं दलित संगठनों ने सीधे तौर पर मनुवादी सोच रखने वाले ब्राह्मणों को देश छोड़ कर जाने के लिए कह दिया है।
वो सड़को पर उतर कर साफ संदेश दे रहे है कि अगर यूजीसी नहीं लागू होता है तो सड़को पर दलितो का खून बहेगा.. लेकिन अब वो ब्राह्मणी सोच को और अपने ऊपर हावी होने नहीं देंगे। बताते चले कि यूजीसी पर बीते महीने 19 मार्च को फिर से सुनवाई होनी थी, लेकिन अभी तक ये स्थगित ही है.. तो वहीं दलित संगठन और छात्र अब भी लड़ाई लड़ रहे है.. ऐसे में देखना ये होगा कि दलित समुदाय की हिम्मत के आगे कब तक सरकार और कोर्ट नहीं झुकती है।



