जब से भारतीय जनता पार्टी केंद्र की सत्ता में आई है, तब से उनके शासन को रामराज्य से तुलना करने वालों की कमी नही है। खासकर जब अयोध्या में रामलला का मंदिर बना तब से तो और ज्यादा बीजेपी शासन को रामराज्य की उपाधि दी जा रही है..लेकिन इन सबके बीच एक मुद्दा और उठ रहा है.. आजादी से पहले जब हमारे देश का संविधान तैयार नहीं हुआ था, दलित पिछड़ो के लिए ब्राह्मणवादी लोग समाक नियमों को तय करते थे, महिलाओं के अधिकार सिमित थे..और जो गरीब, पिछड़े शूद्र थे, वो तो कभी भी सभ्य समाज का हिस्सा बनने का सपना भी नहीं देखते थे..ये वक्त था मनुस्मृति।
ब्राह्मण समाज मनुस्मृति के अनुसार जाति व्यवस्था का कट्टर समर्थक रहा और उन्होंने लोकतंत्रिक देश और धर्म निरपेक्षता को तो स्वीकार कर लिया लेकिन दलितों और अपनी महिलाओ का आजादी को कभी स्वीकार नहीं कर पाये। घर की चारदीवारी में कैद औरतो को आजादी से जीनते हुए देखना, शायद उनके पुरूषार्थ पर करारा प्रहार जैसा था.. और मौजूदा समय में भी दो गुट बंटे है..एक जय श्री राम वाले है तो वहीं एक जय भीम वाले… वहीं एक तरफ राम राज्य की बात होती है तो वहीं दूसरी तरफ बाबा साहब के संविधैनिक राज्य की। अब सवाल ये है कि आखिर दोनो में से कौन बेहतर है।
कैसा था रामराज्य – What was Ramrajya like?
जब हम रामराज्य की बात करते है तो हम एक ऐसे राज्य की परिकल्पना करते है, जो धर्म के आधार पर चलता हो, जहां सबके आदर्श एक सामान हो, और शासन राजा के हाथ होता है, जो प्रजा के कल्याण के लिए कार्य करता है, साथ ही राजधर्म, जो कि पीढ़ियो से चलता आ रहा हो, उसे ही आने वाले भविष्य के शासक भी फॉलो करेंगे। जो मानवता को नैतिकता के आधार पर तौलते है। रामराज्य में प्रजा का दुख, उनकी दरिद्रता को कैसे समाप्त किया जाये, उनके साथ कभी कोई अन्नाय न हो, उसके लिए पूरी कोशिश राजा करते थे, लेकिन इन सब सुख सुविधाओं के बावजूद भी कुछ कमियां राम राज्य में भी मौजूद रही…रामराज्य जातिगत व्यवस्था, वर्ण व्यवस्था और मनुवादी सोच से खुद को अलग नहीं कर पायें।
रामराज्य में दुख दरिद्रता नहीं
जिसका एक बड़ा साक्ष्य है एक शूद्र शंबूक की राजा राम द्वारा निर्मम हत्या..शंबूक का कसूर केवल इतना ही था कि उसने ब्राह्मणों की बनाये नियमों को तोड़ कर तप करने की हिम्मत की थी.. वो वन में तप कर रहा था..जिसका शिकायत ब्राह्मणों ने राजा राम को की और मजबूरी में वर्ण व्यवस्था की रक्षा करने और ब्राह्मणो के कोरे अंहकार को बनाये रखने के लिए शंबूक की हत्या कर दी। यानि की भले ही रामराज्य में दुख दरिद्रता नहीं थी, लेकिन जातिगत भेदभाव का दंश तब भी था..ब्राह्मणों के बनाये नियमों को मानकर चलना ही होता था, नहीं तो सामाजिक बाहिष्कार सहना पड़ता था..अब बात करते है बाबा साहब का संवैधानिक राज्य के बारे में।
कैसा है अंबेडकर का संवैधानिक राज्य
बाबा साहब खुद महार जाति से थे, उन्होंने छुआछूत और जातिगत भेदभाव को बचपन से बेहद करीब से सहा था.. जिसके कारण वो बागी हो गए थे। वो ऐसे किसी भी नियम को मानने के खिलाफ थे, जो लोगो को प्रताड़ित करता है, उन्हें उनके मानव होने के सम्मान से भी वंचित कर देता हो..लेकिन ब्रिटिशो ने भी इस भेदभाव के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया, जबकि उनके खुद के देश में जातिगत भेदभाव नही थी.. बाबा साहब जानते थे कि लड़ाई लंबी है, लेकिन जीत जरूर होगी…जैसे कि लड़कियों की शिक्षा के लिए ज्योतिबा फूले और सावित्रीबाई फूले ने लड़ाई लड़ी और जीती।
हालांकि बाबा साहब को मौका मिला और उन्होंने उस मौको को बखूबी भुनाया। उन्होंने भारत का संविधान तैयार किया, जो कि आधुनिकता विकास, तर्किक विकास की नींव था। उन्होंने सबकी स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और न्याय के आधार पर एक ऐसा लोकतंत्र की नींव रखी.. जिसमें जातिगत व्यवस्था तो थी, लेकिन उनके पास अपने अधिकार थे, उनके पास अपनी ताकत थी, जिसका इस्तेमाल करके वो ब्राह्मणवादी सोच को टक्कर देने की ताकत रखते है। उन्होंने शक्ति किसी एक के हाथ में देने के बजाय शक्तियों का बंटवारा किया और विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में शक्तियों को बांट दिया. जिससे एकाधिकार खत्म हो गया।
राजनीतिक तौर पर भी समानता के अधिकार
सबके मौलिक अधिकार बराबर हुए, न केवल सामाजिक तौर पर बल्कि आर्थिक तौर पर और राजनीतिक तौर पर भी समानता के अधिकार दिये गए। फैसला राजा के हाथों में नहीं बल्कि प्रजा के हाथों में दिया गया, जिसमें केवल एक ही वर्ण के लोग शामिल नहीं थे, बल्कि सभी धर्मों और सभी जाति के लोगो को शामिल किया गया। अंबेडकर का राज्य असल में तार्किक शक्तियों को देने वाला प्रजा राज्य लोकतांत्रिक आधार पर निर्धारित है, जबकि रामराज्य एक धार्मिक आदर्शों पर आधारिक व्यवस्था है। ऐसे में हम ये कह सकते है कि जो राज्य अंबेडकर ने बनाया, उन्होंने सभी को आजादी से जीने, मानव को मानव समझ कर अपना राज्य तैयार किया था। वैसे आपकी नजरो में कौन सा राज्य बेहतर है।



