Top 5 Dalit news: अगर कोई ये कहता है कि कानून अंधा है तो शायद गलत नहीं है.. न्याय व्यवस्था भी जातिय भेदभाव से इस तरह से भर चुकी है कि अगर मामला दलितों से जुड़ा हो तो सालों न्याय में लग जाते है, और सवर्णों से जुड़ा हो तो कुछ मिनटों में फैसले आ जाते है…. फिर भला न्याय पालिका कैसे सबके लिए बराबर हुई…तो चलिए आपाप्को इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में जानेंगे जो इस वक्त सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियों में है।
राजस्थान की राजनीति में बवाल
1, दलितों से जुड़ा पहला मामला राजस्थान से है, जहां दलित समाज से आने वाले प्रतिपक्ष नेता टीकाराम जूली ने बीजेपी सरकार पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। जूली ने विधानसभा सत्र के दौरान दलित नेताओं को अपनी बात न रखने देने का आरोप लगाते हुए कहा कि बीजेपी को ये हजम हो नहीं हो रहा है कि उनके प्रतिपक्ष के कोई दलित नेता विधानसभा में है। बीजेपी जानबूझ कर सत्र में हंगामा करती है, उसे खराब करती है ताकि उनसे कोई सवाल ही न कर पाए। सच तो ये है सरकार को राज्य की जनता की भलाई से कुछ लेना देना नहीं है।
उन्हें केवल अपना बजट पास कराना है लेकिन जब कोई उनसे सवाल करता है तो वो उल्टा उन पर ही सदन को बाधित करने का आरोप लगा देते है। वो सर्वदलीय बैठक नहीं करते है, फिर उनसे सवाल करें भी तो कब करें। जूली ने सीधे तौर पर सरकार को खुली चुनौती दी है सरकार कितनी भी कूटनीति अपना ले उनके खिलाफ, लेकिन वो डरने वाले नहीं है। उन्होंने जनता को आश्वासन दिया है कि सर्वदलीय बैठक के अपनी बात रखेंगे, और जो जनता सदन की तरफ आशा भरी नजरों से देखती है, उनके लिए आवाज जरूर उठाएंगे।
यूजीसी ने नए नियमों पर लगी रोक
2, दलितों से जुड़ा अगला मामला यूजीसी के नए नियमों को लेकर है। यूजीसी के नए नियमों को लेकर सवर्ण समाज पिछले कई दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहा था, लेकिन अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का नया फैसला आ गया। सुप्रीम कोर्ट ने नए नियमों पर रोक लगाते हुए कहा कि नए नियमों में स्पष्टता की कमी है इसलिए इसका दुरुपयोग किया जा सकता है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने नए नियमों पर फिलहाल के रोक लगाते हुए भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को कहा है कि इस मामले में अदालत को एक विशेषज्ञों की टीम बना कर दें ताकि वो इस मुद्दे में सही से जांच कर सकें। वहीं अदालत ने यूजीसी से भी कहा कि जब इस नए नियमों के खिलाफ इतनी याचिका आई है तो यूजीसी को भी जवाब देना चाहिए।
वहीं सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब दलित वर्ग सड़कों पर उतर आया है। दिल्ली यूनिवर्सिटी समेत कई शैक्षणिक संस्थानों में दलित छात्रों ने रैली निकल कर फैसले का विरोध किया है। बता दे कि संस्थानों के दलित छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव और अपराधों को देखते हुए यूजीसी 13 जनवरी को कुछ नए नियम लाई थी, लेकिन इसके बाद से ही सवर्ण समाज विरोध प्रदर्शन कर रहा था, वहीं मामले को बढ़ता देखकर इस मामले को सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में की गई, जहां मात्र कुछ मिनटों की सुनवाई में ही कोर्ट ने इस पर स्टे लगा दिया। हैरानी की बात है कोर्ट ने दलित छात्रों की स्थिति को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की जो केवल सबूत है इस बात का कि न्याय व्यवस्था भी जातिगत भेदभाव से अछूती नहीं है।
यूजीसी के नए नियम पर स्टे को लेकर आजाद का बड़ा बयान
3, दलितों से जुड़ा अगला मामला भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद को लेकर है, उन्होंने यूजीसी मामले में सुप्रीम कोर्ट को कुछ मिनटों की कार्यवाही और स्टे ऑर्डर के खिलाफ जमकर हमला किया है। आजाद ने कहा कि सालों से SC/ST मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित पड़े है, जिनके फैसले नहीं आए है वहीं जब भी फैसला आता है अगर मामला SC/ST का है तो ज्यादातर नेगेटिव ही आते है, जबकि यूजीसी के मामले में एक ही दिन में सुनवाई करके फैसला भी आ गया। ये फैसला न्यायिक व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करता है। वहीं जब भी किसी नियम के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करती है तो सरकार बचाव करती है लेकिन इस मुद्दे पर सरकार से कोई जवाबदेही नहीं आई।
ऐसा लगता है कि यूजीसी के नए नियम केवल दलितों और पिछड़ों को ठगने के लिए लाए गए थे, और सवर्णों ने इसके खिलाफ खड़े होकर सरकार की मंशा कर पानी फेर दिया है। आजाद ने कहा कि वो कोर्ट के फैसले के खिलाफ आंदोलन की नई राजनीति तैयार करेंगे, लेकिन इस स्टे को वापिस करवा कर रहेंगे। एक अधिवक्ता के तौर पर आजाद ने कहा कि ऐसा कौन सा नियम है जिसका दुरुपयोग नहीं होता, लेकिन यूजीसी ने तो केवल गाइडलाइन दी थी, फिर किस आधार पर दुरुपयोग जैसी बात कह कर स्टे लगा दिया गया। इससे तो दलित और पिछड़े छात्रों के साथ अन्याय करने का सर्टिफिकेट मिल गया है। जो दलितों छात्रों के खिलाफ ही उपयोग होगा।
भरतपुर में 85 साल की दलित महिला के साथ दुष्कर्म
4, दलितों से जुड़ा अगला मामला राजस्थान के भरतपुर से है, जहां तंत्र साधना के नाम पर बाप बेटे ने मिलकर एक 85 साल की दलित महिला के घर में घुसकर सामूहिक दुष्कर्म किया और बाइक से फरार हो गए। हैरानी की बात है उस दौरान घर के बाहर कई लोग थे लेकिन किसी को भी इसकी भनक नहीं लगी, वहीं घटना के कारण पीड़िता की स्थिति काफी खराब हो गई तो उसे बदनामी के डर से परिवार वाले दूर के जिला अस्पताल ले गए, जहां पीड़िता की गलत स्थिर होने पर शाम के समय खेड़ली मोड़ थाना पुलिस को जानकारी दी गई।
एएसपी मुख्यालय धर्मेंद्र यादव ने बताया कि इस मामले में तंत्र साधना का एंगल सामने आया है वहीं आरोपी पिता पुत्र है, जो कि अलवर के रहने वाले है।हालांकि जब दोनों फरार हुए तो हेलमेट पहन रखा था लेकिन सीसीटीवी और दोनों के हुलिए के आधार पर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है वहीं इस मामले में अभी एक तांत्रिक की तलाश जारी है। पुलिस दोनों आरोपियों से भी पूछताछ कर रही है। मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। तांत्रिक की गिरफ्तारी के बार और कई खुलासे हो सकते है।
दादरी में दलित युवक को जबरन रखा पुलिस कस्टडी में
5, दलितों से जुड़ा अगला मामला उत्तर प्रदेश के दादरी से है जहां एक दलित युवक को जबरन पुलिस कस्टडी में रखा गया और उसके साथ बुरी तरह से मारपीट की गई क्योंकि उसने पिछला मामला रफा दफा करने को कोशिश की थी। ये घटना दादरी कोतवाली क्षेत्र की है.. पुलिस वालों की इस हरकत से नाराज ग्रामीणों ने थाने के बाहर धावा बोल दिया और मामले में आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ कार्यवाई करने की मांग की। जानकारी के मुताबिक दो सगे भाईयो में किसी बात को लेकर मारपीट हुई थी, जिसे लेकर पुलिस ने दोनो को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन कुछ देर के बाद दलित संगठन के जुड़े एक कार्यकर्ता कुछ महिलाओं के साथ वहां पहुंचे और उन्होंने इस मामले में पारिवारिक मामला बता कर केस को रफा दफा करने की बात कहीं थी,
लेकिन पुलिस इस बात से भड़क गई, उन्होंने दलित कार्यकर्ता और महिलाओं को गालियां दी और कार्यकर्ता को जबरन थाने में रखा, इतना ही नहीं उसके साथ मारपीट भी की गई, जिसे लेकर ग्रामीणों ने हंगामा शुरु कर दिया.. वहीं एसीपी दादरी प्रशाली गंगवार का कहना है कि दोनो भाईयो के बीच पहले भी झगड़े हुए है, और मामला रफा दफा हो जाता है, पुलिस विभागिय जांच कर रही हहै।
लेकिन इस मामले में पुलिस ने किसी को भी हिरासत में नहीं लिया है और न ही किसी के साथ कोई मारपीट की गई है। पुलिस की तरफ से आये बयान के बाद ग्रामीणों का गुस्सा और भड़क गया है, ऐसे में देखना ये होगा कि जांच के बाद कौन सा सच सामने आता है। वैसे राज्य में पुलिस वालों की दलितों और पिछड़ों पर होने वाली दादागिरी की खबर कोई नई नहीं है, इसलिए हम अंदाजा लगा सकते है कि वाकई में पुलिस की भूमिका क्या रही होगी है।



