Samajwadi Party: मुस्लिम और दलितों का वोटिंग अधिकार खतरे में? सपा नेता के इस खुलासे से मचा हड़कंप

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Samajwadi Party: संतकबीरनगर (Sant Kabir Nagar) जिले की मेंहदावल विधानसभा सीट (assembly seat) इन दिनों वोटर लिस्ट को लेकर सियासी गर्मी का केंद्र बनी हुई है। समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) (सपा) ने भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) (भाजपा) (BJP) पर चुनाव से पहले बड़ी साजिश रचने का आरोप लगाया है। वहीं भाजपा और उसके सहयोगी दल निषाद पार्टी (Nishad Party) ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद और प्रोपेगंडा (Propaganda) बताया है। जिला प्रशासन ने निष्पक्ष जांच की बात कही है। आपको बता दें, यह पूरा मामला वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (special intensive Revision) (SIR) और फॉर्म-7 के इस्तेमाल को लेकर है। तो चलिए इस लेख के जरिए जानते है इस मामले में अब नई कड़ी कौन सी जुड़ी है।

क्या है पूरा मामला?

सपा के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी जयराम पांडेय (Jairam Pandey) के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने मेंहदावल तहसील (Menhdawal tehsil) और जिलाधिकारी कार्यालय (District Magistrate Office) पर प्रदर्शन किया। सपा का आरोप है कि भाजपा (BJP), प्रशासन और चुनाव प्रक्रिया में शामिल लोगों की मिलीभगत से मुस्लिम, दलित और पिछड़े (PDA) मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से कटवाए जा रहे हैं।
जयराम पांडेय (Jairam Pandey) ने जिलाधिकारी को एक फाइल सौंपते हुए दावा किया कि कई गांवों में सुनियोजित तरीके से मतदाताओं के नाम हटवाने की कोशिश हो रही है।

कब और कैसे बढ़ा विवाद?

यह विवाद तब बढ़ा जब SIR (Special Intensive Revision) के दौरान फॉर्म-7 के ज्यादा इस्तेमाल की बात सामने आई। फॉर्म-7 वह फॉर्म है जिससे किसी मतदाता के नाम पर आपत्ति दर्ज कर उसे वोटर लिस्ट (voter list) से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाती है। सपा (Samajwadi Party) का आरोप है कि इस फॉर्म का दुरुपयोग हो रहा है।

सपा ने भाजपा पर लगाया आरोप

जयराम पांडेय (Jairam Pandey) का कहना है कि गोईठहां (Goitha), बनेथू (Banethu) और पोखर भिटवा (Pokhar Bhitwa) जैसे गांवों में कुछ दबंग लोग BLO (Booth Level Officer) को डरा-धमका रहे हैं और जबरन फॉर्म-7 पर हस्ताक्षर करवाकर सपा समर्थकों के नाम कटवा रहे हैं। उनका कहना है कि “यह लोकतंत्र (Democracy) की हत्या है। हमने सबूत प्रशासन को दे दिए हैं। कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन करेंगे।” सपा प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने भी सोशल मीडिया पर इसे “संस्थागत चुनावी भ्रष्टाचार” (corruption) बताया।

अनिल त्रिपाठी का पलटवार

निषाद पार्टी (Nishad Party) के विधायक अनिल त्रिपाठी (Anil Tripathi) (जो 2022 में मेंहदावल से जीते थे) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि यह सब भाजपा (BJP) को बदनाम करने की साजिश है, उनकी टीम फॉर्म-6 भरवाकर नए वोटरों के नाम जोड़ने का काम कर रही है, फॉर्म-7 भरना किसी भी नागरिक का अधिकार है, इसे साजिश कहना गलत है। उन्होंने कहा कि सपा पहले भी ईवीएम (EVM) और वोट चोरी जैसे आरोप लगाती रही है।

क्यों गरमाया मामला?

यह मामला इसलिए ज्यादा तूल पकड़ गया क्योंकि आरोप सीधे वोटर लिस्ट (Voter List) से छेड़छाड़ से जुड़े हैं PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) मतदाताओं को निशाना बनाने की बात कही गई। चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए, स्थानीय स्तर पर प्रदर्शन और राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई

कौन हैं जयराम पांडेय?

जयराम पांडेय (Jairam Pandey) समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के सक्रिय नेता हैं और संतकबीरनगर ( Sant Kabir Nagar) जिले से जुड़े हैं। उनके जन्मदिन की बात करें तो उनके आधिकारिक सोशल मीडिया प्रोफाइल और समर्थकों द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि वे अपना जन्मदिन 22 जनवरी को मनाते हैं। गरीबों का नेता और सादा जीवन शैली जीने को लेकर पहचाने जाते है।
बता दें कि मेंहदावल विधानसभा(Menhdawal Assembly Constituency) से 2022 में सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा। वे अपने राजनीतिक पोस्टरों और जमीनी सक्रियता के लिए भी जाने जाते हैं।

जयराम पांडेय का सियासी सफर

2022 विधानसभा चुनाव मेंहदावल सीट (Menhdawal Assembly Constituency) से सपा प्रत्याशी रहे। उन्हें 84,970 वोट मिले और वे अनिल त्रिपाठी (Anil Tripathi ) से 5,223 वोटों से हार गए। कानूनी लड़ाई हार के बाद उन्होंने विजयी प्रत्याशी पर जानकारी छिपाने का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। लखनऊ में अखिलेश यादव(Akhilesh Yadav) के समर्थन में चर्चित पोस्टर लगवाने के कारण अक्सर चर्चा में रहे। उन्हें सपा ने मेंहदावल (Menhdawal) क्षेत्र का पर्यवेक्षक भी बनाया था। फरवरी 2026 में वोटर लिस्ट (voter list) से नाम काटे जाने के मुद्दे पर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं।

सपा ने भाजपा पर क्या आरोप लगाए?

1. फॉर्म-7 का गलत इस्तेमाल
2. बीएलओ पर दबाव बनवाना
3. PDA वोटरों को टारगेट करना
4. चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल
5. असली वोट काटकर फर्जी वोट जोड़ने का आरोप

प्रशासन का रुख

जिलाधिकारी ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। अभी तक आधिकारिक रूप से किसी गड़बड़ी की पुष्टि नहीं हुई है। मेंहदावल (Menhdawal) का यह विवाद सिर्फ स्थानीय राजनीति तक सीमित नहीं रह गया है। मामला वोटर लिस्ट (voter list), चुनाव प्रक्रिया और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा होने के कारण संवेदनशील हो गया है। एक तरफ सपा गंभीर आरोप लगा रही है, तो दूसरी तरफ भाजपा इन्हें दुष्प्रचार बता रही है। अब सबकी नजर प्रशासनिक जांच पर है, जिससे साफ होगा कि हकीकत क्या है।

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