Top 5 Dalit news: जातिवाद की भेंट चढ़ा बचपन, दलित रसोइया की नियुक्ति पर ग्रामीणों ने बच्चों को आंगनवाड़ी भेजना बंद किया

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Top 5 Dalit news: हम आज के युवा से ये उम्मीद करते है कि वो जातिगत भेदभाव की बेड़ियों को तोड़कर स्वतंत्र सोच को अपनाये, सबको एक समान समझे..लेकिन अगर ये युवा जातिगत भेदभाव की मानसिकता रखते है तो इसमें सबसे ज्यादा कसूर तो उनके मां-बाप का है, जो छोटे छोटे बच्चों को भेदभाव सिखाने के लिए पिछड़ो से घृणा करना सिखाते है, ऐसे में कहां से होगी बराबरी..तो चलिए आपको इस लेख में पिछले 24 घंटे में दलितों के साथ होने वाली घटनाओं के बारे में बतायेंगे जो इस वक्त सोशल मिडिया पर काफी सुर्खियों में है।

यूपी बन रहा है महिलाओं के लिए कब्रगाह

1, दलितों से जुड़ा पहला मामला उत्तर प्रदेश के सीतापुर से है, जहां 5 साल की मासूम दलित बच्ची को शराब के नशे में धुत्त दरिंदे ने पहले अपने हवस का शिकार बनाया और फिर उसकी निर्मम हत्या कर दी। दिल को झकझोर देने वाली ये घटना सीतापुर जिले के बिसवां क्षेत्र  का है, बच्ची के पिता ने पुलिस को तहरीर दी थी कि बच्ची घर के बाहर खेल रही थी, जिसे आरोपी चॉकलेट का लालच देकर ले गया। काफी देर तक जब बच्ची नहीं मिली तो उसकी खोजबीन की गई, तब बच्ची का शव घर से करीब दो सौ मीटर दूर एक झोपड़ी की चारपाई पर मिली। पिड़ित परिवार ने सुरेंद्र यादव नाम के शख्स पर शक जाहिर किया था।

जिसे पुलिस ने गिरफ्तार भी कर लिया औऱ पूछताछ शुरु कर दी है. वहीं सोर्सेज की माने तो बच्ची के पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उसके साथ पहले दुष्कर्म किया गया और फिर उसका गला घोंट कर हत्या कर दी गई। बच्ची के शरीर पर काफी गंभीर चोट के निशान मौजूद थे। वहीं  एएसपी उत्तरी आलोक सिंह के मुताबिक पीड़ित परिवार ने बयाता था कि आरोपी घटना के वक्त उसके घर के बाहर शराब के नशे में घूम रहा था, वहीं जब उसे पूछताछ हुई तो उसने गुनाह कबूल कर लिया है। पुलिस ने 5 और लोगो को पूछताछ के लिए तलब किया है।

दलित की आगंनवाड़ी में नियुक्ति पर गांव का बहिष्कार

2, दलितों से जुड़ा अगला मामला ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले से है, जहां एक आंगनवाड़ी पिछले 3 महीने से बंद पड़ी है क्योंकि वहां एक दलित महिला को बतौर हेल्पर और कुक काम पर रखा गया था। दलित महिला के आंगनवाड़ी में काम करने के कारण बच्चो के माता-पिता ने अपने बच्चों को आगनवाड़ी भेजना ही बंद कर दिया है। ये खबर राजनगर ब्लॉक के घड़ियामल ग्राम पंचायत के नुआगांव की है, 20 साल की दलित महिला शर्मिष्ठा सेठी ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि 20 नवंबर, 2025 को आगंनवाड़ी में नियुक्ति हुई थी, लेकिन जैसे ही गांव वालों को इसकी खबर लगी, आंगनवाड़ी में आने वाले 20 बच्चों ने आना ही बंद कर दिया।

पीड़िता ने बताया कि आंगनवाड़ी के वर्करोंने घर घर जाकर उन्हें समझाने की कोशिश भी की, लेकिन सबमें जातिगत भेदभाव इतना भरा हुआ है कि कोई बच्चे को भेजना के लिए तैयार ही नहीं हुआ। जिसे लेकर पीड़िता ने केंद्रपाड़ा डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन से शिकायत की थी। हालांकि अब एडमिनिस्ट्रेशन ने अपनी टीम भेज कर इसका समाधान निकालने की कोशिश शुरु कर दी है। हालांकि बच्चों को दूर रखने के लिए किसी ने भी जातिगत भेदभाव की बात स्वीकार नहीं की है, लेकिन ये सब शुरु तभी हुआ है, लेकिन फिर भी गांव वाले कुछ कहने को तैयार नहीं है। अब ऐसे में देखना ये होगा कि क्या शर्मिष्ठा को गांव वालों की जिद के आगे नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा।

यूपी में उग्र हुआ यूजीसी आंदोलन

3, दलितों से जुड़ा अगला मामला यूपी से है, जहां दलितों और पिछड़ों का हितैषी होने के सरकार के सारे दावे कितने खोखले है उसकी पोल खुल रही है। यूजीसी के नए नियमों पर लगे स्टे को लेकर सवर्णों के आंदोलन पर एक कड़ा कदम न उठाने वाली सरकार को बहुजनो का संगठित होना इतना खल रहा है कि वो छात्र तो छात्र राजनैतिक पार्टी से जुड़े लोगो को भी जबरन उठा रहे है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें बहुजन छात्रो के हक में आवाज उठाने वाली अपना दल (कमेरावादी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और सिराथू से समाजवादी पार्टी की विधायक डॉ. पल्लवी पटेल को पुलिस जबरन गाड़ी में बिठा रही है।

जबकि वो केवल दलित छात्रों का समर्थन करने गई थी। इस मुद्दे पर भीम आर्मी चीफ चंद्र शेखर आजाद ने भी अपा रोष जाहिर करते हुए कहा कि एक निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के साथ पुलिस का ये रवैया, सत्ता के असहिष्णुता और दमनकारी मानसिकता को भी उजागर करती है। सरकार किस तरह से पिछड़ो बहुजनों के प्रति द्वेष रखती है, यहीं उनकी भेदभाव की नीति सामने आ जाती है। हैरानी की बात है कि अभी तक सरकार की तरफ से इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं दी गई है। जो सबूत है कि सबकुछ उनकी ही शय पर हो रहा है। आपको क्या लगता है हमें कमेंट करके बतायें।

संभल में जातिवादी दबंगो की दादागिरी

4, दलितो से जुड़ा अगला मामला यूपी के संभंल है, जहां एक वाल्मिकी समाज से आने वाले परिवार को जातवादी दबंगो ने इतना परेशान किया हुआ है कि वो इत अत्याचार से त्रस्त होकर पलायन करने पर मजबूर हो गये है। ये घटना संभल के चिमयावली गांव का है, पीड़ित सोनू वाल्मिकी दोनो पैरो से विकलांग है, उसका परिवार किसी तरह से गुजारा कर रहा है, उनका 70 साल पुराना घर बुरी तरह से जर्जर है, लेकिन ऐसी हालात में भी गांव के प्रजापति समाज के लोगो ने उसके घर का रास्ता बंद कर दिया है। जिससे उन्हें घर से निकलने में परेशानी होती है।

जिसके बाद पीड़ित परिवार ने राष्ट्रीय दलित पिछड़ा वर्ग के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप सिरसवाल से मुलाकात कर मदद की गुहार लगाई, सिरसावाल ने इस मुद्दे पर अपर पुलिस अधीक्षक आलोक भाटी से मुलाकात कर तत्काल इस समस्या का निपटान करने की मांग की है साथ ही पीड़ित परिवार के लिए सुरक्षा मुहैया कराने को कहा है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि वो जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान निकालेंगे। हालांकि पुलिस की कार्यवाई पर अब खुद सामाजिक संगठन भी नजर रखी हुई है। ऐसे में देखना ये होगा कि दलित परिवार की समस्या कब तक निपटाये जायेंगे।

केरल में दलित युवक के हित में बड़ा फैसला

5, दलितों से जुड़ा अगला मामला केरल के कोच्चि से है, जहां एक दलित पर जाली दस्तावेज दिखाने को लेकर किए गए झूठे केस को लेकर केरल हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। दरअसल दलित समाज से आने वाले वेलायुधन ने इरिंजालकुडा पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके अनुसार HIGHWAY KURIES PVT LTD और उसके प्रबंध निदेशक सुभाष ने पीड़ित और उसके पिता के खिलाफ जो धोखाधड़ी का मुकादमा दर्ज किया था वो बेबुनियाद था, दावा किया गया था कि पीड़ित और उसके पिता ने खुद कागजातों पर दस्तखत किये थे, लेकिन जब पीड़ित ने मामला दर्ज कराया तो कंपनी ने मुकदमा वापिस ले लिया।

जिसे लेकर अब  जस्टिस ए. बदरुदीन की एकल पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि जाली दस्तावेज देकर किसी के खिलाफ मामला दर्ज कराना झूठा, दुर्भावनापूर्ण या तंग करने वाला है। वहीं उन्होंने एससी/एसटी एक्ट की धारा 8(c) का हवाला  देते हुए कहा कि अगर पीड़ित की नीजि जानकारी आरोपी को होती है तो ये मान लिया जाता है कि वो जातिगत भेदभाव की भावना से परेशान किया है। इसलिए अब आरोपी पक्ष पर धोखाधड़ी करने के साथ साथ एससी एसटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज कर जांच की जायेगी। कोर्ट का ये फैसला बताता है कि न्याय अभी भी दलितों के हित में है। आपको क्या लगता है।

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